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शिवरंजनी राग पर बना वो कालजयी गाना, किशोर कुमार गा पाए 30 दिन में! आज भी गाती है पूरी दुनिया, नहीं कम हुआ क्रेज

Last Updated:June 16, 2026, 21:55 IST

Rajesh Khanna Kishore Kumar Hit Songs : बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर किशोर कुमार ने क्लासिकल सिंगिंग की ट्रेनिंग नहीं ली थी. वो सरगम गाने से हमेशा परहेज करते थे. किशोर दा अपने कई इंटरव्यू में इस बात को दोहरा चुके थे कि उन्हें ‘सा रे गा मा’ नहीं आता. एक बार तो उन्होंने पूरे 30 दिन गाने की रियाज की थी. इतना ही नहीं, उन्होंने आरडी बर्मन से साफ कहा था कि वो इस गाने को नहीं गाएंगे. पहले गाना लता मंगेशकर से रिकॉर्ड करवा लीजिए. किशोर दा ने लता मंगेशकर का गाना सुना. पूरे 30 दिन रियाज किया और फिर ऐसा कालजयी गाना रिकॉर्ड किया, जो अमर हो गया. जब फिल्म रिलीज हुई तो सुपर स्टार राजेश खन्ना खूब रोए थे.

किशोर कुमार और राजेश खन्ना के स्टारडम का दौर 1969 से साथ-साथ ही शुरू हुआ था. राजेश खन्ना ने हर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर से कह रखा था कि किशोर कुमार ही उनके लिए प्लेबैक सिंगिंग करेंगे. आरडी बर्मन से उनकी अच्छी दोस्ती थी. एक बार आरडी बर्मन ने ऐसी धुन बनाई जिसे सुनते ही किशोर कुमार ने हाथ ख‌ड़े कर दिए. उन्होंने साफ कहा कि पहले इस गाने को लता मंगेशकर से रिकॉर्ड करवाइये. पंचम दा ने लता मंगेशकर से गाना रिकॉर्ड करवाया. फिर किशोर दा ने इस गाने को सुना. पूरे एक माह तक रियाज किया. फिर अपनी बुलंद आवाज में ऐसा दर्दभरा कालजयी गाना रिकॉर्ड किया, जिसने इतिहास रच दिया. यह गाना था : मेरे नैना सावन भादों….. गाना राजेश खन्ना पर फिल्माया गया था. फिल्म का नाम ‘महबूबा’ था.

‘महबूबा’ फिल्म 19 जुलाई 1976 को रिलीज हुई थी. डायरेक्शन शक्ति सामंत ने किया था. वही शक्ति सामंत जिन्होंने राजेश खन्ना के साथ ‘आराधना’, ‘अमरप्रेम’, ‘कटी पतंग’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाईं. फिल्म की कहानी गुलशन नंदा ने लिखी थी. प्रोड्यूसर मुशीर रियाज थे.

साल 1975 बॉलीवुड के लिए निर्णायक साल साबित हुआ. इसी साल आई ‘दीवार’ और ‘शोले’ फिल्म ने अमिताभ बच्चन को स्टारडम के शिखर पर बैठा दिया. राजेश खन्ना के सितारे धुंधले पड़ने लगे थे. उन्हें एक हिट फिल्म की सख्त जरूरत थी. राजेश खन्ना का मानना था कि एक्शन फिल्मों का दौर जल्द खत्म होगा और रोमांटिक फिल्में फिर से अच्छा बिजनेस करेंगी.

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महबूब एक रोमांटिक फिल्म थी और पुनर्जन्म की कहानी पर बेस्ड थी. राजेश खन्ना के स्टारडम का दारोमदार इसी फिल्म पर टिका था.<br />फिल्म गुलशन नंदा के उपन्यास ‘सिसकते साज’ पर बेस्ड थी. नंदा ने ही फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा था. कहा जाता है कि यह नॉवेल पुराने संगीतकार खेमचंद्र की लाइफ पर बेस्ड था. महबूबा के डायलॉग अख्तर रोमानी ने लिखे थे. फिल्म को बेस्ट बनाने के लिए पूरे प्रयास किए गए. आरडी बर्मन ने अपने करियर का शानदार म्यूजिक कंपोज किया. आनंद बख्शी ने सुपरहिट गाने लिखे.

‘महबूबा’ फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. फिल्म के दो गाने ‘मेरे नैना सावन भादों’ और ‘परबत के पीछे चंबे दा गांव’ आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं. ‘मेरे नैना सावन भादों’ गाने के दो वर्जन थे. गाना शिवरंजनी राग पर आधारित है. एक बार गाना लता मंगेशकर की आवाज में तो दूसरी बार किशोर कुमार की आवाज में सुनाई देता है.

‘मेरे नैना सावन भादों’ गाने से जु‌ड़ा दिलचस्प किस्सा आरडी बर्मन ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में सुनाया था. उन्होंने बताया था कि इस गाने की धुन सुनते ही किशोर कुमार ने कहा था कि गाना बहुत मुश्किल है. आरडी बर्मन ने बताया था, ‘मेरे नैना सावन भादों’ गाने की रिहर्सल के दौरान किशोर कुमार मौजूद थे. वो बोले कि इस गाने को लता भी गाने वाली हैं. पहले उनसे गवाओ, फिर मैं गाऊंगा. ये गाना बहुत मुश्किल है. पहले मैं लता का गाना सुनूंगा. उसका पोस्टमार्टम करूंगा, उसे खा जाऊंगा, फिर गाऊंगा. लता मंगेशकर से गाना रिकॉर्ड करवाया गया. फिर उन्होंने जो गाना गाया, इतिहास रच दिया.’

गीतकार आनंद बख्शी गाकर अपने गाने लिखते थे. उनकी धुनों पर कई संगीतकारों ने गाने भी बनाए हैं. इस फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘परबत के पीछे चंबे दा गांव’ की धुन आनंद बख्शी ने ही बनाई थी. गाने एक पंजाबी फॉक सॉन्ग से इंस्पायर्ड था. सुरिंदर और और प्रकाश कौर के गाए टप्पे पर यह गान बेस्ड है. वो गाना था : ‘साडे ते वेडे विच’. गाना आज भी रेडियो-टीवी पर सुनाई दे जाता है.

फिल्म की दो-दो पुनर्जन्म की कहानियां थीं, इससे दर्शक उब गए. फिल्म के सुपरहिट म्यूजिक ने दर्शकों को बांधने की कोशिश की लेकिन नाकाफी रही. फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी. इस फिल्म के फ्लॉप होने के साथ ही राजेश खन्ना का स्टारडम खत्म सा हो गया. राजेश खन्ना ने अपना पूरा दमखम लगाया कि फिल्म समीक्षक मूवी को अच्छा बताएं लेकिन बात नहीं बनी. 1.25 करोड़ के बजट में बनी ‘महबूबा’ फिल्म ने डेढ़ करोड़ का कलेक्शन किया था. फिल्म एवरेज रही. इसी फिल्म की असफलता के साथ ही राजेश खन्ना का चार्म जाता रहा. वो असफलता से इतने दुखी हुए कि रात में अपनी छत पर बैठकर रोते थे.

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