Rajasthan

Doctor’s Day Special: गांव की बेबसी बनी प्रेरणा! किसान का बेटा बना न्यूरो सर्जन, अब बचाएगा जिंदगियां

Last Updated:July 01, 2026, 11:23 IST

Doctor’s Day Specia Farmer Son Success Story: सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बावजूद बाड़मेर के किसान पुत्र डॉ. मनोहर बालाच ने अपनी मेहनत से नई मिसाल कायम की है. नीट सुपर स्पेशलाइजेशन में 2400वीं रैंक हासिल करने के बाद उन्हें एम.सी.एच. न्यूरोसर्जरी के लिए प्रवेश मिला. डॉ. बालाच का कहना है कि बाड़मेर में न्यूरो सर्जन की कमी के कारण सड़क हादसों और गंभीर मामलों में कई मरीज समय पर इलाज नहीं मिलने से जान गंवा देते हैं. यही वजह है कि उनका सपना अपने जिले लौटकर लोगों को आधुनिक न्यूरो सर्जरी की बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है.

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बाड़मेर. पश्चिमी सरहद पर बसे राजस्थान के बाड़मेर जिले के पूंजासर गांव की धूल भरी गलियों से निकलकर एक किसान के बेटे ने अपने संघर्ष, मेहनत और सेवा के जज्बे से ऐसी मिसाल कायम की है, जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. सीमावर्ती ग्रामीण इलाके में पले-बढ़े डॉ. मनोहर बालाच ने बचपन से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, इलाज के लिए दूर-दराज भटकते मरीजों की परेशानी और समय पर उपचार नहीं मिलने की पीड़ा को बेहद करीब से देखा. गांव के लोगों को दर्द से कराहते और गंभीर बीमारियों के बावजूद उचित चिकित्सा से वंचित रहते देख उनके मन में डॉक्टर बनने और समाज की सेवा करने का संकल्प जन्मा.

आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. लगातार कठिन परिश्रम, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने न्यूरो सर्जन बनने का सपना साकार कर दिखाया. किसान केवलाराम बालाच के बेटे डॉ. मनोहर बालाच की यह सफलता न केवल उनके परिवार और बाड़मेर जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि मजबूत इरादों के सामने संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती.

गांव से प्रारंभिक शिक्षा हुई अब बने न्यूरो सर्जन

डॉ. मनोहर बालाच की प्रारंभिक शिक्षा राउप्रावि पुंजासर से हुई और फिर चौहटन से उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की. सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया. लगातार मेहनत और लग्न के दम पर उन्होंने मेडिकल शिक्षा पूरी की और एम.एस. जनरल सर्जरी की डिग्री हासिल की, लेकिन उनका सपना यहीं नहीं रुका. अब वे मस्तिष्क के विशेषज्ञ बनकर गंभीर मरीजों की सेवा करना चाहते है.

नीट सुपर स्पेशललाइजेशन में हासिल की 2400वीं रैंक

इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद नीट सुपर स्पेशललाइजेशन की तैयारी की और 2400वीं रैंक हासिल की है. उनकी इस उपलब्धि के बाद उन्हें एम.सी.एच. न्यूरोसर्जरी के लिए जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला है. जहां वे वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. वे बताते हैं कि सड़क हादसे में गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रैफर किया जाता है, लेकिन बाड़मेर में न्यूरो सर्जन नहीं होने से कई बार मरीज की मौत हो जाती है. ऐसे में अब वे बाड़मेर में न्यूरो सर्जन बनकर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं, ताकि किसी मरीज को बेबस मौत का शिकार नहीं होना पड़े.

बेहतर न्यूरो सर्जरी सुविधाएं उपलब्ध करवाना है लक्ष्य

डॉ. मनोहर बालाच बताते हैं कि डॉक्टर का पेशा केवल रोजगार नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है. उनका सपना है कि भविष्य में ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के मरीजों को भी बेहतर न्यूरो सर्जरी सुविधाएं उपलब्ध हों ताकि किसी को इलाज के लिए बेबस होकर भटकना न पड़े.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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