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‘माई एहड़ा पूत जण, जेड़ा राणा प्रताप’, मोहन भागवत बोले- हल्दीघाटी में मुगल सेना पीछे हटी तो जीत किसकी थी?

Last Updated:June 17, 2026, 15:48 IST

Maharana Pratap Jayanti 2026: उदयपुर के गांधी ग्राउंड में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती और हल्दीघाटी विजय दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर महाराणा प्रताप के शौर्य, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को नमन किया. अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच की लड़ाई नहीं था, बल्कि यह पूरे समाज के स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा का संघर्ष था. उन्होंने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर यह समझने की जरूरत है कि हल्दीघाटी में प्रताप की विजय हुई थी. भागवत ने कहा कि युद्ध के बाद मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था, जिससे विजय का संकेत स्पष्ट मिलता है. उन्होंने महाराणा प्रताप के त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध पंक्ति “माई एहड़ा पूत जण, जेड़ा राणा प्रताप” का जिक्र किया.

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उदयपुर में भागवत का बड़ा दावा, बोले- इतिहास ने छिपाई हल्दीघाटी विजय की सच्चाईZoomवीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती पर मोहन भागवत ने कहा- हल्दीघाटी में प्रताप की विजय हुई थी

उदयपुर. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी विजय दिवस के अवसर पर उदयपुर के गांधी ग्राउंड में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और महाराणा प्रताप के शौर्य, त्याग, संघर्ष तथा राष्ट्रभक्ति को याद किया गया.

आयोजन का मुख्य उद्देश्य हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को नए दृष्टिकोण के साथ समाज के सामने रखना था. वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय तक हल्दीघाटी के युद्ध को अनिर्णीत बताने का प्रयास किया गया, लेकिन अब विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर महाराणा प्रताप की विजय के पक्ष को सामने लाने का कार्य किया जा रहा है. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप के योगदान को भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक बताया.

हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं का संघर्ष नहीं था

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह पूरे समाज के स्वाभिमान, सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा का युद्ध था. उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष और महाराणा प्रताप की जयंती का एक साथ आना ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर है. भागवत ने कहा कि लोगों को यह समझना होगा कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की विजय हुई थी. यह केवल एक शासक की जीत नहीं थी, बल्कि उस दौर में भारत की स्वतंत्र चेतना और आत्मसम्मान की जीत थी. उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार ऐसे नैरेटिव गढ़े गए, जिनमें तथ्यों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया, लेकिन अब समय आ गया है कि वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए.

मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा, फिर विजय किसकी थी?

संघ प्रमुख ने कहा कि मुगल इतिहासकारों के लेखों में भी उल्लेख मिलता है कि युद्ध के बाद मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि युद्ध के बाद मुगल सेना पीछे हट गई, तो फिर विजय किसकी मानी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में केवल महाराणा प्रताप और उनकी सेना ही नहीं, बल्कि समाज का हर वर्ग उनके साथ खड़ा था. मोहन भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप ने अपने जीवन और संघर्ष से यह संदेश दिया कि भारत कभी झुकने वाला राष्ट्र नहीं रहा. जब-जब देश और संस्कृति पर संकट आया, तब-तब इस भूमि ने ऐसे वीर पैदा किए जिन्होंने आक्रांताओं का डटकर मुकाबला किया.

महाराणा प्रताप आज भी करोड़ों लोगों की प्रेरणा

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आगे कहा कि इतिहास में सम्मान उसी को मिलता है, जिसने समाज और राष्ट्र के लिए संघर्ष किया हो. उन्होंने कहा कि आज भी पूरे देश में महाराणा प्रताप की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है. यह उनके प्रति लोगों के सम्मान और उनके आदर्शों की स्वीकार्यता को दर्शाता है. उन्होंने महाराणा प्रताप के त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का उल्लेख करते हुए प्रसिद्ध पंक्ति “माई एहड़ा पूत जण, जेड़ा राणा प्रताप” का जिक्र किया. साथ ही लोगों से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाने, समाज को संगठित रखने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने का आह्वान किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्रभक्ति के माहौल में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ. इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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