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लाठी-डंडे लेकर इंडिया बॉर्डर पर जमा हो गए 1000 बांग्लादेशी, BSF के तेवर देख उल्टे पांव भागे

नई दिल्ली: भारत-बांग्लादेश सीमा पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब बांग्लादेश की ओर से सैकड़ों लोगों ने भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश की. हालांकि, सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान अलर्ट थे. उन्होंने उनकी कोशिशों को नाकाम कर दिया और सीमा पर कड़ा पहरा कायम रखा. यह घटनाक्रम बीते 20 जून को उस कार्रवाई के कुछ घंटों बाद सामने आया, जिसमें बीएसएफ ने कथित घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश की ओर भेजा था. बताया जा रहा है कि इन लोगों को स्वीकार करने को लेकर बांग्लादेश पहले ही आपत्ति जता चुका है और बिना तय प्रक्रिया के भेजे गए लोगों को लेने से इनकार कर रहा है.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना मालदा जिले के बैष्णवनगर इलाके में स्थित सुकदेवपुर सीमा चौकी के पास हुई, जहां सीमा का एक हिस्सा अब भी बिना बाड़ का है. इसी का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में लोग भारतीय सीमा की ओर बढ़े, लेकिन बीएसएफ ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. बीस जून की सुबह बांग्लादेश की तरफ बॉर्डर के पास लाठियों से लैस सैकड़ों लोग जमा हो गए और भारतीय इलाके में घुसने की कोशिश की. जब बॉर्डर पर तैनात BSF जवानों ने उन्हें खदेड़ा, तो भारतीय तरफ भी भीड़ जमा हो गई.

BSF के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “तनाव था, लेकिन हमने स्थिति को ठीक से संभाला.” जब से BJP सत्ता में आई है, बंगाल सरकार ने घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही है. बांग्लादेश ने इन कोशिशों पर आपत्ति जताई है और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने इनका विरोध किया है.

सुखदेवपुर के रहने वाले पीयूष मंडल ने ‘द टेलीग्राफ’ अखबार को बताया कि हाल ही में भारत से वापस भेजे गए 20 बांग्लादेशियों ने दोबारा घुसने की कोशिश की थी. मंडल ने अखबार को बताया, “BSF (सीमा सुरक्षा बल) तुरंत हाई अलर्ट पर आ गई और घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया. हम भी BSF के समर्थन में वहां जमा हो गए. बल की सतर्कता और भारतीय नागरिकों के तेवर को भांपकर घुसपैठिए पीछे हट गए.”

मंडल ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में यह समूह 1,000 अन्य लोगों के साथ कुछ घंटों के लिए सीमा के बांग्लादेशी हिस्से में जमा हुआ और फिर तितर-बितर हो गया, क्योंकि BSF भारतीय हिस्से में तैनात थी. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक वरिष्ठ BSF अधिकारी के हवाले से कहा, “तनाव था, लेकिन हमने स्थिति को ठीक से संभाला.”

एक स्थानीय ग्रामीण, चपला मंडल ने कहा: “बांग्लादेश से सैकड़ों लोगों ने हमारी तरफ़ घुसने की कोशिश की. BSF और ग्रामीण बॉर्डर पर पहुंचे और उन्हें रोक दिया. हमारी सुरक्षा के लिए BSF को यहाँ फेंसिंग लगानी चाहिए.” मालदा उत्तर से BJP लोकसभा सांसद खगेन मुर्मू ने कहा कि BJP सरकार स्थिति को सुधारने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. उन्होंने फिर से आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए BSF को ज़मीन नहीं दी.

मुर्मू ने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. राज्य सरकार ने घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजना शुरू कर दिया है. हालाँकि, बांग्लादेश में कुछ लोग इसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं. आज सुखदेवपुर बॉर्डर आउटपोस्ट पर यही हुआ… लेकिन हम दृढ़ हैं.” बैष्णबनगर से BJP विधायक राजू करमाकर ने कहा: “देश की डेमोग्राफ़ी (जनसांख्यिकी) बदलने की कोशिश कर रहे घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा रहा है.”

मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए BSF को ज़रूरी सारी ज़मीन सौंप दी जाएगी. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 142 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पहले ही दी जा चुकी है. CM सुवेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों का पता लगाने और उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने के लिए “डिलीट, डिटेक्ट और डिपोर्ट” (हटाना, पता लगाना और वापस भेजना) पॉलिसी और इसके लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की भी घोषणा की. 7 जून को अधिकारी ने दावा किया कि पिछले एक महीने में 4,800 “अवैध घुसपैठियों” को बांग्लादेश वापस भेजा गया है.

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