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एसएमएस अस्पताल में फाइलें कमरे में बंद, एक महीने तक रुके किडनी ट्रांसप्लांट! अब हरकत में आया प्रशासन

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है. अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धनंजय अग्रवाल के 30 मई को सेवानिवृत्त होने के बाद उनके कार्यालय का कमरा बंद कर दिया गया. इसी कमरे में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े कई मरीजों की फाइलें और आवश्यक दस्तावेज रखे हुए थे, जिसके कारण करीब एक महीने तक ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.

बताया जा रहा है कि इस दौरान लगभग 11 मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट प्रभावित हुआ. कई मरीज दूर-दराज के जिलों और अन्य राज्यों से जयपुर पहुंचकर इलाज का इंतजार कर रहे थे, लेकिन प्रक्रिया रुकने से उन्हें मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा.

मीडिया में मामला आने के बाद प्रशासन सक्रियमामला सार्वजनिक होने और मीडिया में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया. बंद कमरे का ताला खुलवाया गया और विभाग का कार्यभार डॉ. संजीव शर्मा को सौंप दिया गया. इसके साथ ही मरीजों की लंबित फाइलों की समीक्षा शुरू कर दी गई है ताकि रुके हुए ट्रांसप्लांट जल्द पूरे किए जा सकें. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों का इलाज किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए और अब सभी लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा.

मोदी धर्मशाला में इंतजार कर रहे हैं कई परिवारएसएमएस अस्पताल के सामने स्थित मोदी धर्मशाला में कई ऐसे मरीज और उनके परिजन रह रहे हैं जो महीनों से किडनी ट्रांसप्लांट की तारीख का इंतजार कर रहे हैं. इलाज के लिए अपने घरों से दूर रह रहे इन परिवारों पर रहने और खाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है.

बांसवाड़ा से आए दंपती की मुश्किलेंबांसवाड़ा जिले के एक गांव से आए जयंतीलाल अपनी पत्नी अनीता को किडनी दान करने के लिए मार्च से जयपुर में रह रहे हैं. ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद ऑपरेशन आगे नहीं बढ़ पाया. परिवार इलाज पर लाखों रुपये खर्च कर चुका है और धर्मशाला में रोजाना किराया देने के कारण आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

उत्तराखंड से पहुंचे मरीज की बढ़ी परेशानीउत्तराखंड से आए नितिन सैनी भी अपनी बहन के साथ लंबे समय से जयपुर में हैं. नियमित डायलिसिस के बावजूद ट्रांसप्लांट में देरी होने से उनकी परेशानी बढ़ती गई. उनका कहना है कि सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.

एक मरीज की हालत हुई गंभीरइसी बीच 35 वर्षीय महेंद्र सैनी की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. समय पर ट्रांसप्लांट नहीं हो पाने के कारण उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा. डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति सामान्य होने के बाद ही ऑपरेशन संभव हो सकेगा.

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहाअस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कमरे के बंद होने से इलाज रुकना उचित स्थिति नहीं थी. अब संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं और विभाग का संचालन नए प्रभारी डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार मरीजों की फाइलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है और जिन मरीजों की सभी जांचें पूरी हैं, उनके ट्रांसप्लांट जल्द निर्धारित किए जाएंगे.

जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त हुए डॉ. धनंजय अग्रवाल को पुनः संविदा पर नियुक्त कर अजमेर में जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जयपुर में नए डॉक्टर ने विभाग का कार्यभार संभाल लिया है.

दो सप्ताह में शुरू हो सकते हैं लंबित ट्रांसप्लांटनए प्रभारी डॉक्टर से मुलाकात के बाद मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद जगी है. अस्पताल की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जिन मरीजों की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य जरूरी पैरामीटर सामान्य पाए जाएंगे, उनका किडनी ट्रांसप्लांट अगले दो सप्ताह के भीतर किया जा सकता है. इससे लंबे समय से इंतजार कर रहे मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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