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मंत्रियों के इस्तीफे और राष्ट्रपति की जिद, फिर भी पेरू ने दिया F-16 फाइटर जेट का ऑर्डर, इसमें लगा ‘जादुई’ रडार

लीमा: पेरू सरकार ने अपनी वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए लॉकहीड मार्टिन से 12 नए F-16 ब्लॉक 70 मल्टीरोल फाइटर जेट्स खरीदने का ऐलान किया है. यह फैसला 23 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक किया गया. पेरू के पास फिलहाल मिराज 2000 और मिग-29 जैसे पुराने विमान हैं. इन विमानों के रखरखाव और प्रदर्शन में काफी दिक्कतें आ रही थीं. पेरू की अंतरिम सरकार ने सााब (Saab) और डसॉल्ट (Dassault) के प्रस्तावों पर भी विचार किया था. आखिर में F-16 ब्लॉक 70 को उसकी शानदार क्षमता और पुराने रिकॉर्ड के कारण चुना गया.

इस डील को लेकर पेरू में काफी राजनीतिक ड्रामा भी हुआ. अंतरिम राष्ट्रपति जोस मारिया बालकाजर ने शुरुआत में इस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था. उनका तर्क था कि इतनी बड़ी डील अगली सरकार को करनी चाहिए. इस विवाद के चलते पेरू के रक्षा और विदेश मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ा था. आखिरकार लॉकहीड मार्टिन की जीत हुई और पेरू अब F-16 इस्तेमाल करने वाला दुनिया का 30वां देश बन गया है.

F-16 ब्लॉक 70 की सबसे बड़ी खूबियां क्या हैं?

F-16 ब्लॉक 70 को ‘वाइपर’ भी कहा जाता है और यह इस सीरीज का सबसे एडवांस वर्जन है.

इसमें नॉर्थरोप ग्रुम्मन का APG-83 AESA रडार लगा है. यह रडार 5वीं जनरेशन के फाइटर जेट्स जैसे F-22 और F-35 की तकनीक पर आधारित है.
यह पायलट को दुश्मन के टारगेट की बहुत साफ और सटीक जानकारी देता है.
विमान के कॉकपिट में एक नया सेंटर पेडेस्टल डिस्प्ले (CPD) लगाया गया है. यह हाई-रिजॉल्यूशन स्क्रीन पायलट को टैक्टिकल डेटा और कलर मूविंग मैप्स दिखाती है.
इसकी स्ट्रक्चरल लाइफ भी बढ़ाकर 12,000 घंटे कर दी गई है. इसका मतलब है कि पेरू की वायु सेना इसे अगले 40 सालों तक आसानी से उड़ा सकेगी.
इसमें ऑटोमैटिक ग्राउंड कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (Auto GCAS) भी है. यह सिस्टम पायलट के बेहोश होने या कंट्रोल खोने पर विमान को जमीन से टकराने से बचाता है.

इसकी मारक क्षमता जबरदस्त है और यह एक साथ कई तरह की मिसाइलों और बमों को ले जा सकता है.

ईरान युद्ध 2026 में F-16 का प्रदर्शन कैसा रहा?

28 फरवरी 2026 को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया, तो F-16 इसका मुख्य हिस्सा बना. इन विमानों को मुख्य रूप से ईरान के रडार सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर्स को तबाह करने का जिम्मा सौंपा गया था.

अमेरिकी एयरफोर्स ने इन जेट्स को नए ‘एंग्री किटन’ (Angry Kitten) इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पॉड्स से लैस किया था. इस तकनीक की मदद से F-16 ने ईरान के पुराने रडार सिस्टम को आसानी से चकमा दिया. युद्ध के शुरुआती 24 घंटों में ही इन विमानों ने ईरान के नेवल बेस और कमांड सेंटर्स पर सटीक बमबारी की.

पेरू की आसमानी ताकत में होगा इजाफा. (File Photo : Reuters)

हालांकि, ईरान के एयर डिफेंस ने भी कड़ी चुनौती पेश की है. 2 अप्रैल 2026 को ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उनके IRGC बल ने क्युशम द्वीप (Qeshm Island) के पास एक F-16 को मार गिराया है. इसके कुछ फुटेज भी सोशल मीडिया पर शेयर किए गए, जिसमें विमान से धुआं निकलते देखा गया.

ईरान का कहना है कि उसने अपने स्वदेशी रडार और मिसाइल सिस्टम से इस आधुनिक जेट को निशाना बनाया. अमेरिका ने विमान के गिरने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह जरूर माना है कि ईरान का डिफेंस सिस्टम पहले से काफी ज्यादा खतरनाक हो गया है.

क्या F-16 अब ड्रोन के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है?

इस युद्ध में एक नई चीज देखने को मिली है, वह है F-16 का ड्रोन-हंटर अवतार. ईरान ने युद्ध के दौरान सैकड़ों ‘शाहिद’ ड्रोन से हमले किए. इन सस्ते ड्रोनों को गिराने के लिए महंगी मिसाइलें खर्च करना घाटे का सौदा था. ऐसे में F-16 को ‘APKWS’ लेजर गाइडेड रॉकेटों से लैस किया गया. यह एक सस्ता और सटीक तरीका साबित हुआ है.

F-16 ने न केवल हवा में उड़ते ड्रोनों को मार गिराया, बल्कि जमीन पर मौजूद उनके लॉन्चिंग पैड्स को भी खत्म कर दिया.

पायलटों के अनुसार, F-16 ने ईरान के ‘बैरियर एयर डिफेंस’ में छेद करने का काम बखूबी किया है. इजरायली F-16 जेट्स ने भी तेहरान के पास मौजूद कई सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक की. हालांकि, ईरान का दावा है कि उसके रडार ने इन विमानों को ट्रैक किया था.

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