45 डिग्री की आग से राहत… हैदराबाद के इस जगह छिपा है ‘तेलंगाना का कश्मीर’

Last Updated:April 25, 2026, 19:30 IST
Best Places Visit In Summer Season: हैदराबाद की भीषण गर्मी से राहत के लिए कुमारम भीम आसिफाबाद का केरामेरी घाट लोकप्रिय, ठंडी हवाएं, ब्लू हिल इफेक्ट, तारों भरा आकाश और स्थानीय खाने का खास आकर्षण. लोग इसे तेलांगाना का कश्मीर भी कहते हैं. जानें यहां और क्या कुछ खास है.
हैदराबाद में पारा 44-45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. शहर किसी कंक्रीट की भट्टी सा तप रहा है. ऐसे में यदि आप इस सप्ताहांत चिलचिलाती गर्मी से राहत पाना चाहते हैं तो उत्तर दिशा में कुमारम भीम आसिफाबाद जिले की ओर रुख करना सबसे सुखद विकल्प है. यहाँ स्थित केरामेरी घाट न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है बल्कि इसे तेलंगाना का कश्मीर भी कहा जाता है.
रोमांचित कर देने वाला 18 तीखे मोड़<br />हैदराबाद से लगभग 340 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान एक शानदार रोड ट्रिप का गंतव्य है. केरामेरी घाट की असली पहचान इसकी चढ़ाई है. यहाँ 6 किलोमीटर की दूरी में 18 तीखे S आकार के घुमावदार मोड़ हैं. जैसे-जैसे आपका वाहन ऊंचाई की ओर बढ़ता है, हवा ठंडी और ताजगी भरी होने लगती है. शिखर पर पहुँचते ही शहर की उमस पूरी तरह गायब हो जाती है.
यात्री सुझाव<br />अपनी इस 48 घंटे की यात्रा को यादगार बनाने के लिए शाम 5 बजे केरामेरी घाट की चढ़ाई शुरू करें ताकि ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी में आप प्रकृति के सबसे खूबसूरत नजारों को कैमरे में कैद कर सकें. यहां खाने के समान साथ ले जाए ताकि ट्रेकिंग के समय दिक्कत नहीं हो. साथ आरामदायक कपड़े और जुते का इस्तेमाल करें.
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ब्लू हिल्स का जादुई नज़ारा<br />ऊंचाई से सह्याद्री पर्वत श्रृंखला का दृश्य गहरे नीले और हरे रंगों की परतों में दिखाई देता है. शाम के सुनहरे समय में, गर्मियों की हल्की धुंध पहाड़ों पर एक ऐसा प्रभाव पैदा करती है जिसे ब्लू हिल इफेक्ट कहा जाता है. यह दृश्य तेलंगाना के सामान्य भूगोल से हटकर हिमालय या पश्चिमी घाट की याद दिलाता है. फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है.
केरामेरी केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, यह प्रतिरोध और आदिवासी गौरव का प्रतीक भी है. ये पहाड़ियाँ महान आदिवासी योद्धा कुमारम भीम की कर्मभूमि रही हैं, जिन्होंने जल, जंगल, ज़मीन का अमर नारा दिया था. जोडेघाट स्थित विश्व-स्तरीय संग्रहालय में आप गोंड और कोलम जनजातियों की संस्कृति और 1940 के आदिवासी विद्रोह के इतिहास को करीब से देख सकते हैं. यहाँ का भ्रमण आपकी यात्रा को एक सांस्कृतिक गहराई प्रदान करता है.
तारों भरा आकाश<br />प्रदूषण मुक्त वातावरण और ऊंचाई के कारण, केरामेरी का रात्रि आकाश अद्भुत होता है. यदि आप यहाँ रात बिताते हैं तो यहाँ की शांति में आपको आकाशगंगा नंगी आँखों से दिखाई दे सकती है. यह अनुभव भागदौड़ भरी जिंदगी और गर्मी से झुलसे शहर से कोसों दूर एक अलग ही सुकून देता है.
स्थानीय ज़ायका और सादगी<br />यात्रा का आनंद तब तक अधूरा है जब तक आप स्थानीय स्वाद न चखें. उत्नूर-आसिफाबाद मार्ग पर बने ढाबों पर देसी चिकन करी और ज्वार की रोटी का लुत्फ उठाना न भूलें. यहाँ का भोजन तेलंगाना और महाराष्ट्र के मसालों का एक अनूठा संगम है जो आपकी भूख को तृप्त करने के लिए काफी है.
First Published :
April 25, 2026, 19:30 IST



