नल सूखे तो 1 किमी दूर ‘डेंजर जोन’ बना सहारा, जान जोखिम में डालकर पानी ला रहे ग्रामीण

Last Updated:June 19, 2026, 05:51 IST
Ground Report Pali Rohat Mandali Darjiyan Water Crisis: पाली के रोहट उपखंड के मंडली दर्जियान गांव में पिछले लंबे समय से जलापूर्ति ठप होने के कारण भारी पेयजल संकट गहरा गया है. मजबूरन महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को गांव से 1 किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में स्थित एक खतरनाक और खुले कुएं से पानी लाना पड़ रहा है. कंटीली झाड़ियों से घिरे इस कुएं पर हर वक्त हादसे और सुरक्षा का खतरा बना रहता है. परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द स्थाई समाधान न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है.
ख़बरें फटाफट
पाली. राजस्थान का रोहट कस्बा आज भले ही अपनी प्रसिद्ध मोगर की कचोरी और आलीशान रोहटगढ़ रिसॉर्ट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बना चुका हो, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे छिपी एक कड़वी सच्चाई भी है. रोहट उपखंड के कई ग्रामीण इलाके आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. भीषण गर्मी के इस दौर में उपखंड के मंडली दर्जियान गांव में पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है. हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी को दांव पर लगाना पड़ रहा है.
मंडली दर्जियान गांव की जलापूर्ति व्यवस्था पिछले एक लंबे समय से पूरी तरह से ठप पड़ी है. गांव के नल महीनों से सूखे हैं, जिसके कारण स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और जलदाय विभाग (PHED) के खिलाफ भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्या को लेकर कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं. अधिकारियों की इस अनदेखी का खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है.
जान जोखिम में डालकर खुले कुएं से पानी भर रहे बच्चे और बुजुर्गगांव में पेयजल का कोई दूसरा विकल्प या चालू स्रोत न होने के कारण मजबूरन महिलाओं, मासूम बच्चों और बुजुर्गों को गांव से करीब एक किलोमीटर दूर सुनसान इलाके में जाना पड़ता है. वहां स्थित एक कच्चे और खुले कुएं से ग्रामीण रस्सी और बर्तनों के सहारे पानी निकालने को मजबूर हैं. चिलचिलाती धूप और तपती दोपहरी में सिर पर कल्सियां और भारी बर्तन उठाकर एक किलोमीटर का पैदल सफर तय करना ग्रामीणों की नियति बन चुका है.
डेंजर जोन: हर वक्त मंडराता है हादसों का सायाजिस कुएं से ग्रामीण पानी ला रहे हैं, वह किसी ‘डेंजर जोन’ से कम नहीं है.
खुला और असुरक्षित कुआं: यह कुआं चारों तरफ से कंटीली झाड़ियों से घिरा हुआ है और ऊपर से पूरी तरह से खुला है. पानी निकालते समय यहां हर वक्त पैर फिसलने या कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है.
सुरक्षा का खतरा: कुआं पूरी तरह से आबादी से दूर और सुनसान इलाके में स्थित है. ऐसे में पानी लेने जाने वाली स्कूल की बेटियों, युवतियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी परिजनों में हमेशा एक अनजाना डर और चिंता का माहौल बना रहता है.
महंगे टैंकरों के भरोसे मवेशी, पशुपालकों पर दोहरी मारइस भीषण जल संकट की मार सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशुओं पर भी बराबर पड़ रही है. गांव के खेल और तालाब सूखे पड़े हैं, जिससे मवेशियों के पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में ग्रामीणों को अपनी जेबें ढीली कर महंगे दामों पर निजी पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं. खेती और पशुपालन पर निर्भर इन गरीब ग्रामीणों के लिए सूखे के इस दौर में निजी टैंकरों का खर्च उठाना एक दोहरी आर्थिक मार साबित हो रहा है.
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी, मुफ्त सरकारी टैंकर की मांगमंडली दर्जियान के परेशान ग्रामीणों ने अब प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि संबंधित विभाग ने जल्द ही उनकी सुध नहीं ली, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जलदाय विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि:
गांव की बंद पड़ी पाइपलाइन और पूरी जलापूर्ति व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए.
जब तक समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो जाता, तब तक गांव में सरकारी स्तर पर टैंकरों से निशुल्क पानी की सप्लाई तुरंत शुरू करवाई जाए.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
सबमिट करें
Location :
Pali,Pali,Rajasthan



