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इस दातून से एक महीने के अंदर ठीक होंगी दांत से जुड़ी बीमारियां, श्रीकांत बेचते हैं 100 रुपये किलो

Last Updated:July 02, 2026, 22:54 IST

वह बताते हैं कि नियमित उपयोग से दांतों की सफाई बेहतर होती है और मसूड़ों की देखभाल में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को इसका उपयोग नियमित रूप से करना चाहिए, तभी इसका असर देखने को मिलता है.

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मुजफ्फरपुर: अगर आप भी लंबे समय से दांतों से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं और इलाज के बाद भी राहत नहीं मिल रही है, तो यह खबर आपके लिए दिलचस्प हो सकती है. मुजफ्फरपुर के गोविंदपुर निवासी श्रीकांत कुशवाहा एक ऐसे औषधीय पौधे का उपयोग करने का दावा कर रहे हैं, जिसे ग्रामीण इलाके में कठ सरइया और आयुर्वेद में बज्रदंती के नाम से जाना जाता है. श्रीकांत पिछले कई वर्षों से अपने बागान में करीब 400 से अधिक औषधीय पौधों का संरक्षण कर रहे हैं. उनका कहना है कि बज्रदंती के पौधे को वह बिहटा के जंगल से लाए थे और अब अपने बगीचे में इसकी खेती कर रहे हैं. उनके अनुसार, इस पौधे के डंठल को सुखाकर उसका पाउडर तैयार किया जाता है. यदि इस पाउडर से नियमित रूप से दांत साफ किए जाएं या इसके डंठल का दातून किया जाए, तो दांतों और मसूड़ों से जुड़ी कई सामान्य समस्याओं में लाभ मिल सकता है.

श्रीकांत का दावा है कि उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार में इसका इस्तेमाल किया, जहां उन्हें सकारात्मक परिणाम देखने को मिला. इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य लोगों को भी इसके बारे में जानकारी दी. आज वह इस पाउडर को करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध करा रहे हैं. उनका कहना है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक है और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से दातून के रूप में इसका उपयोग होता रहा है.

वह बताते हैं कि नियमित उपयोग से दांतों की सफाई बेहतर होती है और मसूड़ों की देखभाल में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को इसका उपयोग नियमित रूप से करना चाहिए, तभी इसका असर देखने को मिलता है.

आयुर्वेद में बज्रदंती को दंत स्वास्थ्य के लिए उपयोगी पौधों में गिना जाता है, लेकिन दांतों की गंभीर बीमारी, लगातार दर्द, सूजन, खून आना या संक्रमण जैसी समस्याओं में विशेषज्ञ दंत चिकित्सक से जांच और उपचार कराना जरूरी है. किसी भी घरेलू या पारंपरिक उपाय को इलाज का विकल्प मानने के बजाय सहायक उपाय के रूप में ही अपनाना चाहिए.

About the AuthorRajneesh Singh

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