ये है राजस्थान का सबसे अमीर गांव, आलीशान बंगला-लग्जरी लाइफ, ऐसे होती है करोड़ों की कमाई

Last Updated:July 05, 2026, 21:05 IST
Rajasthan Richest Village Rasisar : गांव का नाम लेते ही हम सबके मन में कच्ची-पक्की सड़कें, दूर-दूर तक फैले खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, मवेशी, नदी-नहर, जंगल और हरियाली की तस्वीरें मन-मस्तिष्क में उभरने लगती हैं. गांव में अमीरी, सुख सुविधा और लग्जरी लाइफ की बात जेहन में नहीं आती. इस धारण से उलट राजस्थान में एक ऐसा गांव है जहां के लोग हर साल करोड़ों रुपये टैक्स भरते हैं. हर घर आलीशान है. गांव के कोने-कोने में अमीरी झलकती है. इस गांव को राजस्थान का सबसे अमीर गांव माना जाता है. आइये जानते हैं कि यहां के लोगों की कमाई का जरिया क्या है?
राजस्थान का बीकानेर जिला ऐतिहासिक जिले में शुमार है. यह शहर अपनी प्राचीन हवेलियों, जूनागढ़ किले और स्वादिष्ट बीकानेरी भुजिया के लिए विश्व प्रसिद्ध है. इसी जिले के नोखा ब्लॉक में रासीसर गांव है जिसकी पहचान करोड़पतियों के गांव के रूप में है. इस गांव के लोग हर साल करोड़ों रुपये टैक्स भरते हैं. गांव बहुत बड़ा है. बिश्नोई समाज के लोग ज्यादा रहते हैं. पूरा गांव डिजिटल है. 10 स्कूल हैं.
रासीसर गांव पूरे राजस्थान में विकास और समृद्धि की मिसाल बन चुका है. आबादी 15 हजार से ज्यादा है. गांव में दो ग्राम पंचायतें हैं : रासीसर पुरोहितान और रासीसर बड़ा बास. दो सरपंच भी हैं. गांव ट्रांसपोर्ट का हब है. लगभग हर घर में वाहन है. गांव के कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास 200-300 वाहन हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे गांव में 15000 से ज्यादा ट्रक-ट्राले हैं. सैकड़ों बसें हैं. गांव की समृद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन को नोखा में अलग से डीटीओ ऑफिस (जिला परिवहन ऑफिस) खोल दिया है. डीटीओ ऑफिस का राजस्व वसूली का सालाना टारगेट 50 करोड़ रुपये के आसपास है.
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यह गांव आज से 20 साल पहले खेती पर निर्भर था लेकिन अब ट्रांसपोर्ट हब बन गया है. हर घर के सामने ट्रक-बस या कोई अन्य कॉमर्शियल वाहन खड़ा दिखाई देता है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई परिवार ऐसे हैं जो हर साल 15-20 ट्रक खरीदते हैं.<br />यह गांव आज से 20 साल पहले खेती पर निर्भर था लेकिन अब ट्रांसपोर्ट हब बन गया है. हर घर के सामने ट्रक-बस या कोई अन्य कॉमर्शियल वाहन खड़ा दिखाई देता है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई परिवार ऐसे हैं जो हर साल 15-20 ट्रक खरीदते हैं.
गांव में ज्यादातार मकान पक्के है. रासीगर गांव अब 10 से ज्यादा स्कूल हैं. आईपीए-इंजीनियर और डॉक्टर भी इस गांव के युवा बन रहे हैं. ट्रांसपोर्ट के कारोबार ने गांव की सूरत ही बदल दी है. मेहनत, व्यवसायिक सोच और एकता ने विकास की नई इबारत लिखी है.
गांव के लोग गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से सीधे संपर्क में रहते हैं. इन्हीं राज्यों-शहरों से यहां के लोग संपर्क करके अपना ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करते हैं.
गांव की सूरत बदलने में सबसे बड़ा हाथ यहां के मंडा परिवार का है. 1978 में इस परिवार ने ट्रांसपोर्ट बिजनेस की शुरुआत की. आज मंडा परिवार के पास 100 ट्रक-ट्रेलर और 25 बसें से ज्यादा बसें हैं. पूरा गांव ट्रांसपोर्ट के बिजनेस में अपनी तरक्की की कहानी खुद लिख रहा है.
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