न किला, न महल—फिर भी रॉयल फील! जयपुर की इस हवेली में हवामहल-शीशमहल जैसी कारीगरी देख हो जाएंगे हैरान

Last Updated:May 05, 2026, 11:30 IST
Jaipur 250 Year Old Haveli: जयपुर में एक ऐसी 250 साल पुरानी हवेली मौजूद है, जहां आज भी लोग शान-ओ-शौकत के साथ रहते हैं. इस ऐतिहासिक हवेली की वास्तुकला बेहद खास है, जिसमें हवा महल और शीश महल जैसी अद्भुत कारीगरी देखने को मिलती है. हवेली के अंदर बने झरोखे, गढ़दार मिलें और शीशों से सजे कमरे इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. यह न सिर्फ एक रिहायशी स्थान है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और वास्तुकला विरासत का जीवंत उदाहरण भी है. यहां रहने वाले लोग आज भी पारंपरिक तरीकों से जीवन जीते हैं, जिससे यह हवेली इतिहास और आधुनिकता का अनोखा संगम बन गई है. यह जगह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
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जयपुर: जयपुर अपने ऐतिहासिक किलों महलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं लेकिन जयपुर की वर्षों पुरानी हवेलियां भी जयपुर की खास विरासत हैं. जो आज भी अपने बेजोड़ स्थापत्य के साथ खड़ी हैं जिनमें आज भी बेहतरीन कारीगरी का नमूना दिखाई देता हैं. जयपुर के चारदिवारी बाजार में आज भी 300 वर्षों पुरानी हवेलियां हैं जहां लोग बड़ी शान-ओ-शौकत के साथ रहते हैं. ऐसे ही चारदीवारी बाजार में सौंखियों के रास्ते में स्थित दुसाद भवन हवेली जो आज भी अपने बेहतरीन स्थापत्य के साथ खड़ी हैं. लोकल-18 ने इस खास हवेली पर पहुंच कर हवेली में अपने परिवार के साथ रहने वाले विपिन नाटानी से बात की तो वह बताते हैं दुसाद भवन हवेली उनके पूर्वजों की विरासत हैं जिसे उन्हें आज भी संजोकर रखा हैं. विपिन का कहना हैं की यह हवेली लगभग 250 साल पुरानी हैं.
जो उनके दादी दीवान भंवर लाला के समय की हैं उनके नाना-नानी से उन्हें यह हवेली विरासत में मिली और तभी से उनका परिवार यहां रहते आ रहा हैं. वर्षों पहले उनके पूर्वज राजा महाराजाओं के दीवान हुआ करते हैं इसलिए राजा महाराजाओं द्वारा उन्हें यह हवेली दी गई थी. विपिन बताते हैं कि हवेली की आर्किटेक्चर वर्षों पुराना हैं जिसमें 3 मंजिला हवेली में बने 12 कम बने हैं जो एक दुसरे से जुड़े हुए हैं पुराने समय के हिसाब से ही हवेली में खिड़कियां दरवाजे और झरोखों की झलक देखी जा सकती हैं, जो आज भी बेजोड़ स्थापत्य की कहानी बयां करती हैं. हवेली में हवामहल, शीश महल की तरह अनूठे कारीगरी का संगम दिखाई देता हैं.
हवेली के हर कौने में दिखाई देती हैं वर्षों पुराने इतिहास की झलक दुसाद भवन हवेली सड़की पास स्थित अंदर गली में बनी हैं इसके बावजूद इसका आर्किटेक्चर दूर से ही नजर आता हैं. हवेली की अंदर पुराने समय के कमरों में बेहतरीन कारीगरी की झलक दिखाई देती हैं, साथ ही हवेली में आज भी वर्षों पुरानी दुर्लभ उपयोगी चीजें रखी हैं. हवेली की बनावट अंदर से इस प्रकार हैं की हर कमरे में आने-जाने के दरवाज़े गोल आकार में बने हैं। जो पुराने दौर की लाइफस्टाइल और कलात्मक कारीगरी की मिसाल पेश करते हैं. हवेली में कमरों के अलावा विशाल चौक रसोई और डायनिंग हॉल जैसे अलग-अलग हिस्से आज भी वर्षों पुरानी परंपरा को दिखाते हैं, हवेली में बना हवामहल इस हवेली का बड़ा आकर्षण है. यहां का बरामदा छोटी खिड़कियों और जालीदार दीवारों से बना है, जो गर्मियों में ठंडक देता था। उस समय मेहमान यहां गद्दों पर बैठकर ठंडी हवा का मजा लेते थे. बीच में बना फाउंटेन इसकी खूबसूरती बढ़ाता है, जबकि एक तरफ गंगा मैया और मीरा की सोने के वर्क से पेंटिंग बनी हुई हैं. हवेली जितनी बाहर से सुंदर दिखाई देती हैं उतनी ही अंदर से ओर भी सुंदर हैं.
हवेली में बना हैं चमकता हुआ शीश महल वैसे तो दुसाद भवन हवेली के हर हिस्से में इतिहास की झलक दिखाई देती हैं, लेकिन खासतौर पर हवेली में बना शीशमहल जो हवेली का सबसे सुंदर हिस्सा हैं. हवेली में पहली मंजिल पर बना शीश महल जयपुर की पारंपरिक कांच कारीगरी का शानदार उदाहरण है. जहां शीशमहल के अंदर दीवारों पर आराइश का काम और शीशों की जड़ाई इसे खास बनाती है. हवेली में बने शीशमहल की दिवारों पर बनी पेंटिंग से लेकर खिड़कियों और झरोखों में लगे काच आज भी चमचमाते हुए दिखाई देती हैं. शीशमहल में पुराने लैंप, पलंग, संदूक और पुराने हथियार आज भी सुरक्षित रखे हैं, जो विरासत को दिखाते हैं. शीशमहल महल की छत से लेकर फ़र्स तक बेहतरीन कारीगरी का नमूना पेश करती हैं. हवेली में बने शीशमहल की चमक दमक से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता हैं की उस समय लोग कितनी शान-ओ-शौकत से रहा करते थे.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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