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ये है राजस्थान का नया ‘फुटबॉल हब’… छोटे गांव की बड़ी उड़ान, अजमेर की बेटियां रच रही इतिहास!

Last Updated:May 07, 2026, 18:58 IST

Ajmer Girls Playing Football: अजमेर जिले के नसीराबाद क्षेत्र के दिलवाड़ा गांव में 100 से भी अधिक लड़कियां फुटबॉल खेल रही हैं और अपने सपनों को नई उड़ान दे रही हैं. इस बदलाव के पीछे गांव के ही कुछ ऐसे लोग हैं जिनके अपने खेल के सपने अधूरे रह गए थे और अब वह सपना  गांव की बेटियों के माध्यम से साकार होते देखना चाहते हैं. कोच जयंत और ग्रामीणों की मदद से झाड़ियों वाला मैदान अब राज्य व नेशनल स्तर की तैयारी का केंद्र बना है.

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अजमेर. अजमेर जिले से करीब 22 किलोमीटर दूर नसीराबाद क्षेत्र का दिलवाड़ा गांव अब एक नई पहचान बना रहा है. कभी साधारण सा नजर आने वाला यह गांव आज बेटियों के फुटबॉल जुनून के कारण चर्चा में है. यहां 100 से अधिक लड़कियां फुटबॉल खेल रही हैं और अपने सपनों को नई उड़ान देने में जुटी हैं.

हर रोज शाम के पांच बजते ही गांव का मैदान उत्साह और ऊर्जा से भर उठता है. गांव की लड़कियां फुटबॉल लेकर मैदान में पहुंचती हैं और घंटों तक कड़ी मेहनत के साथ अभ्यास करती हैं. खास बात यह है कि जिस मैदान में आज ये बेटियां खेल रही हैं, वहां कभी कंटीली झाड़ियां और पत्थरों से भरी जमीन हुआ करती थी. खेल के प्रति लड़कियों के जुनून और गांव वालों के सहयोग ने इस जगह को एक बेहतर खेल मैदान में बदल दिया.

अधूरे सपनों ने बदली गांव की तस्वीरइस बदलाव के पीछे गांव के कुछ ऐसे लोग हैं, जिनके अपने खेल के सपने अधूरे रह गए थे. दिलवाड़ा गांव के निवासी राकेश प्रजापत बताते हैं कि उनका सपना फुटबॉलर बनने का था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के कारण वह इसे पूरा नहीं कर सके. अब वही सपना वह गांव की बेटियों के माध्यम से पूरा होते देखना चाहते हैं.

उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि जहां पहले मुश्किल से 5 लड़कियां मैदान में आती थीं, वहीं अब 100 से ज्यादा लड़कियां नियमित रूप से फुटबॉल की प्रैक्टिस कर रही हैं. गांव के लोगों का कहना है कि बेटियों के खेल के प्रति बढ़ते उत्साह ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया है.

कोच की मेहनत से चमक रहे खिलाड़ीगांव के कोच जयंत भी इन बेटियों के सपनों को संवारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. जयंत बताते हैं कि वह फल-फ्रूट की दुकान पर काम करते हैं और काम से फ्री होने के बाद रोजाना 2 से 3 घंटे बच्चों को फुटबॉल की प्रैक्टिस कराते हैं. उन्होंने बताया कि जिस मैदान में आज बच्चियां अभ्यास करती हैं, उसे भी बच्चों ने मिलकर तैयार किया है.

पहले यहां कंटीली झाड़ियां और बड़े पत्थर हुआ करते थे, लेकिन अब यह मैदान इतना बेहतर बन चुका है कि यहां बड़े टूर्नामेंट भी आयोजित किए जा सकते हैं. जयंत का कहना है कि बच्चों की मेहनत का ही नतीजा है कि इनमें से कई खिलाड़ी राज्य स्तर तक पहुंच चुके हैं.

नेशनल खेलने का सपना देख रहीं बेटियांगांव के मैदान में अभ्यास करने वाली खिलाड़ी कृष्णा जाट इस बदलाव की बड़ी मिसाल बन चुकी हैं. वह पिछले तीन साल से लगातार अभ्यास कर रही हैं और अपनी मेहनत के दम पर तीन बार राज्य स्तर और दो बार राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं. कृष्णा बताती हैं कि उनके परिवार का उन्हें पूरा सहयोग मिलता है, जिससे उनका हौसला और मजबूत होता है.

वहीं खिलाड़ी सोनम चौधरी ने बताया कि वह रोजाना शाम को दिलवाड़ा गांव के मैदान में फुटबॉल की प्रैक्टिस करती हैं. उन्हें कोच की तरफ से निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है. सोनम का कहना है कि उनका सपना नेशनल लेवल पर खेलकर गांव और जिले का नाम रोशन करने का है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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