Agriculture Success | खेती का मल्टी स्टोरी फॉर्मूला, खारी जमीन पर खेती | खेती में मुनाफे की ट्रिक

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खेती का मल्टी स्टोरी फॉर्मूला; भीषण गर्मी में भी लहलहाएगी फसल; मुनाफे की ट्रिक
Last Updated:May 05, 2026, 12:28 IST
Agriculture Tricks: वैसे तो हमने तरह-तरह की खेती के बारे में जानकारियां प्राप्त की होंगी. लेकिन ये ट्रिक सबसे अनोखी है. जैसे मकान कई फ्लोर के होते हैं. हर फ्लोर को हम अलग-अलग काम के लिए बांट सकते हैं वैसे ही फसलों में भी ये ट्रिक काम आ सकती है. पाली काजरी ने खारे पानी और गर्मी में खेती के लिए मल्टी स्टोरी क्रॉप मॉडल विकसित किया. बेर, ड्रैगन फ्रूट, सहजन, पपीता से जोखिम घटा है. घास से ड्रैगन फ्रूट को गर्मी से बचाव मिल रहा है और साथ ही जबरदस्त पैदावार की उम्मीद.
पाली. राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में खेती करना हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण रहा है, जहाँ एक ओर आसमान से बरसती आग (भीषण गर्मी) है, तो दूसरी ओर जमीन के नीचे का खारा पानी. लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बीच काजरी कृषि विज्ञान केंद्र पाली ने किसानों की तकदीर बदलने के लिए एक ‘मल्टी स्टोरी क्रॉप हार्वेस्टिंग मॉडल’ तैयार किया है.
इस मॉडल की खासियत यह है कि इसमें एक ही जमीन पर एक साथ कई फसलों का उत्पादन लिया जा रहा है. पाली जिले के कई क्षेत्रों में सिंचाई का पानी खारा है, जिससे पारंपरिक खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है. काजरी के वैज्ञानिकों ने पाया कि इस खारे पानी में पपीता जैसी संवेदनशील फसलें सर्वाइव नहीं कर पा रही हैं. पपीते के पौधे खारेपन के कारण दम तोड़ रहे हैं, लेकिन इसी खारे पानी और पथरीली जमीन पर ड्रैगन फ्रूट ने उम्मीद की नई किरण जगाई है.
मल्टी स्टोरी मॉडल: एक साथ तीन फसलेंवैज्ञानिकों ने यहाँ एक खास ‘थ्री-क्राफ्ट’ मॉडल विकसित किया है. इसमें बेर, ड्रैगन फ्रूट, सहजन (सहेजना) और पपीता जैसी फसलों को मिलाकर लगाया गया है.
मकसद: अगर किसी मौसम में एक फसल खराब भी हो जाए, तो दूसरी फसल किसान को अच्छा मुनाफा दे सके. यानी नुकसान की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है.
भीषण गर्मी से बचाव का ‘नेचुरल कवर’पाली में मई और जून के महीने में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुँच जाता है. इतनी गर्मी में ड्रैगन फ्रूट के पौधे जलने का खतरा रहता है. इससे निपटने के लिए काजरी ने एक अद्भुत तकनीक अपनाई है. जिसमें ड्रैगन फ्रूट के खंभों के दोनों तरफ घास (हज) लगाई गई है. यह घास एक ‘नेचुरल प्रोटेक्शन’ का काम करती है, जो गर्म हवाओं (लू) को रोकती है और पौधों को जलने से बचाती है.
प्रॉपर मैनेजमेंट से संभव है मुनाफ़ाकाजरी के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पाली की खारी जमीन में ‘प्रॉपर मैनेजमेंट किया जाए, तो यहाँ भी बेहतरीन पैदावार ली जा सकती है. एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय जब किसान मल्टी स्टोरी मॉडल अपनाता है, तो बाजार के उतार-चढ़ाव और मौसम की बेरुखी का असर कम हो जाता है.
45 डिग्री तापमान में भी लगेगा ड्रैगन फ्रूट पाली काजरी प्रमुख डॉ. अनिल कुमार शुक्ला ने कहा कि मल्टी स्टोरी क्रॉप हार्वेस्टिंग मॉडल इसमें मुख्य क्राफ्ट बैर है जिसके साथ हमने तीन क्राफ्ट और इसमें शामिल किया जिसमें सेहजना,पपीता और ड्रैगन फ्रूट शामिल है. यहां का पानी खारा है और खारे पानी की सिंचाई करते करते हमारी जमीन प्रभावित हो रही है. जिसके चलते हमारा पपीता नही चल पा रहा. ड्रैगन फ्रूट बहुत अच्छे से चल रहा है. पाली के मौसम के अनुसार खारा पानी हो तो प्रोपर मैनेजमेंट करे तो क्योकि पाली में मई और जून में सबसे ज्यादा गर्मी होती है और इसको चारो तरफ से प्रोटेक्शन न हो तो ड्रैगन फ्रूट में बर्निंग इफेक्ट आ जाता है. यहां हमने दोनो तरफ से घास लगा रखी है जो ओपन में होने के बावजूद भी प्रोटेक्शन मिलने से अच्छा ग्रोथ कर रहा है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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