Rajasthan

Hi-Tech Kitchen at Apna Ghar Ashram

Last Updated:May 02, 2026, 10:33 IST

Bharatpur: भरतपुर के अपना घर आश्रम में 9 करोड़ की लागत से एक हाईटेक रसोई तैयार की गई है, जो 31 हजार वर्ग फीट में फैली है. इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि महज 2 घंटे में 25 हजार लोगों का भोजन तैयार किया जा सकता है. आश्रम के 6000 प्रभुजनों के लिए यहाँ दिन में चार बार मशीनों के जरिए भोजन बनाया जाता है. सुरक्षा के लिए रसोई को फायर और नॉन-फायर जोन में बांटा गया है, जहाँ 200 कारीगर एक साथ काम कर सकते हैं. यह रसोई तकनीक और सेवा भाव का देश में एक अनूठा उदाहरण बन गई है.

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Bharatpur News: राजस्थान का भरतपुर जिला आज अपनी एक नई पहचान ‘अपना घर आश्रम’ के जरिए बना चुका है. बेसहारा और जरूरतमंदों (जिन्हें यहाँ ‘प्रभुजी’ कहा जाता है) की सेवा के लिए समर्पित इस आश्रम ने अब भोजन प्रबंधन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यहाँ करीब 9 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक हाईटेक रसोई का निर्माण किया गया है. यह रसोई केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं है, बल्कि आधुनिक मशीनों और स्वचालित तकनीकों का एक ऐसा केंद्र है, जहाँ स्वच्छता और गति का विशेष ध्यान रखा जाता है. लगभग 31 हजार वर्ग फीट में फैली यह विशाल रसोई किसी बड़े इंडस्ट्रियल किचन को भी मात देती है.

इस हाईटेक रसोई की सबसे बड़ी खासियत इसकी कार्यक्षमता है. यहाँ लगी अत्याधुनिक मशीनों की मदद से महज 2 घंटे के भीतर 20 से 25 हजार लोगों का भोजन तैयार किया जा सकता है. आश्रम में वर्तमान में 6000 से अधिक प्रभुजन निवास कर रहे हैं, जिनके लिए दिन में चार बार ताज़ा भोजन बनाया जाता है. मशीनीकृत व्यवस्था होने के कारण भोजन बनाने की प्रक्रिया में मानवीय स्पर्श (बिना हाथ लगाए) न्यूनतम रखा गया है, जिससे शुद्धता और गुणवत्ता बनी रहती है. पूरे दिन के भोजन चक्र को पूरा करने में लगभग 8 घंटे का समय लगता है, जो इतनी बड़ी संख्या के लिहाज से बेहद कम है.

सुरक्षा के लिए फायर और नॉन-फायर जोन का विभाजनरसोई के प्रबंधन को वैज्ञानिक तरीके से दो हिस्सों में बांटा गया है. पहला ‘फायर जोन’ है, जहाँ पकाने का कार्य जैसे गैस और आग का उपयोग होता है. दूसरा ‘नॉन-फायर जोन’ है, जहाँ सब्जियों की कटिंग, सफाई और पैकिंग जैसे कार्य किए जाते हैं. इस विभाजन से न केवल काम की गति बढ़ती है, बल्कि सुरक्षा के मानकों का भी कड़ाई से पालन होता है. इस रसोई में एक साथ 100 से 200 कारीगरों के काम करने की क्षमता है, जो इसे किसी भी बड़े आयोजन को संभालने में सक्षम बनाती है.

संस्थापक का विजन और सेवा का मिशनअपना घर आश्रम के संस्थापक डॉ. बी.एन. भारद्वाज के अनुसार, इस रसोई को विकसित करने का मुख्य उद्देश्य प्रभुजनों को समय पर और गरिमापूर्ण तरीके से भोजन उपलब्ध कराना है. तकनीक का सही उपयोग करके इसे देश की सबसे उन्नत रसोइयों की श्रेणी में खड़ा किया गया है. यह रसोई यह संदेश देती है कि अगर सेवा का संकल्प दृढ़ हो, तो तकनीक उसे और भी प्रभावशाली बना सकती है. भरतपुर का यह आश्रम आज पूरे देश के लिए मानवता और आधुनिक प्रबंधन की एक मिसाल है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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