PM मोदी ने की जैसलमेर के गोडावण संरक्षण की तारीफ! सम-रामदेवरा सेंटर से बढ़ी उम्मीद, 79 तक पहुंची संख्या

Last Updated:April 26, 2026, 15:17 IST
Great Indian Bustard Conservation : जैसलमेर में राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण को बड़ी सफलता मिल रही है. सम और रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटरों में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात में इस प्रयास की सराहना की है, जिसे वन विभाग और स्थानीय प्रशासन बड़ी उपलब्धि और संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत मान रहा है.
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Great Indian Bustard
जैसलमेर : जैसलमेर जिले में विलुप्तप्राय राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) के संरक्षण और प्रजनन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटरों में चल रहे संरक्षण कार्यों की प्रशंसा की. उन्होंने गोडावण की घटती संख्या के बीच हो रहे सफल प्रजनन प्रयासों को एक सकारात्मक संकेत बताया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद जगी है.
जैसलमेर का मरुस्थलीय क्षेत्र गोडावण का प्रमुख प्राकृतिक आवास माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इनके आवासीय क्षेत्र में कमी, बिजली लाइनों, शिकार और प्राकृतिक बदलावों के कारण इनकी संख्या तेजी से घट गई थी. ऐसे में वन विभाग द्वारा शुरू किए गए सम और रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर इस प्रजाति को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
जैसलमेर: गोडावण संरक्षण पर DFO का बयानडीएफओ बृजमोहन गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा इस प्रयास की सराहना करना पूरे वन विभाग के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि डीएनपी (डेजर्ट नेशनल पार्क) परिवार भविष्य में भी इसी तरह संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाता रहेगा. गुप्ता के अनुसार, दोनों ब्रीडिंग सेंटरों में गोडावण की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है. वर्तमान में सम ब्रीडिंग सेंटर में 24 गोडावण और रामदेवरा सेंटर में 55 गोडावण मौजूद हैं. इस प्रकार कुल संख्या बढ़कर 79 तक पहुंच चुकी है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.
सम-रामदेवरा सेंटर में बढ़ी गोडावण की संख्यायह वृद्धि इस बात का संकेत है कि वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे प्रजनन और संरक्षण प्रयास धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि गोडावण जैसे बड़े पक्षी का सफल प्रजनन बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसके लिए विशेष वातावरण, सुरक्षित आवास और नियंत्रित परिस्थितियों की आवश्यकता होती है. जैसलमेर के इन सेंटरों में यह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे इनके संरक्षण में मदद मिल रही है.
गोडावण संरक्षण बना सफलता की नई मिसाल, उम्मीदें बढ़ींपर्यावरण विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि इसी तरह निरंतर प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में गोडावण की संख्या में और सुधार देखने को मिल सकता है. इसके साथ ही जैसलमेर को वन्यजीव संरक्षण के एक मॉडल क्षेत्र के रूप में भी देखा जाने लगा है. कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की सराहना और लगातार बढ़ती गोडावण की संख्या यह साबित करती है कि सही दिशा में किए गए संरक्षण प्रयास न केवल सफल हो सकते हैं, बल्कि विलुप्तप्राय प्रजातियों को भी पुनर्जीवित करने की क्षमता रखते हैं.
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Location :
Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan
First Published :
April 26, 2026, 15:17 IST



