सरिस्का में सफारी के नाम पर पेड़ों की कटाई, 400 साल पुराने बाला किला की दीवार भी टूटी, उठ रहे कई सवाल

Last Updated:April 21, 2026, 12:55 IST
Sariska Buffer Zone Controversy : अलवर के सरिस्का बफर ज़ोन में जंगल सफारी के लिए बनाए गए नए रास्ते ने विवाद खड़ा कर दिया है. हजारों पेड़ों की कटाई और 400 साल पुराने बाला किला की दीवार तोड़े जाने के आरोप लगे हैं. स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने इसे पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहर के साथ गंभीर लापरवाही बताया है.
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Sariska Buffer Zone Controversy
अलवर : शहर के पास स्थित सरिस्का बफर ज़ोन में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जंगल सफारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए एक नए रास्ते ने अब पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहर, दोनों को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है. यह रास्ता आड़ा पाड़ा से अंधेरी होते हुए सूरजकुंड के रास्ते सीधे बाला किला क्षेत्र तक तैयार किया गया है. सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि इस मार्ग के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की गई.
स्थानीय लोगों के अनुसार, हजारों पेड़ों को हटाया गया, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है. सरिस्का जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां पर्यावरणीय नियमों और संरक्षण की भावना के विपरीत मानी जा रही हैं. इतना ही नहीं, इस निर्माण कार्य के दौरान अलवर की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले करीब 400 साल पुराने बाला किला की परकोटा (सुरक्षा दीवार) को भी नुकसान पहुंचाया गया है.
बाला किला दीवार टूटी, लोगों में भारी आक्रोशयह किला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी एक प्रमुख आकर्षण रहा है. दीवार को तोड़े जाने की खबर सामने आने के बाद इतिहास प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. स्थानीय लोगों ने वन विभाग के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब पहले से ही जंगल सफारी के लिए रास्ता मौजूद था, तो नए मार्ग के निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी. उनका मानना है कि बिना ठोस कारण के पेड़ों की कटाई और किले की संरचना को नुकसान पहुंचाना गैर-जिम्मेदाराना कदम है.
सफारी रास्ते पर उठे सवाल, HC जाने की चेतावनीइस पूरे मामले को लेकर डॉ. कांति प्रसाद शर्मा ने भी कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने इसे पर्यावरण और धरोहर दोनों के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करेंगे. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर नियमों की अनदेखी की जा सकती है और क्या विकास के नाम पर इतिहास और प्रकृति को नुकसान पहुंचाना उचित है.
वन विभाग पर घिरा मामला, जांच के बाद ही जवाबइस मामले में जब संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया ली गई, तो सीसीएफ संग्राम सिंह ने कहा कि उन्हें अभी इस पूरे प्रकरण की पूरी जानकारी नहीं है और वे जांच के बाद ही कोई टिप्पणी कर पाएंगे. फिलहाल, यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले समय में यह प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. पर्यावरण संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर उठे ये सवाल अब जवाब मांग रहे हैं.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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Location :
Alwar,Rajasthan
First Published :
April 21, 2026, 12:55 IST



