इंग्लैंड में बनी 70 साल पुरानी टॉर्च, आज भी 500 मीटर तक देती है तेज रोशनी

Last Updated:May 02, 2026, 14:13 IST
70 Year Old Torch : बीकानेर में एक अनोखी धरोहर लोगों का ध्यान खींच रही है. इंग्लैंड में बनी करीब 70 साल पुरानी टॉर्च आज भी पूरी ताकत के साथ काम कर रही है. संग्रहकर्ता किशन सोनी के पास सुरक्षित यह टॉर्च पुराने दौर की मजबूत तकनीक की मिसाल है. इसकी रोशनी 500 मीटर तक पहुंचती है, जो आज के आधुनिक उपकरणों को भी चुनौती देती नजर आती है.
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बीकानेर : तकनीक भले ही हर दिन बदल रही हो, लेकिन कुछ चीजें समय की कसौटी पर इतनी मजबूत साबित होती हैं कि सालों बाद भी उनका जलवा बरकरार रहता है. ऐसी ही एक अनोखी धरोहर बीकानेर में देखने को मिल रही है. इंग्लैंड में बनी करीब 70 साल पुरानी टॉर्च, जो आज भी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है. इस टॉर्च को शहर के संग्रहकर्ता किशन सोनी ने अपने पास सुरक्षित रखा हुआ है.
यह टॉर्च केवल एक साधारण उपकरण नहीं, बल्कि बीते समय की इंजीनियरिंग और मजबूती का प्रतीक है. इंग्लैंड में बनी यह अनोखी टॉर्च आज भी यह साबित कर रही है कि गुणवत्ता और टिकाऊपन के मामले में पुरानी चीजें किसी से कम नहीं थीं. किशन सोनी ने बताया कि यह टॉर्च वर्ष 1950 के आसपास इंग्लैंड में बनाई गई थी और उस दौर की बेहतरीन तकनीक का नमूना है. आज के आधुनिक दौर में जहां इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल्दी खराब हो जाते हैं, वहीं यह टॉर्च दशकों बाद भी मजबूती के साथ काम कर रही है.
5 इंच की टॉर्च, 500 मीटर तक रोशनीटॉर्च की बनावट इसे और भी खास बनाती है. यह लगभग पांच इंच की है और एक छोटे डिब्बे के आकार में तैयार की गई है. इसके आगे एक गोल आकृति का मोटा ग्लास लगा हुआ है, जो रोशनी को एक दिशा में केंद्रित करने के साथ-साथ उसे दूर तक फैलाने में मदद करता है. यही कारण है कि इसकी रोशनी काफी शक्तिशाली नजर आती है. इस टॉर्च में सामान्य बैटरी के बजाय बड़े आकार के सेल लगाए जाते हैं, जो घड़ी के सेल से भी बड़े होते हैं. इसे चलाने के लिए एक साथ दो सेल की जरूरत पड़ती है. उस समय यह तकनीक काफी उन्नत मानी जाती थी, जो इस टॉर्च की कार्यक्षमता को और बढ़ाती है.
पुराने दौर की टॉर्च, आज भी दमदार रोशनीसबसे खास बात इसकी रोशनी है. किशन सोनी ने बताया कि इस टॉर्च की रोशनी लगभग 500 मीटर तक साफ दिखाई देती है. इतनी लंबी दूरी तक प्रकाश पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, खासकर उस दौर के हिसाब से जब तकनीक इतनी विकसित नहीं थी. किशन सोनी बताते हैं कि उन्हें पुरानी और ऐतिहासिक वस्तुओं को संग्रहित करने का शौक है, और यह टॉर्च उनके संग्रह की सबसे अनमोल धरोहरों में से एक है. वे इसे बड़ी सावधानी से संभालकर रखते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियां भी पुराने समय की तकनीक और उसकी गुणवत्ता को समझ सकें.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
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