Cooler Sales Slump In Jaipur Market | Best Color Market In Jaipur

Last Updated:April 22, 2026, 09:21 IST
Slump in Jaipur Cooler Market Sales: जयपुर में तापमान 40 डिग्री के पार पहुँचने के बावजूद कूलर बाजार में फिलहाल मंदी का माहौल बना हुआ है. भीषण गर्मी के इस दौर में जहाँ कूलरों की बंपर मांग होनी चाहिए थी, वहीं स्थानीय व्यापारियों के अनुसार इस बार बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है. व्यापारी इमामुद्दीन ने बताया कि इस साल बाजार में मांग पिछले वर्षों के मुकाबले बहुत कम है, जहाँ पहले रोजाना 15 कूलर बिकते थे वहां अब केवल 5% ही डिमांड है. इसका मुख्य कारण लोगों के पास बजट की कमी और महंगाई को माना जा रहा है. इसके साथ ही ग्राहकों का रुझान अब लोहे के कूलरों के बजाय प्लास्टिक के कूलरों की ओर ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि प्लास्टिक कूलर सुरक्षित और सुविधाजनक माने जाते हैं.
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Slump in Jaipur Cooler Market Sales: राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर चुका है. सुबह की शुरुआत के साथ ही सूरज के तीखे तेवर लोगों को बेहाल करने लगते हैं और दोपहर होते-होते सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है. ऐसी तपिश में इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक राहत की तलाश में हैं और घरों में कूलर, पंखे व एसी ही एकमात्र सहारा बने हुए हैं. अमूमन मार्च के महीने से ही बाजारों में कूलरों की मांग बढ़ने लगती थी, लेकिन इस साल जयपुर के बाजारों में स्थिति बिल्कुल उलट नजर आ रही है. भीषण गर्मी के बावजूद कूलर व्यापारियों का धंधा फिलहाल ठंडे बस्ते में है और सीजन के पहले महीने में ग्राहकों का वह उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है जो हर साल व्यापारियों के चेहरे पर रौनक लाता था.
लोकल-18 ने जब जयपुर के बाजारों में पहुँचकर कूलर की डिमांड को लेकर बात की तो व्यापारी इमामुद्दीन ने अपनी पीड़ा साझा की. उनके अनुसार इस बार अप्रैल का महीना खत्म होने को आया है लेकिन बाजार में वह हलचल नहीं है जिसकी उन्हें उम्मीद थी. कूलर का व्यापार साल में केवल दो-तीन महीने ही चलता है और व्यापारी सालभर इसी सीजन का इंतजार करते हैं. इमामुद्दीन बताते हैं कि पहले अप्रैल के महीने में हर छोटी-बड़ी दुकान से रोजाना 10 से 15 कूलर आसानी से बिक जाते थे, लेकिन इस साल स्थिति यह है कि दिनभर में बमुश्किल एक या दो ग्राहक ही दुकान पर पहुँच रहे हैं. इसका एक बड़ा कारण लोगों की आर्थिक स्थिति और महंगाई भी है क्योंकि बाजार में कूलरों की कीमत 5 हजार रुपए से शुरू होकर 30 हजार रुपए तक पहुँच गई है, जिससे आम आदमी के लिए खरीदारी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
लोहे बनाम प्लास्टिक कूलरों की जंगबाजार के बदलते ट्रेंड ने स्थानीय कारीगरों की चिंता भी बढ़ा दी है. इमामुद्दीन बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में लोगों का रुझान लोहे के भारी-भरकम कूलरों के बजाय स्टाइलिश प्लास्टिक कूलरों की ओर बढ़ा है. प्लास्टिक के कूलर कम जगह घेरते हैं और आधुनिक तकनीकी फीचर्स के कारण लोगों को अधिक आकर्षित करते हैं. इसके अलावा लोहे के कूलरों में खारे पानी की वजह से जंग लगने और करंट फैलने का खतरा बना रहता है, जिसके चलते लोग अब प्लास्टिक के विकल्पों को सुरक्षित मान रहे हैं. हालांकि ठंडी हवा के मामले में आज भी लोहे के कूलर को ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इनके स्पेयर पार्ट्स सस्ते और आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि प्लास्टिक के कूलर कुछ ही सालों में खराब होने लगते हैं.
आने वाले दिनों से बंधी उम्मीदेंकूलर व्यापारियों के लिए यह सीजन आजीविका का मुख्य स्रोत है. मौसम में आए बदलाव के कारण मार्च के बजाय अप्रैल से गर्मी की सही शुरुआत हुई है और बाजार में वर्तमान में केवल 5 प्रतिशत ही डिमांड देखी जा रही है. व्यापारियों का मानना है कि जैसे-जैसे मई के महीने में लू चलेगी और गर्मी का प्रकोप और अधिक बढ़ेगा, वैसे ही बाजार में कूलरों की मांग में तेजी आएगी. फिलहाल जयपुर के कूलर व्यापारी सुबह से शाम तक दुकानों पर बैठकर ग्राहकों की राह देख रहे हैं ताकि सालभर की मेहनत का फल उन्हें इस सीजन में मिल सके. अब सबकी नजरें मई की तपिश पर टिकी हैं, जहाँ से व्यापारियों को अच्छे व्यापार और आर्थिक रिकवरी की पूरी उम्मीद है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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Location :
Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
April 22, 2026, 09:21 IST



