Yoga Day 2026: पाचन तंत्र हमेशा रहता है खराब, दुरुस्त रखने में मददगार है उत्तानपादासन, जानें फायदे, सावधानियां

Last Updated:June 19, 2026, 22:58 IST
Uttanpadasana Benefits: आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्तानपादासन पेट और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इस आसन के दौरान पेट के निचले हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और पाचन तंत्र को लाभ मिलता है. जानें इसके अन्य सेहत लाभ और अभ्यास के दौरान किन बातों का रखें ध्यान.पाचन संबंधी समस्याओं में करें उत्तानपादासन.
आज की व्यस्त जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण पाचन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं. ऐसे में योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होता है. इन्हीं योगासनों में से एक है उत्तानपादासन, जिसे सरल और प्रभावी आसन माना जाता है. इसे घर पर बिना किसी विशेष उपकरण के आसानी से किया जा सकता है.
पेट की मांसपेशियों को बनाता है मजबूत
आयुष मंत्रालय के अनुसार, उत्तानपादासन पेट और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इस आसन के दौरान पेट के निचले हिस्से पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और पाचन तंत्र को लाभ मिलता है.
गैस, कब्ज और अपच में मिल सकती है राहत
नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से गैस, कब्ज, अपच और पेट में भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायता मिल सकती है. यह पाचन क्रिया को सक्रिय बनाने और पेट को स्वस्थ रखने में उपयोगी माना जाता है.
मानसिक तनाव को कम करने में सहायक
उत्तानपादासन केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है. गहरी और नियंत्रित सांसों के साथ इस आसन का अभ्यास करने से मन शांत होता है और तनाव व चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है.
कैसे करें उत्तानपादासन?सबसे पहले समतल जगह पर पीठ के बल लेट जाएं.दोनों हाथों को शरीर के पास रखें और हथेलियां जमीन की ओर रखें.धीरे-धीरे सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ 30 से 45 डिग्री तक ऊपर उठाएं.कुछ सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें.अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों को वापस जमीन पर ले आएं.अपनी क्षमता के अनुसार इस प्रक्रिया को कुछ बार दोहराएं.
किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोगों को यह आसन विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए.पीठ दर्द या रीढ़ की गंभीर समस्या वाले लोग सावधानी बरतें.गर्भवती महिलाओं को यह आसन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.हाल ही में पेट की सर्जरी कराने वाले लोगों को भी चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए.
About the AuthorAnshumala
अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें
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