क्या आप जानते हैं? पाली में जहां परशुराम ने की थी महादेव की तपस्या, उसी धरा पर स्थापित हुई 21 फीट ऊंची प्रतिमा

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भक्ति का अद्भुत संगम! पाली में जहां तपस्या की वहीं लगी परशुराम की भव्य प्रतिमा
Last Updated:May 08, 2026, 12:18 IST
Parashuram Tapobhoomi Pali: पाली जिले के सादड़ी में भगवान परशुराम की 21 फीट ऊंची अष्टधातु प्रतिमा स्थापित की गई है. जयपुर के कारीगरों ने 5 महीने की मेहनत से इस भव्य प्रतिमा को तैयार किया है, जिस पर करीब 35 लाख रुपए खर्च हुए. वांकल माता मंदिर के पास मगाई नदी किनारे स्थापित यह प्रतिमा श्रद्धा और पर्यटन का नया केंद्र बन रही है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह वही स्थान है, जहां भगवान परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या की थी. स्थानीय लोगों ने इसे सामाजिक समरसता और धार्मिक आस्था का प्रतीक बताया है.
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पाली. राजस्थान का एक ऐसा गांव, जो भगवान शिव के सबसे बड़े भक्त की तपोभूमि के लिए अपनी पहचान रखता है. मगर यह पहचान अब साफ तौर पर यहां आने वाले पर्यटकों को देखने को मिलेगी, जब स्वयं भगवान परशुराम उन्हें ऊंचाई पर नजर आएंगे. राजस्थान की वीर धरा पर आज भक्ति और शक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. भगवान विष्णु के छठे अवतार और ज्ञान व शौर्य के प्रतीक भगवान परशुराम की तपोभूमि सादड़ी अब एक नई पहचान के साथ दुनिया के सामने है.
जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा 5 महीनों की कड़ी मेहनत और 35 लाख की लागत से तैयार की गई 21 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा अब सादड़ी में स्थापित कर दी गई है. आपको बता दें कि कुंभलगढ़ की वादियों में, जहां कभी परशुराम जी ने शिव की तपस्या की थी, अब उसी माटी पर उनकी यह विशाल प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को धर्म और समरसता का मार्ग दिखाएगी.
21 फीट ऊंची अष्टधातु की बनी प्रतिमाभगवान परशुराम की तपोभूमि के रूप में विख्यात सादड़ी में आज एक नया इतिहास रचा गया है. वांकल माता मंदिर के समीप मगाई नदी के किनारे 21 फीट ऊंची अष्टधातु की भव्य परशुराम प्रतिमा को विशेष क्रेन की मदद से स्थापित किया गया. यह स्थान वही है, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम ने भगवान शिव की कठोर आराधना की थी.
जयपुर के कलाकारों का हुनर, 5 महीने की मेहनतइस प्रतिमा का निर्माण जयपुर की प्रसिद्ध ‘भारती शिल्पकला’ द्वारा किया गया है. मूर्ति शिल्पकार महावीर भारती के अनुसार, सितंबर में कार्य शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में करीब 5 महीने का समय लगा. अष्टधातु से बनी यह प्रतिमा अपनी नक्काशी और भव्यता के कारण दूर से ही श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है.
जनसहयोग से साकार हुआ सपनाइस विशाल प्रोजेक्ट के लिए करीब 35 लाख रुपए की राशि जनसहयोग से जुटाई गई है. भगवान परशुराम प्रतिमा अनावरण समिति के प्रयासों से पिछले दो वर्षों से ‘आई लव सादड़ी’ सर्किल को ‘परशुराम सर्किल’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा था. इसमें समाजसेवियों, व्यापारियों और ग्रामीणों का अभूतपूर्व योगदान रहा है.
समरसता और भाईचारे का संदेशसमिति के सदस्यों ने बताया कि इस प्रतिमा का अनावरण जल्द ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जाएगा. इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा. प्रतिमा की स्थापना के साथ ही सादड़ी में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और लोग इसे पर्यटन व श्रद्धा का एक नया केंद्र मान रहे हैं.
भगवान परशुराम का इतिहासभगवान परशुराम को अमर माना जाता है. उन्होंने अधर्म का विनाश करने के लिए शस्त्र (फरसा) उठाया और समाज को ज्ञान देने के लिए शास्त्र का मार्ग दिखाया. सादड़ी का यह क्षेत्र उनकी तपस्या का गवाह रहा है, और अब यहां उनकी प्रतिमा की स्थापना उनके आदर्शों को जीवंत रखने का एक बड़ा प्रयास है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Pali,Pali,Rajasthan



