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UP बोर्ड हाई स्कूल में महिमा चौरसिया का कमाल, जिले में तीसरा तो वहीं प्रदेश में 7वां स्थान लाकर बढ़ाया मान

गोंडा: कहते हैं कि अगर इंसान ठान ले, तो कोई भी मुश्किल उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती. ऐसा ही कर दिखाया है महिमा चौरसिया ने, जिनके पिता दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद महिमा ने हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में पूरे प्रदेश में सातवां स्थान हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन कर दिया.

पिताजी करते हैं दिहाड़ी मजदूरी

लोकल 18 से बातचीत के दौरान महिमा चौरसिया बताती है कि उनके पिताजी दिहाड़ी मजदूरी करती हैं और माताजी गृहणी हैं. उन्होंने बताया कि हम श्री कुंज बिहारी स्मारक इंटर कॉलेज सुभागपुर गोंडा में पढ़ाई कर रही थी इस बार मेरा हाई स्कूल का बोर्ड परीक्षा हुआ था जिसमें हमारा प्रदेश में सातवां स्थान और जिले में तीसरा स्थान प्राप्त की हूं.

आर्थिक स्थिति है बहुत कमजोर

महिमा चौरसिया का परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है. उनके पिता रोज मजदूरी पर जाते हैं और जो भी कमाते हैं, उसी से घर का खर्च चलता है. कई बार ऐसा भी होता था कि घर में पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं. महिमा बताती है कि हमारे यहां इनवर्टर का व्यवस्था नहीं था लाइट चली जाती थी तो हमको पढ़ाई करने में काफी दिक्कत होती थी और हम मोबाइल जलाकर पढ़ाई करती थी. और कभी-कभी लाइट का इंतजार करती थी.इसके बावजूद महिमा ने कभी हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी.

हर दिन 6 से 7 घंटा पढ़ाई

महिमा बताती हैं कि उन्होंने शुरुआत से ही पढ़ाई को गंभीरता से लिया. स्कूल के साथ-साथ घर पर भी नियमित रूप से पढ़ाई 6 से 7 घंटा पढ़ाई करती थी. उन्होंने समय का सही उपयोग किया और हर विषय को समझकर पढ़ने की कोशिश की. खास बात यह रही कि उन्होंने मोबाइल और अन्य चीजों से दूरी बनाकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया.

माता-पिता का है बहुत बड़ा योगदान

महिमा चौरसिया बताती हूं कि मेरे सफलता के पीछे मेरे माता-पिता का भी बड़ा योगदान है. भले ही वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को पढ़ने के लिए प्रेरित किया. पिता ने अपनी मेहनत से घर चलाते हुए भी महिमा की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. मां ने भी घर के काम संभालकर बेटी को पढ़ाई के लिए समय दिया.

शिक्षकों का मेला पूरा साथ: स्कूल के शिक्षकों ने भी महिमा का पूरा साथ दिया. उन्होंने समय-समय पर मार्गदर्शन किया और पढ़ाई में आने वाली दिक्कतों को दूर किया. महिमा चौरसिया कहती हैं कि अगर उन्हें शिक्षकों का सहयोग नहीं मिलता, तो यह सफलता पाना इतना आसान नहीं होता.

आगे चलकर क्या बनने का है सपना

महिमा चौरसिया बताती है कि आगे चलकर हमको डॉक्टर बनना है और अभी से हम उसके लिए तैयारी कर रही हूं. मेरी बहन मुझे हमेशा कहती थी कि पढ़ाई पर पूरा फोकस करो, आप पढ़ने में काफी अच्छी हो और आगे पूरे जिले का नाम रोशन करोगी. हमारी दीदी हमको हमेशा मोटिवेट करती थी.

कौन से विषय में है अच्छी पकड़

महिमा चौरसिया बताती है कि मैथमेटिक्स में हमारी अच्छी पकड़ है और हमको मैथमेटिक्स पढ़ना काफी पसंद भी है जब हम कभी टेंशन में होती थी तो मैथमेटिक्स के क्वेश्चन को सॉल्व करने लगती थी तो हमारा टेंशन खत्म हो जाता था.

महिमा चौरसिया बताती हूं कि हम छात्र-छात्राओं से कहना चाहती हूं कि सोशल मीडिया से अधिक से अधिक दूरी बनाए रखें और मोबाइल का प्रयोग केवल पढ़ाई के लिए ही करें. और नियमित रूप से हर विषय की पढ़ाई करनी.

महिमा की कहानी उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं. यह साबित करता है कि सफलता पाने के लिए पैसे नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जरूरत होती है.

महिमा चौरसिया के चाचा राम आशीष चौरसिया बताते हैं कि हम और हमारे बड़े भैया मजदूरी करते हैं और मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाते हैं और घर का रोजी-रोटी उसी से चलता है, हमको बड़ी खुशी हुई कि हमारी भतीजी आज प्रदेश में सातवां स्थान और जिले में तीसरा स्थान प्राप्त करके हम लोग का नाम रोशन की है और हमारी भतीजी भविष्य में डॉक्टर बन के समाज सेवा करना चाहती है.

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