न बड़ा शहर, न महंगी कोचिंग… सेल्फ स्टडी के दम पर मनीषा बनी कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा की महिला टॉपर

Last Updated:July 02, 2026, 14:59 IST
Jaipur Manisha Kumawat Success Story: जयपुर जिले के जोबनेर कस्बे की बेटी मनीषा कुमावत ने कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा 2026 में शानदार सफलता हासिल करते हुए प्रदेशभर में ऑल ओवर 9वीं रैंक प्राप्त की है. सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल किया. सीमित संसाधनों के बावजूद मनीषा ने किसी बड़े शहर या महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया. उन्होंने जोबनेर में रहकर शुरुआत में स्थानीय मार्गदर्शन लिया और बाद में पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी से की. नियमित पढ़ाई, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास, लगातार रिवीजन और मजबूत टाइम मैनेजमेंट उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बने. मनीषा की उपलब्धि ने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो छोटे कस्बों से भी प्रदेश स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा 2026 का अंतिम परिणाम जारी हो चुका है. इस परीक्षा में जयपुर जिले के जोबनेर कस्बे की बेटी मनीषा कुमावत ने शानदार सफलता हासिल की है. मनीषा ने इस परीक्षा में प्रदेशभर में ऑल ओवर 9वीं रैंक प्राप्त की है. सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने महिला वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया है. सीमित संसाधनों के बीच घर पर रहकर की गई तैयारी से मिली इस सफलता ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और लगातार मेहनत के सामने कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता.
मनीषा की सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए किसी बड़े शहर का रुख नहीं किया. उन्होंने अपने कस्बे जोबनेर में रहकर ही पढ़ाई की और शुरुआत में स्थानीय कोचिंग से मार्गदर्शन लिया. इसके बाद उन्होंने पूरी तरह सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया. नियमित पढ़ाई, विषयों की गहरी समझ, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास और लगातार रिवीजन को अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया. इसी रणनीति ने उन्हें प्रदेश की टॉप रैंकर्स की सूची में जगह दिलाई.
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान मनीषा ने टाइम मैनेजमेंट पर सबसे अधिक ध्यान दिया. उन्होंने रोजाना निर्धारित समय के अनुसार पढ़ाई की, प्रत्येक विषय पर समान रूप से ध्यान दिया और अपनी कमजोरियों को लगातार सुधारती रहीं. पढ़ाई के दौरान उन्होंने फोन से दूरी रखी और केवल अपने लक्ष्य पर फोकस किया. यही मनीषा की सफलता का आधार आक्र मूलमंत्र बना.
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महिला वर्ग में प्रथम स्थान हासिल कर मनीषा ने यह संदेश दिया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं होती. यदि सही दिशा, आत्मविश्वास और मेहनत हो तो छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी युवा प्रदेश स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं. मनीषा ने बताया कि तैयारी के दौरान वे किसी शादी समारोह या किसी सामाजिक कार्यक्रम में नहीं गई. पूरा ध्यान पढ़ाई पर रखा. इसके अलावा सोशल मीडिया से भी बहुत दूर रही.
मनीषा के पिता का कहना है कि उन्होंने शुरू से ही पढ़ाई को प्राथमिकता दी और कठिन परिस्थितियों में भी कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. वह हमेशा सरकारी नौकरी लगना चाहती थी. इसलिए हमने उसे कभी घर का काम नहीं करवाया. वह जिस तरह से तैयारी करती उसी तरह उसको अपने हाल पर छोड़ दिया. आज उसने इस परीक्षा में टॉप आकर हमारा नाम रोशन किया है.
मनीषा ने कहा कि आज जब अधिकांश अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों और महंगी कोचिंग पर निर्भर रहते हैं, लेकिन ये सब जरूरी नुकसान नहीं है. सही रणनीति और नियमित सेल्फ स्टडी के माध्यम से घर के एक कमरे से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. पढ़ाई के दौरान आने वाला आलस सबसे बड़ा दुश्मन होता है. इसे कभी हावी नहीं होने देना चाहिए.
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