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Rajasthan Farming News: बारिश कम तो चिंता क्यों? कृषि विशेषज्ञों ने बताए ऐसे तरीके, जिनसे बढ़ेगी पैदावार

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बारिश कम तो चिंता क्यों? कृषि एक्सपर्ट ने बताए ऐसे तरीके, जिनसे बढ़ेगी पैदावार

Last Updated:May 14, 2026, 13:50 IST

Agriculture Tips: अजमेर कृषि विज्ञान केंद्र ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए बाजरा, ज्वार, बुहार, तिल जैसी कम पानी वाली फसलों और जल संरक्षण, समय पर बुवाई की सलाह दी है. विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते मौसम और घटती वर्षा के बीच अब खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव करना जरूरी हो गया है.

अजमेर. कृषि विज्ञान केंद्र अजमेर की ओर से किसानों को कम वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती के बेहतर विकल्पों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में वर्षा की मात्रा अलग होने के कारण किसानों को स्थानीय मौसम और पानी की उपलब्धता के अनुसार फसलों का चयन करना चाहिए. अजमेर, जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में औसतन करीब 500 एमएम तक बारिश होती है. ऐसे में कम पानी में तैयार होने वाली फसलें किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती हैं.

विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते मौसम और घटती वर्षा के बीच अब खेती के पारंपरिक तरीकों में बदलाव करना जरूरी हो गया है. यदि किसान कम पानी वाली फसलों और नई तकनीकों को अपनाएं, तो कम बारिश में भी अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है.

कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलेंकृषि विज्ञान केंद्र अजमेर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. धर्मेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि कम वर्षा वाले इलाकों में बाजरा सबसे उपयुक्त फसल मानी जाती है, क्योंकि यह कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है. इसके अलावा किसान ज्वार की खेती भी कर सकते हैं, जो अनाज और पशुओं के चारे दोनों के रूप में उपयोगी रहती है.

उन्होंने बताया कि बुहार जैसी फसलें भी कम पानी में आसानी से तैयार हो जाती हैं और किसानों के लिए अच्छा विकल्प बन रही हैं. वहीं तिलहन फसलों में तिल की खेती को भी लाभदायक माना गया है. विशेषज्ञों के अनुसार इन फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम लागत और सीमित पानी में भी अच्छा उत्पादन मिल जाता है. इससे सूखे जैसी स्थिति में भी किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ता.

जल संरक्षण और समय पर बुवाई से बढ़ रहा फायदाडॉ. भाटी ने बताया कि कई किसान पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं. भरतपुर क्षेत्र के किसान बारिश के दौरान बार-बार जुताई कर वर्षा जल का संचयन करते हैं, जिससे मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है.

इसी नमी का उपयोग करते हुए किसान सितंबर और अक्टूबर में सरसों की बुवाई करते हैं और अच्छी पैदावार हासिल कर रहे हैं. विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि पानी की कमी वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण, समय पर बुवाई और कम पानी वाली फसलों का चयन खेती को ज्यादा लाभकारी बना सकता है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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