पाली का रहस्यमयी मंदिर, जहां ध्वजा लहराते ही खिंचे चले आते हैं बादल! जानिए सदियों पुरानी परंपरा

Last Updated:July 01, 2026, 12:04 IST
Pali Wareshwar Mahadev Temple: पाली के गुडा एंदला गांव के ऐतिहासिक वारेश्वर महादेव मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा के तहत विशेष ध्वजा चढ़ाई गई. जैन संघ के अध्यक्ष घीसूलाल रूपचंद सोनिगरा परिवार द्वारा चढ़ाई गई इस ध्वजा को लेकर मान्यता है कि इसके लहराने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में सूखा नहीं पड़ता. इस अवसर पर भोलेनाथ का विशेष अभिषेक कर अच्छी बारिश की सामूहिक मन्नत मांगी गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया.
पाली के गुडा एंदला गांव में स्थित ऐतिहासिक वारेश्वर महादेव मंदिर के शिखर पर जब एक खास ध्वजा लहराती है, तो माना जाता है कि सावन खुद-ब-खुद खिंचा चला आता है, और इस बार भी वहाँ वह बेहद खास मन्नत मांगी गई है जिसके पीछे पूरा इलाका टकटकी लगाए बैठा है, जिससे इस मंदिर की गहरी आस्था का रहस्य और इस बार की मिन्नतों का खास होना हर किसी के कौतूहल का विषय बना हुआ है.
गुडा एंदला गांव के वारेश्वर महादेव मंदिर के शिखर पर हर साल की तरह इस बार भी पूरी श्रद्धा के साथ गाजे-बाजे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जैन संघ के अध्यक्ष घीसूलाल रूपचंद सोनिगरा परिवार की तरफ से विशेष ध्वजा चढ़ाई गई, जिसे लेकर यह अटूट मान्यता है कि इस पावन प्रतीक के लहराने के बाद इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में कभी भी सूखे के हालात पैदा नहीं होते हैं.
इस विशेष अवसर पर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से अभिषेक और पूजा-अर्चना करने के बाद हुई महाआरती में उपस्थित जनसैलाब ने क्षेत्र में सुख, समृद्धि और अच्छी बारिश की सामूहिक मन्नत मांगी, जिसके दौरान महिलाओं द्वारा दिए गए मंगल गीत, संकीर्तन और भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान होकर पूरी तरह भक्तिमय हो गया.
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इस धार्मिक और पारंपरिक आयोजन में पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस मौके पर कुंदनमल खांटेर, जवेरचंद, अशोक मेहता, सुभाष तलेसरा, प्रवीण कोठारी, बद्रीलाल पांडे, अनराज रावल, भंवरलाल ओझा, दिनेश ओझा, बालकृष्ण ओझा, रतनलाल मालवीय, भरत छीपा, कालूराम मालवीय, भंवरसिंह राठौड़, कालूराम मीणा, जगदीश मीणा और लछाराम मीणा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन और ग्रामीण मौजूद रहे.
मारवाड़ की तपती धरती पर वारेश्वर महादेव मंदिर की यह परंपरा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मनुष्य के बीच के उस अटूट विश्वास की कहानी है जो सदियों से इस धरा को हरा-भरा रखने की उम्मीद जगाए हुए है, और अब पूरे इलाके को बस इसी बात का बेसब्री से इंतजार है कि कब महादेव की कृपा बरसेगी और मरुधरा पानी-पानी होगी.
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