Daadi Ki Shaadi Movie Review: काम आ गया कपिल शर्मा का ‘बागबान’ फॉर्मूला

नई दिल्ली. कपिल शर्मा ने आखिरकार साबित कर दिया है कि वह सिर्फ छोटे पर्दे के ही किंग नहीं हैं, बल्कि बड़े पर्दे पर अपनी एक्टिंग स्किल्स को पहचान दिलाना भी जानते हैं. ‘ज्विगाटो’ जैसी सीरियस फिल्म के बाद, कपिल ने अपनी नई फिल्म ‘दादी की शादी’ में एक अनोखा बैलेंस बनाया है. इस बार, सिर्फ खुद पर फोकस करने के बजाय उन्होंने कहानी और किरदारों के बीच फोकस को खूबसूरती से बांटा है. अगर आपको फिल्म ‘बागबान’ याद है, तो सलमान खान का किरदार कहानी का सेंटर न होने के बावजूद, फिल्म की जान था. कपिल ने यहां भी वही ‘सलमान खान फॉर्मूला’ अपनाया है. वह नैरेटर हैं, लेकिन वह पूरी फिल्म को अपने आसपास घूमने नहीं देते. यही वजह है कि यह फिल्म ‘वन-मैन शो’ के बजाय ‘कम्प्लीट फैमिली पैकेज’ बन जाती है.
कहानीफिल्म की कहानी टोनी कालरा (कपिल शर्मा) और कन्नू आहूजा (सादिया खतीब) के सगाई से शुरू होती है. ढोल, भांगड़ा और खुशी का माहौल होता है. लेकिन यह खुशी एक बड़े शॉक में बदल जाती है जब कन्नू की दादी विमला आहूजा (नीतू कपूर) अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा और हिम्मत वाला फैसला बताती हैं- वह शादी कर रही हैं. विमला आहूजा का फैसला सिर्फ शादी का अनाउंसमेंट नहीं है, बल्कि समाज की उन सोच पर एक झटका है जो मानती हैं कि एक उम्र के बाद, इंसान को सिर्फ भगवान का नाम लेना चाहिए. फिल्म का पहला हाफ हल्का-फुल्का है और दादी के फैसले से होने वाले ‘कल्चरल शॉक’ और फैमिली ड्रामा पर फोकस करता है, वहीं दूसरा हाफ इमोशनल गहराई में गहराई से जाता है. कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है जो ट्रेलर में नहीं दिखाया गया था, लेकिन वही ट्विस्ट फिल्म का असली दिल है. यह कहानी रिश्तों, अकेलेपन और बुढ़ापे में साथ की जरूरत जैसे गंभीर विषयों को आसानी और मजाक के साथ दिखाती है.
एक्टिंगफिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टार कास्ट और उनकी केमिस्ट्री है. नीतू कपूर और आर सरथ कुमार दोनों फिल्म की रीढ़ हैं. विमला आहूजा के रोल में नीतू कपूर की ग्रेस और मासूमियत दिल को छू लेने वाली है. वहीं, साउथ इंडियन लेजेंड आर सरथ कुमार की स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार है कि उनके और नीतू कपूर के बीच के सीन केमिस्ट्री को फिर से परिभाषित करते हैं. उनके सीन में एक गर्मजोशी है जो बनी रहती है. कपिल शर्मा अपनी ‘कॉमेडी किंग’ इमेज बनाए रखते हुए अपनी एक्टिंग में गहराई लाते हैं. वह सिर्फ मजाक ही नहीं करते, बल्कि अपनी आंखों और डायलॉग डिलीवरी के जरिए टोनी कालरा के कन्फ्यूजन और प्यार को भी खूबसूरती से दिखाते हैं. सादिया खतीब अपनी सहजता और मासूमियत से प्रभावित करती हैं. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ताजी हवा के झोंके जैसी है. रिद्धिमा कपूर का डेब्यू शांत और कॉन्फिडेंट है. दूसरी ओर, योगराज सिंह अपने खास दमदार स्टाइल से स्क्रीन पर एक अलग छाप छोड़ते हैं. उनका स्वैग फिल्म के पंजाबी बैकग्राउंड को और मजबूत करता है.
डायरेक्शन और राइटिंगजिस सेंसिटिविटी के साथ फिल्म को डायरेक्ट किया गया है, उसके लिए पूरी टीम तारीफ की हकदार है. डायरेक्टर ने फिल्म को कभी भी ओवर-ड्रामैटिक या लाउड नहीं होने दिया. आज के दौर में जहां OTT प्लेटफॉर्म और फिल्में गाली-गलौज या डबल मीनिंग डायलॉग से भरी होती हैं, वहीं ‘दादी की शादी’ एक क्लीन फिल्म है जिसे आप अपने बच्चों और माता-पिता के साथ बिना किसी झिझक के देख सकते हैं. फिल्म के डायलॉग दिल को छू लेने वाले हैं. वे आपको हंसाते भी हैं और सोचने पर मजबूर भी करते हैं.
सिनेमैटोग्राफीफिल्म टेक्निकली बहुत रिच लगती है. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी पंजाब की सुंदरता और पारिवारिक रिश्तों की गर्मजोशी को खूबसूरती से दिखाती है. फिल्म का कलर पैलेट वाइब्रेंट और अच्छा है.
म्यूजिकफिल्म का म्यूजिक सॉफ्ट और मेलोडियस है. गाने कहानी की रफ्तार में रुकावट नहीं डालते, बल्कि उसे आगे बढ़ाते हैं. शादी के गानों की एनर्जी दर्शकों को नाचने पर मजबूर कर देती है.
कमियांहालांकि फिल्म बहुत अच्छी है, लेकिन कुछ चीजें और बेहतर हो सकती थीं. कहानी की शुरुआत में शादी के सीन थोड़े लंबे लग सकते हैं, इससे फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी लगती है. कुछ जगहों पर, कहानी का अगला स्टेप थोड़ा प्रेडिक्टेबल हो जाता है, हालांकि ट्विस्ट इस कमी को पूरा कर देते हैं.
अंतिम फैसला‘दादी की शादी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह एक इमोशन है. यह हमें सिखाती है कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती और हर किसी को खुश रहने का हक है. यह फिल्म आपको हंसाएगी, आपकी आंखों में आंसू लाएगी और आखिर में आपको एक सुकून देने वाली मुस्कान देगी. अगर आप ऐसी फिल्म का इंतजार कर रहे हैं जिसे आप पूरे परिवार के साथ थिएटर में देख सकें, तो यह फिल्म आपके लिए है. कपिल शर्मा का ‘बागबान’ फॉर्मूला पूरी तरह सफल रहा है. मेरी ओर से फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार.



