दिल्ली-मुंबई छूटे पीछे… कर्मचारियों के औसत वेतन में देश में नंबर-1 बना जयपुर

Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के लिए एक बेहद शानदार और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार जयपुर देश में प्रति कर्मचारी सालाना औसत वेतन के मामले में पहले पायदान पर पहुंच गया है. इस मामले में जयपुर ने देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे बड़े महानगरों को भी काफी पीछे छोड़ दिया है. एनएसओ द्वारा जारी इस रिपोर्ट में 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 46 प्रमुख शहरों का सर्वेक्षण किया गया था. इस सर्वे के आर्थिक आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि जयपुर अब केवल पर्यटन का केंद्र नहीं बल्कि आर्थिक समृद्धि का भी नया हब बनकर उभर रहा है.
इस रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में भर्ती कर्मचारियों का औसत वार्षिक वेतन 2,32,597 रुपये दर्ज किया गया है जो देश के सभी 46 बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है. इसी सूची में राजस्थान का जोधपुर शहर 1,60,110 रुपये के साथ 16वें स्थान पर है जबकि कोचिंग सिटी के रूप में विख्यात कोटा शहर 1,21,804 रुपये के साथ 35वें स्थान पर रहा है. रोजगार देने के मामले में भी जयपुर ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश भर में छठा स्थान हासिल किया है. जयपुर में कुल व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या 4,84,873 है जो इसकी मजबूत व्यावसायिक गतिविधियों को दर्शाती है. इसके अलावा कामगारों और श्रमिकों की संख्या के मामले में भी जयपुर देश में छठे स्थान पर है जहां 10,15,884 श्रमिक कार्यरत हैं. प्रति कर्मचारी सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) के पैमाने पर जयपुर देश में 12वें पायदान पर है.
प्रति कर्मचारी औसत वार्षिक वेतन में जयपुर देश में नंबर-1
शहरऔसत वार्षिक वेतनरैंकजयपुर₹2,32,5971जोधपुर₹1,60,11016कोटा₹1,21,80435ग्वालियर₹88,85346
जयपुर ने दिल्ली मुंबई बेंगलुरु हैदराबाद जैसे बड़े शहरों को पीछे छोड़ दिया. रिपोर्ट में राजस्थान के अन्य बड़े शहरों की आर्थिक स्थिति का भी तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है. जहां जयपुर आर्थिक पैमानों पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है वहीं शिक्षा नगरी कोटा अधिकांश आर्थिक संकेतकों में काफी पिछड़ गया है. कोटा राजस्थान के शहरों में कई मामलों में अंतिम स्थान पर रहा है जिससे वहां के औद्योगिक और व्यावसायिक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हो रही है. दूसरी ओर सीमित औद्योगिक संसाधनों के बावजूद जोधपुर ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है. जोधपुर महिला स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों के मामले में पूरे राजस्थान प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है जो महिला सशक्तिकरण की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है.
रोजगार उपलब्ध कराने में भी मजबूत स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार जयपुर केवल वेतन के मामले में ही नहीं बल्कि रोजगार उपलब्ध कराने में भी देश के अग्रणी शहरों में शामिल है. रोजगार देने के मामले में जयपुर देशभर में छठे स्थान पर रहा. शहर में कुल 4,84,873 प्रतिष्ठान संचालित हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं. वहीं कामगारों की संख्या 10,15,864 दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जयपुर रोजगार का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.
उत्पादकता में 12वां स्थान
प्रति कर्मचारी उत्पादकता यानी प्रति कर्मचारी सकल मूल्य वर्धन (GVA) के आधार पर जयपुर देश में 12वें स्थान पर रहा. जयपुर का प्रति कर्मचारी GVA 2,23,170 रुपये दर्ज किया गया. हालांकि वेतन के मामले में शहर शीर्ष पर है, लेकिन उत्पादकता के पैमाने पर अभी भी शीर्ष 10 शहरों में जगह बनाने की चुनौती बनी हुई है. वहीं प्रति प्रतिष्ठान GVA के मामले में जयपुर 4,67,577 रुपये के साथ 18वें स्थान पर रहा.
महिला भागीदारी में सुधार की जरूरत
रिपोर्ट में महिला उद्यमिता और महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी का भी विश्लेषण किया गया है. महिला स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों के मामले में जयपुर 24.87 प्रतिशत के साथ 26वें स्थान पर रहा, जबकि जोधपुर 26.51 प्रतिशत के साथ जयपुर से आगे रहा. महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी जयपुर में 24.72 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे शहर को 24वां स्थान मिला. यह संकेत देता है कि आर्थिक विकास के साथ महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की अभी भी पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं.
जोधपुर और कोटा का प्रदर्शन
राजस्थान के अन्य प्रमुख शहरों में जोधपुर का प्रदर्शन कई आर्थिक संकेतकों पर बेहतर रहा. औसत वार्षिक वेतन के मामले में जोधपुर 1,60,110 रुपये के साथ 16वें स्थान पर रहा. महिला स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों में भी जोधपुर ने राजस्थान में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. दूसरी ओर कोटा अधिकांश आर्थिक मानकों पर पीछे दिखाई दिया. कोटा का औसत वार्षिक वेतन 1,21,804 रुपये रहा और उत्पादकता सहित कई श्रेणियों में उसका स्थान निचले पायदानों में दर्ज किया गया.
आईटी और रियल एस्टेट सेक्टर को मिला बढ़ावाआर्थिक विशेषज्ञों और रियल एस्टेट जानकारों का मानना है कि कर्मचारियों को अधिक वेतन मिलने का सीधा मतलब यह है कि शहर में उच्च मूल्यवर्धन वाले उद्योग विकसित हो रहे हैं. जयपुर में पारंपरिक व्यापार जैसे रत्न-आभूषण और पर्यटन के अलावा अब आधुनिक सेवा और स्टार्टअप केंद्र तेजी से पैर पसार रहे हैं. शहर में आईटी कंपनियों के नए कार्यालय खुलने से रियल एस्टेट क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा मिला है. इसके साथ ही वेयरहाउस जैसी बड़ी योजनाओं में निवेश बढ़ने के कारण कुशल मैनपावर की मांग तेजी से बढ़ी है. यही वजह है कि जयपुर अब टियर-2 शहरों में सबसे बड़े रोजगार केंद्र के रूप में उभर रहा है. यह नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा संकेत है कि जयपुर में औद्योगिक और व्यावसायिक बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ किया जाए.



