Rajasthan

रेगिस्तान का जीवन संकट में! खेजड़ी के सूखने और सांगरी की कमी ने गांवों की कमर तोड़ी, देखें तस्वीरें

Last Updated:May 04, 2026, 07:41 IST

Khejri Tree Crisis: रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीवन का आधार मानी जाने वाली खेजड़ी के पेड़ आज मौसम की मार से प्रभावित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर सांगरी उत्पादन पर पड़ा है. सांगरी, जो न सिर्फ स्थानीय भोजन का अहम हिस्सा है बल्कि ग्रामीणों की आय का बड़ा स्रोत भी है, उसकी कमी ने गांवों की अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है. अनियमित बारिश, बढ़ती गर्मी और बदलते जलवायु पैटर्न के कारण खेजड़ी के पेड़ों की सेहत बिगड़ रही है, जिससे उत्पादन घटता जा रहा है. इसके चलते ग्रामीणों के रोजगार के अवसर कम हुए हैं और पारंपरिक खान-पान व सांस्कृतिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं.

ख़बरें फटाफट

जोधपुर: मरुधरा में गर्मी का मौसम आते ही जहां खेजड़ी के पेड़ों पर लदी सांगरी गांवों की पहचान बन जाती थी, वहीं इस बार हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं. धुंधाड़ा कस्बे सहित पश्चिमी राजस्थान के कई गांवों में सांगरी की पैदावार में आई गिरावट ने न केवल किसानों बल्कि मजदूर वर्ग की चिंता भी बढ़ा दी है.

मौसम की मार के चलते पेड़ों पर इस बार कम सांगरी लगी है, जिससे गांवों की रौनक और आमदनी दोनों पर असर पड़ा है.

ग्रामीणों के लिए मौसमी रोजगार का बड़ा जरिया भीसांगरी केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीणों के लिए मौसमी रोजगार का बड़ा जरिया भी है. इसकी तुड़ाई से लेकर सफाई और बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में महिलाएं और मजदूर वर्ग जुड़ा रहता है. लेकिन इस बार कम उत्पादन के कारण काम के अवसर काफी घट गए हैं. कई परिवार, जो हर साल इसी सीजन में अतिरिक्त आय अर्जित करते थे, अब आर्थिक दबाव महसूस कर रहे हैं. गांवों में पहले जहां सांगरी तोड़ने और सुखाने की गतिविधियां हर घर के आंगन में दिखती थीं, अब वहां सन्नाटा पसरा हुआ है.

बाजार में बढ़े दाम, परंपराओं पर भी पड़ा असरकम आवक का असर बाजार में साफ दिखाई दे रहा है. सूखी सांगरी के दाम 900 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि कच्ची सांगरी भी 300 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रही है. व्यापारियों का कहना है कि मांग के मुकाबले आपूर्ति काफी कम है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं. वहीं ग्रामीण इसे केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चिंता के रूप में भी देख रहे हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार खेजड़ी पर भरपूर सांगरी लगना समृद्धि का संकेत माना जाता है, ऐसे में इस बार कम पैदावार ने लोगों के मन में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Jodhpur,Rajasthan

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj