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रेगिस्तान में उग रहा सोना! खजूर ने बदली जालोर के किसानों की किस्मत, मिल रहा बंपर मुनाफा

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रेगिस्तान में उग रहा सोना! खजूर ने बदली किसानों की किस्मत, मिल रहा बंपर मुनाफा

Last Updated:July 02, 2026, 13:42 IST

Jalore Date Palm Cultivation: राजस्थान के जालोर जिले में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. किसान अब पारंपरिक फसलों की बजाय खजूर की उन्नत किस्मों बरही, खलासा और मेजूल की व्यावसायिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. भीनमाल उपखंड के भालनी और दाता गांव इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बन चुके हैं, जहां प्रयोग के तौर पर शुरू हुई खजूर की खेती आज किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बन गई है. कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य मिलने से इस खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है. जालोर की शुष्क जलवायु और नर्मदा नहर की सिंचाई सुविधा ने भी इस बदलाव को गति दी है. सफल किसानों को देखकर आसपास के ग्रामीण भी खजूर की खेती अपना रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह खेती आने वाले वर्षों में जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है.

जालोर जिले में खेती का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है. जिले के किसान, हनीफ मेहर जैसे प्रगतिशील किसानों की राह पर चलते हुए अब पारंपरिक फसलों को छोड़कर खजूर की उन्नत किस्मों बरही, खलासा और मेजूल की खेती अपना रहे हैं. कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा देने वाली यह खेती नर्मदा नहर की सिंचाई सुविधा के साथ किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है. भीनमाल उपखंड के भालनी और दाता गांव इस बदलाव के सबसे बड़े उदाहरण बन चुके हैं.

जालोर के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका की उन्नत खजूर किस्मों बरही, खलासा और मेजूल की खेती कर रहे हैं. ये किस्में बेहतरीन स्वाद, उच्च गुणवत्ता और अधिक बाजार मूल्य के लिए जानी जाती हैं. कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली इन फसलों से किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है. जालोर में उत्पादित खजूर अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जयपुर, अहमदाबाद, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में भी सप्लाई किए जा रहे हैं. बढ़ती मांग और बेहतर दाम मिलने से जिले के अधिक किसान अब खजूर की व्यावसायिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

इस सफलता के पीछे जालोर की शुष्क जलवायु और नर्मदा नहर की सिंचाई व्यवस्था की अहम भूमिका है. खजूर की खेती के लिए गर्म और शुष्क मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है, जबकि इस फसल में अन्य फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है. नर्मदा नहर से नियमित सिंचाई का पानी मिलने के कारण किसानों को बेहतर उत्पादन मिल रहा है. यही वजह है कि जिले के कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर खजूर की उन्नत खेती अपना रहे हैं और इससे बेहतर आय भी अर्जित कर रहे हैं.

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खजूर की उन्नत खेती जालोर के किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का नया आधार बनकर उभर रही है. कम लागत, कम पानी और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसानों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि जिले की कृषि पहचान भी बदल रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खजूर की खेती का दायरा बढ़ता रहा और किसानों को तकनीकी व विपणन सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में जालोर देश के प्रमुख खजूर उत्पादक जिलों में शामिल होकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकता है.

भालनी और दाता गांव के किसानों ने शुरुआत में प्रयोग के तौर पर खजूर की खेती शुरू की थी, लेकिन अब यह उनकी आय का प्रमुख स्रोत बनती जा रही है. इन गांवों में खजूर के बगीचों का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसकी सफलता को देखकर आसपास के किसान भी इस खेती को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं. खजूर की उन्नत खेती अब जालोर में कृषि के नए मॉडल के रूप में उभर रही है.

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