Rajasthan

भरतपुर की महिलाएं पत्तियों से बुन रहीं झाड़ू, सादगी में छिपा बड़ा हुनर

Last Updated:April 29, 2026, 14:10 IST

Traditional broom making : भरतपुर के गांवों में महिलाएं खजूर की पत्तियों से हाथों से झाड़ू बनाकर परंपरा और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं. बिना किसी खर्च के तैयार ये झाड़ू मजबूत, टिकाऊ और पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं. मेहनत और हुनर से बुने गए ये झाड़ू आज भी ग्रामीण जीवन की सादगी, स्वच्छता और पारंपरिक कला की खूबसूरत पहचान बने हुए हैं.

झाड़ू बनाने का सबसे महत्वपूर्ण और कठिन काम – महिलाएं इन पत्तियों को एक खास तरीके से बुनती हैं. जिसे स्थानीय भाषा में बांधना कहा जाता है. यह काम काफी मेहनत और धैर्य मांगता है. क्योंकि हर पत्ती को सही क्रम में लगाना पड़ता है. ताकि झाड़ू का आकार संतुलित और मजबूत रहे झाड़ू तैयार करने के बाद उसे पत्थर या किसी भारी वस्तु के नीचे दबाकर रखा जाता है.

भरतपुर के कई गांवों में खजूर के पेड़ों की भरमार है. इन्हीं पेड़ों से महिलाएं सावधानीपूर्वक पत्तियां तोड़ती हैं. खास बात यह है.कि झाड़ू बनाने के लिए केवल नरम और सही आकार की पत्तियों का चयन किया जाता है. ताकि झाड़ू मजबूत और टिकाऊ बन सके पत्तियां तोड़ने के बाद उन्हें एक-एक कर अलग किया जाता है. और फिर उनकी बारीक सफाई व कटाई की जाती है.

जिससे वह सही आकार ले सके और अच्छी तरह सूख जाए जब झाड़ू पूरी तरह तैयार हो जाती है. तब उसका उपयोग घर की साफ-सफाई में किया जाता है. हाथ से बने इन झाड़ुओं की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये बेहद मजबूत होते हैं. और लंबे समय तक चलते हैं साथ ही इन्हें इस्तेमाल करना भी आसान होता है और यह धूल-मिट्टी को अच्छी तरह साफ करते हैं.

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भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी परंपराएं जीवंत हैं और इन्हीं परंपराओं में शामिल है, खजूर की पत्तियों से हाथों से झाड़ू बनाने की कला. गांव की महिलाएं अपने अनुभव और हुनर से ऐसे झाड़ू तैयार करती हैं. जो न केवल घर की साफ-सफाई में उपयोगी होते हैं, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक और मजबूत भी होते हैं. यह काम वर्षों से चलता आ रहा है. और आज भी ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है.

आज भी भरतपुर के गांवों में महिलाएं अपने खाली समय में इस काम को करती हैं. यह न केवल उनकी पारंपरिक कला को जीवित रखता है. बल्कि आत्मनिर्भरता की एक मिसाल भी पेश करता है. खजूर की पत्तियों से बने ये झाड़ू ग्रामीण जीवन की सादगी मेहनत और सफाई की खूबसूरत झलक पेश करते हैं.

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इन झाड़ुओं को बनाने में किसी प्रकार का खर्च नहीं आता सभी सामग्री स्थानीय रूप से ही उपलब्ध हो जाती है. जिससे यह पूरी तरह सस्ता और सुलभ विकल्प बन जाता है. यही कारण हैं कि ग्रामीण इलाकों में लोग इन्हें बाजार से खरीदे गए झाड़ुओं की बजाय ज्यादा पसंद करते हैं.

First Published :

April 29, 2026, 14:10 IST

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