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गेहूं की कटाई के बाद खाली है खेत, ढैंचा की करें बुवाई, हरी खाद से मिट्टी होगी उपजाऊ, किसानों को डबल मुनाफा

Last Updated:May 05, 2026, 09:51 IST

ढैंचा एक दलहनी फसल है. प्रति हेक्टेयर लगभग 25 किलो बीज की आवश्यकता होती है. यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग और गर्मी के मौसम में खेतों की जुताई न करने से मिट्टी के लिए फायदेमंद केंचुए और सूक्ष्म जीव कम हो रहे हैं. इससे जमीन की ताकत घट रही है और खेती की लागत बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि हरी खाद मिट्टी को बेहतर बनाने का आसान और सस्ता तरीका है. इसके लिए किसान ढैंचा की फसलें बो सकते हैं.

लखीमपुर खीरी: गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली हो गए हैं, ऐसे में कुछ किसान खेतों को 2 महीने के लिए खाली छोड़ देते हैं. वहीं कुछ किसान खेतों में ढैचा की बुवाई कर देते हैं ढैचा की खेती करने के लिए कृषि विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर ढैचा के बीज भी किसानों को अनुदान पर कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं. जिससे किसान आसानी से बीज ले सकें . ढैचा एक प्रमुख हरी खाद है जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने नाइट्रोजन को स्थिर करने और मिट्टी को पोषित करने के लिए बहुत ही उपयोगी होता है.

खेत में लगाए हरी खाद

यह एक दलहनी फसल है. प्रति हेक्टेयर लगभग 25 किलो बीज की आवश्यकता होती है. यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग और गर्मी के मौसम में खेतों की जुताई न करने से मिट्टी के लिए फायदेमंद केंचुए और सूक्ष्म जीव कम हो रहे हैं. इससे जमीन की ताकत घट रही है और खेती की लागत बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि हरी खाद मिट्टी को बेहतर बनाने का आसान और सस्ता तरीका है. इसके लिए किसान ढैंचा की फसलें बो सकते हैं. इस फसल को 30 से 40 दिन की बढ़वार के बाद खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है. यही प्रक्रिया हरी खाद कहलाती है. जिससे किसानों को फसलों में रासायनिक उर्वरकों से राहत मिल सकती है.

किसानो को मिलेगा दोहरा लाभ

जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि खीरी जनपद में लगातार किसानों को ढैचा की खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है. ढैचा की खेती करने से किसानों को डबल मुनाफा होता है. जून और जुलाई के महीने में धान की रोपाई शुरू हो जाती है इस दौरान खेतों में उर्वरक से किसानों को राहत मिल सकती है ढैचा एक हरी खाद है जिससे किसान आसानी से तैयार कर सकते हैं।ढैचा का पौधा फलीदार होता है.जो हमारे खेतों की मिट्टी में नाइट्रोजन को स्थिर करता है. जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और अगली फसल की पैदावार में वृद्धि होती है. ढैंचा की हरी खाद मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाती है और जल धारण क्षमता में वृद्धि करती है. यही वजह है कि खेत में लगाने पर किसान को उसकी फसल की डबल पैदावार मिलती है.

ढैंचा का सदियों से हो रहा प्रयोग

ढैंचा को हरी खाद के रूप में सदियों से प्रयोग किया जा रहा है. ढैंचा फसल की जड़ें मिट्टी के जीवाणुओं के साथ काम करती है और वातावरण से नाइट्रोजन को ट्रैप करके जमीन में जमा करती है.मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की क्षमता और क्रियाशीलता को बढ़ाती है. मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बढ़ती है. हरी खाद डालने से खेतों में कार्बनिक नाइट्रोजन के स्तर में सुधार होता हैखेतों में खरपतवारों की वृद्धि कम हो जाती है और मिट्टी जनित रोगों से भी बचाव होता है.

About the AuthorRajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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