1 जुलाई से राजस्थान के सभी स्कूलों में शुरू होगा अभियान, शिक्षक करेंगे छात्रों की आंखों की जांच, जानें प्लान

Last Updated:June 27, 2026, 14:14 IST
School Eye Checkup Rajasthan: राजस्थान में विद्यार्थियों के बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए 1 जुलाई से स्कूलों में विशेष आंखों की जांच अभियान शुरू किया जाएगा. इस अभियान के तहत सरकारी और संबंधित विद्यालयों में शिक्षक विद्यार्थियों का प्रारंभिक दृष्टि परीक्षण (Vision Screening) करेंगे. जांच के दौरान जिन बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या या आंखों की कमजोरी के संकेत मिलेंगे, उन्हें आगे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास विस्तृत जांच के लिए भेजा जाएगा. इस पहल का उद्देश्य बच्चों में आंखों की समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका उचित उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े. शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से चलाए जाने वाले इस अभियान में शिक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश और प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
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बिना तकनीकी प्रशिक्षण मिली नई जिम्मेदारी पर उठे सवाल
बीकानेर. राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की आंखों की प्रारंभिक जांच कराने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है. इसके तहत 1 से 15 जुलाई तक प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की दृष्टि का परीक्षण स्नेलेन चार्ट के माध्यम से कराया जाएगा. इस संबंध में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं. हालांकि, इस निर्णय के बाद शिक्षक संगठनों ने बिना तकनीकी प्रशिक्षण शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपने पर सवाल उठाए हैं.
इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित करना है.राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीमा शर्मा ने जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक सरकारी विद्यालय में अध्ययनरत सभी विद्यार्थियों की दृष्टि का प्रारंभिक परीक्षण किया जाएगा. इसके लिए विद्यालयों को स्नेलेन चार्ट कंपोजिट ग्रांट अथवा अन्य उपलब्ध मदों से खरीदने होंगे.
अस्पतालों में प्रशिक्षित तकनीशियन करते हैं यह जांचविशेषज्ञों का कहना है कि स्नेलेन चार्ट से दृष्टि परीक्षण सामान्य प्रक्रिया जरूर है, लेकिन अस्पतालों में यह कार्य प्रशिक्षित ऑफ्थैल्मिक टेक्नीशियन, ऑफ्थैल्मिक असिस्टेंट, विजन टेक्नीशियन या ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा किया जाता है. इन पदों के लिए डिप्लोमा इन ऑफ्थैल्मिक टेक्नीशियन (डीओटी), डिप्लोमा इन ऑफ्थैल्मिक असिस्टेंट (डीओए) अथवा अन्य संबंधित दो वर्षीय तकनीकी पाठ्यक्रम अनिवार्य माने जाते हैं. इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं (पीसीबी/पीसीएम) योग्यता आवश्यक होती है.
अनावश्यक जवाबदेही भी शिक्षकों पर आएगीशिक्षक संगठनों ने जताई आपत्तिशिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार लगातार शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ा रही है. उनका तर्क है कि जिस कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मियों की नियुक्ति की जाती है, वही जिम्मेदारी बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के शिक्षकों को देना उचित नहीं है. संगठनों का कहना है कि इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होगा और किसी त्रुटि की स्थिति में अनावश्यक जवाबदेही भी शिक्षकों पर आएगी.
निर्धारित प्रपत्र में दर्ज कर स्वास्थ्य विभाग को भेजाऐसे होगी विद्यार्थियों की जांचनिर्देशों के अनुसार विद्यालय की कक्षा में स्नेलेन चार्ट को लगभग पांच फीट की ऊंचाई पर लगाया जाएगा. विद्यार्थी को चार्ट से छह मीटर दूर खड़ा कर पहले एक आंख बंद कराई जाएगी. इसके बाद उसे 6/12 लाइन पर बने अंग्रेजी अक्षर ‘E’ की दिशा (ऊपर, नीचे, दाएं या बाएं) बतानी होगी. यही प्रक्रिया दूसरी आंख से भी दोहराई जाएगी। यदि विद्यार्थी सही दिशा नहीं बता पाता है तो उसे संभावित दृष्टि दोष वाला मानते हुए आगे चिकित्सकीय जांच के लिए चिन्हित किया जाएगा. ऐसे विद्यार्थियों का विवरण निर्धारित प्रपत्र में दर्ज कर स्वास्थ्य विभाग को भेजा जाएगा.
About the AuthorJagriti Dubey
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