छींकते-खांसते लीक हो जाती है पेशाब, टॉयलेट तक पहुंचना होता है मुश्किल? बढ़ती उम्र नहीं, ये बीमारी है, ऐसे होती ठीक

जमशेदपुर. इन दिनों भारत समेत दुनिया भर में वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य लोगों को यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस यानी पेशाब को नियंत्रित न कर पाने की समस्या के प्रति जागरूक करना है. समाज में आज भी इस विषय पर खुलकर बात नहीं की जाती, जिसके कारण लाखों लोग चुपचाप इस समस्या को झेलते रहते हैं. जमशेदपुर के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय जौहरी का कहना है कि यह कोई सामान्य समस्या नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका सही समय पर इलाज संभव है.
डॉ. जौहरी बताते हैं कि यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस का मतलब है पेशाब का अनियंत्रित रूप से निकल जाना. कई लोग इसे उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मान लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. यह समस्या महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकती है, हालांकि महिलाओं में इसकी संभावना अधिक देखी जाती है.
दो प्रकार होते हैं इसकेमुख्य रूप से इनकॉन्टिनेंस दो प्रकार की होती है – स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस और अर्ज इनकॉन्टिनेंस. स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस में खांसने, छींकने, हंसने, दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने या कोई भारी सामान उठाने पर पेशाब की कुछ मात्रा अनायास निकल जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मूत्राशय और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं.
यह समस्या विशेष रूप से महिलाओं में गर्भावस्था, प्रसव या बढ़ती उम्र के बाद अधिक देखी जाती है. वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक के दौरान इसी प्रकार की समस्या के प्रति लोगों को अधिक जागरूक किया जा रहा है.
दूसरी ओर अर्ज इनकॉन्टिनेंस में व्यक्ति को अचानक और बहुत तेज पेशाब लगती है और वह समय पर शौचालय तक नहीं पहुंच पाता. इस स्थिति में पेशाब निकल जाने की संभावना बढ़ जाती है. इसे ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम से भी जोड़ा जाता है.
विशेषज्ञ की सलाह लेंडॉ. जौहरी के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को बार-बार कपड़े गीले होने, पेशाब रोकने में कठिनाई, अचानक तेज पेशाब लगने, रात में कई बार उठकर पेशाब जाने या खांसने-छींकने पर पेशाब निकलने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो उसे तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
इस समस्या से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय भी अपनाए जा सकते हैं. नियमित रूप से केगल एक्सरसाइज करने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. वजन को नियंत्रित रखना, धूम्रपान से बचना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और कब्ज की समस्या को दूर रखना भी मददगार साबित होता है. इसके अलावा मधुमेह और अन्य पुरानी बीमारियों को नियंत्रित रखना भी जरूरी है. पेल्विक मस्ल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज जरूर करें.
शर्म न करेंडॉ. जौहरी का कहना है कि सबसे जरूरी बात यह है कि लोग शर्म या संकोच के कारण इस समस्या को छिपाएं नहीं. आधुनिक चिकित्सा में दवाइयों, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और जरूरत पड़ने पर सर्जरी के माध्यम से इस बीमारी का प्रभावी उपचार उपलब्ध है, जिससे पेशेंट को राहत मिल जाती है.
वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक का संदेश स्पष्ट है कि पेशाब रोक न पाना कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य समस्या है. समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज सामान्य और आत्मविश्वास भरा जीवन जी सकता है.



