डेंजर जोन में पाली के 61 अस्पताल, 34 को नए सिरे से बनाने की मिली मंजूरी, जानें कब तक होगा कायाकल्प

पाली. मानसून की पहली बारिश जहां आम लोगों को राहत देती है, वहीं कई जगहों पर यह आफत बनकर बरसती है. सबसे बड़ा डर होता है सालों पुराने और जर्जर हो चुके भवनों के गिरने का. जरा सोचिए, अगर ये जर्जर भवन वो अस्पताल हों, जहां लोग इलाज कराने जाते हैं, तो खतरा कितना बड़ा हो जाता है. इसी खतरे को भांपते हुए चिकित्सा विभाग ने एक बेहद सराहनीय और सुखद काम किया है. जिले के करीब 502 पीएचसी, सीएचसी और उप-स्वास्थ्य केंद्रों का सर्वे किया गया, जिसमें से समय के साथ जर्जर हो चुके 61 भवनों को डेंजर जोन यानी असुरक्षित घोषित किया गया है.
राज्य सरकार के निर्देश पर बनी स्पेशल सिविल विंग और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर्स की कमेटी ने यह रिपोर्ट तैयार की है. राहत की बात यह है कि इनमें से 34 भवनों के नए निर्माण की स्वीकृति भी आ चुकी है, ताकि बारिश में कोई बड़ा हादसा न हो और मरीजों को सुरक्षित माहौल में इलाज मिल सके. सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि पाली जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला चिकित्सालयों को मिलाकर कुल चिकित्सा केंद्रों की संख्या 500 से अधिक है. चूंकि इनमें से कई स्वास्थ्य केंद्रों के भवन काफी पुराने समय के बने हुए हैं, इसलिए समय के साथ-साथ वे जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं.
विशेष विंग और कमेटी कर रही है काम
डॉ. मारवाल ने व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही हमें फील्ड से किसी भवन के जर्जर होने की सूचना मिलती है, हमारी विशेष कमेटी तुरंत एक्टिव हो जाती है. राज्य सरकार के निर्देशानुसार इसके लिए एक दल गठित किया गया है, जिसमें एनएचएम से जुड़ी सीएमएचओ सिविल विंग जोधपुर के सदस्य और पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता शामिल हैं. यह कमेटी मौके पर जाकर सर्वे करती है और अपनी रिपोर्ट सौंपती है. इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला कलेक्टर द्वारा भवन को ‘जर्जर प्रमाण पत्र’ जारी किया जाता है.
61 चिकित्सा भवन जर्जर घोषित
स्वास्थ्य विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले में अब तक कुल 61 चिकित्सा भवनों को जर्जर घोषित करवा दिया गया है. विभाग के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है कि इन 61 भवनों में से 34 भवनों को पुन: नया बनाने की वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है.
राज्य स्तर पर लंबित स्वीकृतियां भी जल्द होंगी जारी
डॉ. मारवाल ने कहा कि जिन 34 भवनों की स्वीकृति आ चुकी है, वहां जल्द ही नए सिरे से निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा ताकि मरीजों और स्टाफ को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. वहीं, शेष बचे जर्जर भवनों की फाइलें भी प्रक्रिया में हैं और राज्य स्तर से उनकी स्वीकृति भी जल्द ही जारी कर दी जाएगी. सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से धरातल पर चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर और सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं.



