Bikaner Maternal Death Case | बीकानेर पीबीएम अस्पताल में प्रसूता प्रीति की मौत, लापरवाही पर सवाल

Last Updated:June 20, 2026, 11:16 IST
Bikaner Maternal Death Case : बीकानेर के PBM अस्पताल में प्रसूता प्रीति की आईसीयू में मौत, परिजनों ने इलाज में लापरवाही और जानकारी न देने के आरोप लगाए. मृतका के पति कमल ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें यह नहीं बताया कि आखिर परेशानी क्या है. बाद में जोधपुर या जयपुर ले जाने की सलाह दे रहे. लेकिन फाइल देने से मना कर दिया. कोटा के बाद बीकानेर में प्रसूता की मौत, पति ने कहा- हमें कुछ भी नहीं बताया गया
बीकानेर. बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है. करीब एक महीने से आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही प्रसूता प्रीति की मौत हो गई. वह लंबे समय से वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती थी और डॉक्टर उसकी हालत पर लगातार नजर रखे हुए थे. प्रीति की मौत के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और इलाज के तरीके को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. इससे पहले इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार पिछले महीने प्रसव के बाद छह महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी थी. अब प्रीति की मौत के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है.
पति ने सुनाई एक महीने की दर्दभरी कहानी
मृतका के पति कमल से बातचीत की गई. उन्होंने पूरे मामले को विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि- 15 मई को बीपी बढ़ने की शिकायत हुई थी. इसके बाद नागौर से बीकानेर रेफर किया. छह महीने की गर्भवती थी. डॉक्टरों ने बताया कि मामला गंभीर है और सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ेगा. डॉक्टरों ने यह भी कहा था कि मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है. कमल का कहना है कि ऑपरेशन के बाद मां और बच्चा दोनों ठीक थे. बाद में प्रीति को लेबर रूम में शिफ्ट कर दिया, जहां उसे लगातार ब्लीडिंग होने लगी. ब्लीडिंग रोकने के लिए जो दवा या इंजेक्शन दिया गया, उसके बाद ब्लीडिंग और पेशाब दोनों बंद हो गए. अगले दिन 16 मई को उसे आईसीयू में भर्ती कर दिया. कमल ने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें यह नहीं बताया कि आखिर परेशानी क्या है. बाद में जोधपुर या जयपुर ले जाने की सलाह दे रहे. लेकिन फाइल भी देने से मना कर दिया. तब एक कोई अध्यक्ष हैं उनकी मदद से इलाज जारी रहा. करीब 10 से 20 दिन तक इलाज चला और प्रीति की हालत में सुधार भी हुआ. वह दो दिन तक ठीक रही, लेकिन तीसरे दिन फिर हालत बिगड़ गई. इसके बाद डॉक्टरों ने कह दिया कि अब कुछ भी उनके हाथ में नहीं है.
ससुर बोले, अस्पताल लेकर आए थे तब स्वस्थ थी बहूमृतका के ससुर ने भी इलाज पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने बातचीत में कहा कि- 15 मई को अस्पताल लाया. अस्पताल आने से पहले वह पूरी तरह स्वस्थ थी. लेकिन अस्पताल वालों ने बीपी कंट्रोल किए बिना ही ऑपरेशन कर दिया. अगर बच्चा गंभीर रूप से बीमार था तो वह दो दिन तक कैसे जीवित रहा. आज तक यह नहीं बताया गया कि परेशानी दवा से हुई, इलाज में चूक हुई या कोई अन्य वजह थी. आखिर अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी, इसका जवाब डॉक्टरों को देना चाहिए.
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहापीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया के अनुसार प्रथम दृष्टया प्रीति की मौत का कारण मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर माना जा रहा है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग पहले से ही पूरे मामले की जांच कर रहा है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी. परिजनों ने यह भी नाराजगी जताई कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनसे किसी मंत्री या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने संपर्क नहीं किया. उनका कहना है कि एक महीने से परिवार अस्पताल के चक्कर काट रहा था, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. अब प्रीति की मौत के बाद परिवार इंसाफ और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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