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बुढ़ापे में दांत क्यों गिर जाते हैं? डेंटिस्ट से जानें वजह और लंबी उम्र तक दांत मजबूत रखने के टिप्स

Last Updated:June 23, 2026, 18:00 IST

Aging and Tooth Loss: बुढ़ापे में अधिकतर लोगों के दांत उखड़ जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों के दांत ताउम्र मजबूत बने रहते हैं. डेंटिस्ट की मानें तो दांतों का गिरना केवल उम्र का असर नहीं होता, बल्कि मसूड़ों की बीमारी, दांतों की सड़न, खराब ओरल हाइजीन और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं. नियमित ब्रशिंग, फ्लॉसिंग, बैलेंस्ड डाइट और समय-समय पर डेंटल चेकअप करवाकर दांतों को लंबी उम्र तक हेल्दी और मजबूत रखा जा सकता है.बुढ़ापे में दांत क्यों गिर जाते हैं? डेंटिस्ट से जानें सबसे बड़ी वजह और बचावZoomमसूड़ों की बीमारी के कारण दांत जवानी में भी गिर सकते हैं.

Why Teeth Become Weak with Age: बुढ़ापे में शरीर कमजोर हो जाता है और लोगों के दांत गिरने लगते हैं. अधिकतर लोगों के दांत 70-75 की उम्र तक उखड़ जाते हैं. अक्सर लोग मानते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ दांतों का गिरना एक सामान्य प्रक्रिया है. हालांकि डेंटिस्ट की मानें तो केवल उम्र बढ़ना ही दांत गिरने का कारण नहीं होता है. अगर दांतों का शुरुआत से ही खयाल रखा जाए, तो ताउम्र दांत नहीं उखड़ेंगे. डॉक्टर से जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर बुढ़ापे में दांत क्यों कमजोर पड़ने लगते हैं और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए.

नई दिल्ली के पीतमपुरा स्थित गुलाटी डेंटल एंड एस्थेटिक क्लीनिक के डेंटिस्ट डॉ. वैभव गुलाटी ने को बताया उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव होते हैं, लेकिन केवल उम्र की वजह से दांत नहीं गिरते हैं. असल समस्या तब शुरू होती है, जब मसूड़ों की बीमारी, दांतों में सड़न या लंबे समय तक ओरल केयर की अनदेखी की जाती है. अगर दांतों और मसूड़ों की सही देखभाल की जाए, तो बुढ़ापे में भी दांत मजबूत रह सकते हैं. दांत गिरने का सबसे बड़ा कारण मसूड़ों की बीमारी है. जब मसूड़ों में संक्रमण बढ़ जाता है, तो दांतों को सहारा देने वाली हड्डियां और ऊतक कमजोर होने लगते हैं. समय पर इलाज न मिलने पर दांत हिलने लगते हैं और गिर जाते हैं. मसूड़ों से खून आना, सूजन और बदबूदार सांस गम डिजीज के संकेत हो सकते हैं.

दांतों की सड़न भी बढ़ाती है खतरा

डॉक्टर गुलाटी ने बताया कि दांतों में कैविटी और सड़न लंबे समय तक बनी रहने पर दांत कमजोर हो सकते हैं. अगर समस्या गहराई तक पहुंच जाए, तो दांत बचाना मुश्किल हो सकता है. इसलिए नियमित जांच और समय पर ट्रीटमेंट बेहद जरूरी है. डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी दांतों और मसूड़ों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं. इसके अलावा धूम्रपान और तंबाकू का सेवन दांतों के नुकसान का खतरा कई गुना बढ़ा देता है.

लंबे समय तक दांत कैसे रखें हेल्दी

सुबह और रात को सोने से पहले फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना दांतों की सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है. इससे प्लाक और बैक्टीरिया को कम करने में मदद मिलती है. ब्रश उन जगहों तक नहीं पहुंच पाता जहां दांत आपस में जुड़े होते हैं. फ्लॉस का इस्तेमाल करने से इन हिस्सों की सफाई बेहतर तरीके से हो सकती है.

कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन D से भरपूर आहार दांतों और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है. ज्यादा मीठे फूड्स का सेवन कम से कम करना चाहिए. हर 6 महीने या डेंटिस्ट की सलाह के अनुसार दांतों की जांच करवाना जरूरी है. इससे शुरुआती समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है.

तंबाकू और धूम्रपान मसूड़ों की बीमारी, दांतों के नुकसान और मुंह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. इसलिए इनसे बचना दांतों की सेहत के लिए बेहतर है. अगर दांत हिलने लगें, मसूड़ों से बार-बार खून आए, मुंह में दर्द बना रहे या चबाने में परेशानी हो, तो तुरंत डेंटिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. शुरुआती इलाज से दांतों को बचाया जा सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.About the Authorअमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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