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राजस्थान का अनोखा बालाजी मंदिर! जहां मेले में सिर्फ दर्शन ही नहीं, कुश्ती दंगल भी बनते हैं आस्था का हिस्सा

Last Updated:July 05, 2026, 21:31 IST

Balaji Mandir Mela: राजस्थान में स्थित यह अनोखा बालाजी मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और परंपराओं का भी प्रतीक माना जाता है. यहां हर वर्ष लगने वाले भव्य मेले में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस मेले की सबसे खास बात यह है कि धार्मिक आयोजनों के साथ पारंपरिक कुश्ती दंगल और विशाल रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया जाता है. जहां एक ओर पहलवान अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन करते हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश देते हैं. यही अनूठी परंपरा इस मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु भी इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं.

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सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना में भगवान हनुमान का एक प्राचीन मंदिर मौजूद है. बताया जाता है कि यह नीमकाथाना की स्थापना से भी अधिक पुराना है. इस हनुमान मंदिर को श्री खेड़ापति बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर सैकड़ों सालों से यहां के को लोगों की आस्था का केंद्र रहा है. खास बात ये है इस मंदिर का इतिहास किसी सामान्य धार्मिक स्थल जैसा नहीं हैं. इसकी स्थापना को लेकर भी एक रोचक कहानी है.

मंदिर के पुजारी शुभकरण जोशी ने बताया कि नीमकाथाना शहर की स्थापना से पहले यहां बड़े-बड़े टीले थे. इन टीलो के बीच एक विशालकाय बरगद का पेड़ हुआ करता था, जिसके नीचे साधु-संत तपस्या करते थे. बताया जाता है कि एक दिन बहुत सारे संत यहां तपस्या कर रहे थे तभी अचानक उनके सामने बालाजी की प्रतिमा प्रकट हुई. सभी संतो ने इसे चमत्कार माना और मंदिर की स्थापना करके इस स्थान को बड़ का खेड़ा नाम दिया. संतों ने यहां बालाजी की पूजा अर्चना करने के लिए पुजारी भी नियुक्त किया.

अब तक तीन बार बदला नाम मंदिर पुजारी शुभकरण जोशी ने बताया कि उनकी आठवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना व अन्य सेवा कार्य कर रही है. उन्होंने बताया कि इस स्थान को पहले बड़ का खेड़ा बालाजी कहते थे. उसके बाद लोगों ने इसे खेड़ा वाले बालाजी कहना शुरू कर दिया. अब मंदिर को श्रीखेड़ापति बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है. उन्होंने बताया कि यहां प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को धार्मिक अनुष्ठान अनुष्ठान व विशेष पूजा-अर्चना पूजा-अर्चना होती है.दिनभर भजन-कीर्तन और सुंदरकांड व हनुमान चालीसा के पाठ होते हैं.

मेले में होता है कुश्ती दंगलमंदिर पुजारी ने बताया कि यहां श्रद्धालु मंदिर में जात-जडुले, गठजोड़े की जात, मुंडन संस्कार और सवामणी कार्यक्रम करते हैं. हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बालाजी का मेला लगता है. इससे 11 दिन पहले ही धार्मिक आयोजन शुरू हो जाते हैं. बालाजी महाराज का विशेष श्रृंगार किया जाता है और शोभायात्रा निकाली जाती है. इसके अलावा मेले के दौरान कुश्ती दंगल सहित कई आयोजन भी होते हैं.

मंदिर में प्रति वर्ष लगता है रक्तदान शिविरइस मंदिर में अब हर साल मानव सेवा के लिए रक्तदान शिविर लगाया जाता है. समिति द्वारा अब तक 24 बार रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा चुका है. इस रक्तदान शिविर में केवल गांव के लोग ही नहीं बल्कि मंदिर में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु भी अपना रक्त दान करते हैं. गांव या आसपास के लोगों को रक्त की जरूरत पड़ने पर मंदिर समिति द्वारा ब्लड डोनेशन टीम के माध्यम से रक्त उपलब्ध करवाया जाता है.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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