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दवाइयों को छोड़े बॉडी रहेगी फिट! पेड़ों की छांव में हुआ ‘योग अगेंस्ट एंटी एजिंग’, दिया नेचर बचाने का संदेश

Last Updated:June 20, 2026, 14:44 IST

Healthy Aging Yoga: उदयपुर में ‘योग अगेंस्ट एंटी एजिंग’ थीम पर आयोजित एक अनोखे कार्यक्रम ने स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ दिया. इस विशेष आयोजन में प्रतिभागियों ने सदियों पुराने विशाल वृक्षों की छांव में योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि नियमित योग न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम करने में भी सहायक हो सकता है. साथ ही आयोजकों ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया. पेड़ों के नीचे योग करने से प्रतिभागियों को प्राकृतिक वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का अनुभव हुआ. यह पहल लोगों को स्वस्थ रहने के साथ-साथ हरियाली बचाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करती है.

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उदयपुर: आपने योग के कई अनोखे रूप देखे होंगे, लेकिन क्या कभी पेड़ों के साथ योग होते देखा है? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उदयपुर में एक ऐसा ही अनूठा अभियान चलाया जा रहा है, जहां योग साधक सदियों पुराने वृक्षों के सान्निध्य में योगाभ्यास कर रहे हैं. इस पहल का उद्देश्य न केवल लोगों को योग के प्रति जागरूक करना है, बल्कि प्रकृति संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देना भी है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस वर्ष योग दिवस की थीम “योग अगेंस्ट एंटी एजिंग” रखी है. इसका उद्देश्य यह बताना है कि नियमित योगाभ्यास के जरिए बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम किया जा सकता है और व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी सकता है.

इसी थीम को लेकर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. उदयपुर के आदियोगी ग्रुप ने भी इस बार कुछ अलग करने का निर्णय लिया. ग्रुप के संस्थापक जसवंत मेनारिया ने बताया कि योग की उत्पत्ति भारत में हुई और प्राचीन काल में ऋषि-मुनि जंगलों एवं विशाल वृक्षों के बीच रहकर साधना और योगाभ्यास किया करते थे.

शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूतप्रकृति के निकट रहकर ही वे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनते थे तथा लंबी आयु प्राप्त करते थे. इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए आदियोगी ग्रुप के सदस्य शहर के विभिन्न हिस्सों में मौजूद पुराने और विशाल वृक्षों के पास पहुंचकर योग कर रहे हैं. योग सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने ताड़ासन, वृक्षासन, सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, त्रिकोणासन, वज्रासन, पद्मासन, प्राणायाम और ध्यान जैसी विभिन्न योग क्रियाएं कीं. इन आसनों के माध्यम से शरीर का संतुलन, लचीलापन और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने का प्रयास किया गया.

उदयपुर में आज भी कई ऐसे वृक्ष मौजूदडॉ. जसवंत मेनारिया ने बताया कि उदयपुर में आज भी कई ऐसे वृक्ष मौजूद हैं जो सैकड़ों वर्ष पुराने हैं. ये पेड़ केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का भी हिस्सा हैं. ऐसे पेड़ों के बीच योग करने से लोगों का प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है और उन्हें पर्यावरण संरक्षण के महत्व का एहसास होता है. उन्होंने बताया कि इन दिनों एरियल योग  भी काफी प्रचलित हो रहा है. बरगद जैसे विशाल वृक्षों की मजबूत और प्राकृतिक जटाएं एरियल योग के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करती हैं.

स्वस्थ जीवन और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेशइनके सहारे किए जाने वाले योगाभ्यास से शरीर की ताकत, संतुलन और स्टैमिना को बेहतर बनाने में मदद मिलती है. आदियोगी ग्रुप का यह अभियान योग, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए लोगों को स्वस्थ जीवन और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दे रहा है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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