ऐसा डिस्काउंट कहीं नहीं मिलेगा! राजस्थान के युवक ने बनाया ‘मोबाइल लग्जरी रूम’, पर्यटकों की बढ़ेगी भीड़

Last Updated:June 20, 2026, 13:12 IST
Mobile Luxury Room: राजस्थान के सुमेरपुर के एक युवा ने नवाचार की मिसाल पेश करते हुए ‘चलता-फिरता लग्जरी रूम’ तैयार किया है. यह मोबाइल लग्जरी यूनिट चीनी विला की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत सस्ती बताई जा रही है, जबकि इसमें आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है. पर्यटन और बड़े आयोजनों के लिए इसे एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है. महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों और जैसलमेर जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर यह आवास व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है. स्थानीय स्तर पर विकसित यह नवाचार ‘मेक इन इंडिया’ की भावना को भी मजबूती प्रदान करता है.
सुमेरपुर के रहने वाले इंजीनियर यथार्थ अग्रवाल ने पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल टूरिज्म को जोड़ते हुए हाई-टेक प्रीफैब इंफ्रास्ट्रक्चर का स्टार्टअप शुरू किया है. उनके स्टार्टअप द्वारा विकसित लग्जरी कंटेनर रूम्स बिना जंगलों को नुकसान पहुंचाए और कंक्रीट का उपयोग किए बनाए जा रहे हैं. जवाई क्षेत्र में पर्यावरणीय संवेदनशीलता के कारण पक्के निर्माणों पर प्रतिबंध के चलते उन्हें यह आइडिया आया.
यथार्थ अग्रवाल ने ऐसे मूवेबल और लग्जरी आवास विकसित किए, जिन्हें बिना किसी खुदाई या कंक्रीट नींव के, सीधे क्रेन की सहायता से तय स्थान पर रख दिया जाता है. इस जीरो लैंड डैमेज तकनीक से जमीन की प्राकृतिक स्थिति और पेड़-पौधे पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं. यथार्थ का कहना है कि राज्य सरकार ने भी स्टार्टअप योजना के तहत इसे 2.5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी है.
3 महीने की रिसर्च के बाद जनवरी 2025 में अहमदाबाद में प्रोजेक्ट की शुरुआत कर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की. जहां स्पेस कैप्सूल होम्स, डोम्स व एप्पल पॉड कैबिन्स बनाए जा रहे हैं. चीनी आयातित विला के मुकाबले यह भारतीय कौशल व सामग्री के दम पर बने रूम्स आधी से भी कम लागत में तैयार हो रहे हैं. चीन से मंगाने पर टैक्स और माल ढुलाई के कारण जो आवास महंगे पड़ते थे, यथार्थ उन्हें 40% से 60% तक कम लागत में उपलब्ध करा रहे हैं.
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इन रूम्स में अत्याधुनिक वेदर-प्रूफ मैकेनिज्म है. दीवारों में 4 इंच मोटा विशेष पीयू फोम और रॉकवुल इंसुलेशन इस्तेमाल किया गया है, जिससे बाहरी तापमान और शोरगुल का कोई असर नहीं होगा. इसके कारण बिजली की खपत बेहद कम हो जाती है. पर्यावरण अनुकूलता के लिए इसमें इन-बिल्ट प्लंबिंग सिस्टम है, जो साइट पर सीधे सेप्टिक टैंक या एसटीपी से जुड़ जाता है. यथार्थ का दावा है कि एक वर्ष में राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल और महाराष्ट्र के वन क्षेत्रों में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है.
प्रीफैब यूनिट्स में मुख्य रूप से इन टिकाऊ और मौसम प्रतिरोधी मटेरियल्स का उपयोग किया जाता है: जीआई/एमएस स्टील स्ट्रक्चर, एल्युमिनियम, एसीपी शीट्स, फाइबर सीमेंट बोर्ड और पॉलीकार्बोनेट शीट्स, टफेंड ग्लास, पीयू फोम और रॉकवुल इंसुलेशन, डब्ल्यूपीसी, जिप्सम पैनल, एसपीसी/वुडन फ्लोरिंग और टेंसाइल फैब्रिक
ये लग्जरी आवास धर्मशाला हिमाचल, लगतपुरी महाराष्ट्र, अल्मोड़ा उत्तराखंड और सवाई माधोपुर राजस्थान में लग चुके हैं.यथार्थ का अगला लक्ष्य राजस्थान में ही चीन जैसी प्रीफैब निर्माण इकाई स्थापित करना है. महाकुंभ, चारधाम यात्रा और जैसलमेर रण उत्सव जैसे आयोजनों में ये अस्थायी आवास गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं, जिसके लिए उन्हें सरकार से भूमि और नीतिगत सहयोग की अपेक्षा है.
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