ये है दुनिया का इकलौता ज्वालामुखी जो उगलता है सोना! हर दिन हवा में बिखेरता है 11 लाख का गोल्ड

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दुनिया का इकलौता ज्वालामुखी उगलता है सोना! हर दिन हवा में बिखेरता है 80g गोल्ड
Last Updated:June 30, 2026, 16:57 IST
अंटार्कटिका के रॉस द्वीप पर एक ऐसा ज्वालामुखी है जो बिल्कुल अलग मिजाज का है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके धुएं और गैसों के साथ हवा में सोने के बेहद बारीक कण बाहर निकलते हैं. इसका नाम माउंट एरेबस है. यह दुनिया का सबसे दक्षिणी सक्रिय ज्वालामुखी है, जिसके अंदर लावा की एक स्थायी झील हमेशा उबलती रहती है.Volcano. AI Generated Photo.
ज्वालामुखी का नाम सुनते हैं तो लावा, राख, धुआं और जहरीली गैसें निकलती हैं. लेकिन माउंट एरेबस ऐसा ज्वालामुखी है जो सोना उगलता है. अंटार्कटिका के रॉस द्वीप पर स्थित ये ज्वालामुखी दुनिया का सबसे दक्षिण में स्थित है, जो सक्रिय ज्वालामुखी है. यह दक्षिणी ध्रुव से करीब 1350 किलोमीटर दूर है. इसकी खास बात यह है कि इसके अंदर हमेशा उबलती रहने वाली लावा झील मौजूद है.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसों में वैज्ञानिकों को शुद्ध सोने के बेहद छोटे-छोटे कण मिले हैं. 1991 पन्नों के वैज्ञानिक अध्ययन ने बताया है कि माउंट एरेबस हर दिन करीब 80 ग्राम सोने की महीन धूल हवा में छोड़ता है. तेज हवाएं इस धूल को करीब 1000 किलोमीटर या उससे भी ज्यादा दूर तक पहुंचा सकती हैं.
यह सोना आखिर बाहर आता कैसे है?
वैज्ञानिक बताते हैं कि पृथ्वी के अंदर मौजूद मैग्मा में सोने समेत कई धातुएं होती हैं. सोने का बॉलिंग प्वाइंट बहुत ज्यादा होता है. इसलिए सोना ज्वालामुखी के तापमान में सीधे पिघलकर गैस नहीं बनता. तो फिर से सोना उबलता नहीं तो बाहर कैसे आता है. माना जाता है कि ज्वालामुखी के अंदर मौजूद क्लोरीन और सल्फर वाले गोल्ड यौगिक को अपने साथ गैस के रूप में ऊपर ले आते हैं.
ज्वालामुखियों में सोना होता है. दुनिया के दूसरे ज्वालामुखियों में भी सोने के अंश मिले हैं. जैसे हवाई के किलाऊआ, इटली के एटना, अलास्का के ऑगस्टीन और मैक्सिको के एल चिचोन शामिल हैं. लेकिन वहां सोना एक रासायन के रूप में पाया गया है. माउंट एरेबस ही ऐसा एकमात्र ज्वालामुखी है जहां शुद्ध होता है. इसके क्रिस्टल मिले हैं.
कैसा दिखता है ये सोना
वैज्ञानिकों ने ज्वालामुखी के आसपास की बर्फ और उससे निकलने वाली गैस के कुछ नमूने लिए हैं. कुछ नमूने 1000 किलोमीटर दूर तक की हवा से भी लिए गए. तीनों जगह उन्हें सोने के बेहद छोटे कण मिले. माइक्रोस्कोप से देखने पर सोने के कण साधारण धूल जैसे नहीं दिखते हैं. ये बेहद सुंदर आकार वाले छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में दिखाई देते हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि जब ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसें ठंडी होती हैं, तो उनमें मौजूद सोना अलग होकर क्रिस्टल का रूप ले लेता है. फिर बर्फ पर जम जाता है.
ज्वालामुखी में है लावा की झील
हालांकि, इस पूरे मामले में एक समस्या भी है. गैस में सोने की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए हवा में अपने आप इतने सुंदर क्रिस्टल बनना आसान नहीं माना जाता. दूसरी संभावना यह भी है कि ये सोने के क्रिस्टल पहले लावा झील की सतह पर धीरे-धीरे बनते हैं. बाद में ज्वालामुखी से निकलने वाली गैसें इन्हें अपने साथ ऊपर ले जाती हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इस खोज को 30 साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि माउंट एरेबस ऐसा कैसे करता है. यानी आज भी अंटार्कटिका का यह रहस्यमयी ज्वालामुखी विज्ञान के लिए एक पहेली बना हुआ है. बर्फ से ढकी दुनिया में यह मानो हर दिन आसमान में सोने की महीन धूल बिखेर रहा हो.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
मैं इस समय App टीम का हिस्सा हूं. App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…और पढ़ें
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