रोज पश्चिमोत्तानासन करने से क्या होता है? जानें अभ्यास का तरीका और फायदे

Last Updated:June 27, 2026, 21:07 IST
Paschimottanasana Benefits: पश्चिमोत्तानासन को महत्वपूर्ण आसनों में गिना जाता है. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है. साथ ही पैरों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं. यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है और पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक माना जाता है. यहां जानें इस आसान को कैसे किया जाता है.
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आजकल ज्यादातर लोग ऑफिस में या घर से लैपटॉप पर काम करते हैं. लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने की वजह से कमर दर्द, पीठ में अकड़न और शरीर में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है. इन्हीं योगासनों में से एक है पश्चिमोत्तानासन, जिसे कमर और रीढ़ की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.
पश्चिमोत्तानासन को अंग्रेजी में सीटेड फॉरवर्ड बेंड भी कहा जाता है. संस्कृत में पश्चिम का मतलब शरीर का पिछला भाग, “उत्तान” का अर्थ गहरा खिंचाव और “आसन” का मतलब योग मुद्रा होता है. इस आसन में शरीर के पिछले हिस्से, खासकर पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियों में अच्छा खिंचाव आता है.
पश्चिमोत्तानासन के फायदेयोग ग्रंथ हठ योग प्रदीपिका में पश्चिमोत्तानासन को महत्वपूर्ण आसनों में गिना गया है. यह हठयोग के प्रमुख आसनों में शामिल है. नियमित रूप से इस आसन का अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है. साथ ही पैरों की मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं. यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है और पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में भी सहायक माना जाता है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार, पश्चिमोत्तानासन डायबिटीज, मोटापा और साइटिका जैसी समस्याओं में भी लाभदायक हो सकता है. यह पेट के अंगों को सक्रिय करता है, जिससे पाचन बेहतर होता है. इसके अलावा यह मानसिक तनाव, चिंता और थकान को कम करने में भी मदद करता है. यही कारण है कि यह योगासन बुजुर्गों के लिए भी उपयोगी माना जाता है.
ऐसे करें अभ्यासइस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने सीधा फैलाएं. अब गहरी सांस लें और धीरे-धीरे कमर से आगे की ओर झुकें. अपनी क्षमता के अनुसार हाथों से पैरों या पंजों को पकड़ने की कोशिश करें. यदि संभव हो तो सिर या नाक को घुटनों के करीब लाएं. कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहें और सामान्य सांस लेते रहें. इसके बाद धीरे-धीरे वापस सीधी अवस्था में आ जाएं.
इस बात का ध्यान रखेंअगर आप पहली बार यह आसन कर रहे हैं, तो शरीर पर अधिक जोर बिल्कुल न डालें. धीरे-धीरे अभ्यास करने से शरीर लचीला होने लगता है. जिन लोगों को पेट में अल्सर, दस्त की समस्या है या हाल ही में पेट की सर्जरी हुई है, उन्हें यह आसन करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
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