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मछली खाना है तो पहले जान लें ये बात! हर Fish से नहीं मिलता फायदा, कुछ पहुंचा सकती हैं नुकसान

Last Updated:July 06, 2026, 11:36 IST

मछली को प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन सभी मछलियां एक जैसी नहीं होतीं. कुछ मछलियों में मरकरी (पारा) की मात्रा अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में जानिए कौन-सी मछलियां सुरक्षित हैं, सप्ताह में कितनी बार मछली खानी चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

मछली को प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है, इसलिए यह सेहत के लिए फायदेमंद होती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि रोज किसी भी तरह की मछली खाई जाए. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के अनुसार, ज्यादातर वयस्कों के लिए सप्ताह में 2 से 3 बार मछली खाना पर्याप्त माना जाता है. इससे शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और हृदय भी स्वस्थ रहता है. हालांकि, सही मात्रा और सही प्रकार की मछली का चुनाव करना सबसे ज्यादा जरूरी है.

अगर आप सोचते हैं कि सभी मछलियां एक जैसी होती हैं, तो ऐसा नहीं है. सैल्मन, सार्डिन, हेरिंग और मैकेरल जैसी वसायुक्त मछलियों में ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक मात्रा में पाया जाता है, जो दिल और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है. वहीं, कुछ अन्य मछलियों में इसकी मात्रा कम होती है. इसलिए मछली खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि उसकी पौष्टिकता पर भी ध्यान देना चाहिए.

कुछ बड़ी और लंबे समय तक जीवित रहने वाली मछलियों में पारा (मरकरी) अधिक मात्रा में जमा हो जाता है. ऐसी मछलियों का बार-बार सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है. अधिक मरकरी तंत्रिका तंत्र पर असर डाल सकती है, जिससे याददाश्त कमजोर होना, हाथ-पैर सुन्न पड़ना और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए मछली का चुनाव हमेशा सोच-समझकर करना चाहिए.

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विशेषज्ञ कम मरकरी वाली मछलियां खाने की सलाह देते हैं. इनमें सैल्मन, सार्डिन, कॉड, पोलॉक, तिलापिया, झींगा और डिब्बाबंद टूना शामिल हैं. इन्हें सप्ताह में 2 से 3 बार खाना सुरक्षित माना जाता है. इन मछलियों से शरीर को प्रोटीन, विटामिन और ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में मिलता है. नियमित और संतुलित मात्रा में इनका सेवन करने से सेहत को कई लाभ मिल सकते हैं.

कुछ मछलियों में मरकरी (पारा) की मात्रा अधिक होती है. इनमें शार्क, स्वोर्डफिश, किंग मैकेरल और बिगआई टूना शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इन मछलियों का बार-बार सेवन नहीं करना चाहिए. यदि कभी खाएं भी, तो बहुत कम मात्रा में और सीमित अंतराल पर ही खाएं. इनका अधिक सेवन करने से शरीर में मरकरी जमा हो सकती है, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.

गर्भावस्था के दौरान मछली पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं होती. बल्कि कम मरकरी वाली मछलियों का सही मात्रा में सेवन फायदेमंद माना जाता है. इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड शिशु के दिमाग और आंखों के विकास में मदद करता है. हालांकि, अधिक मरकरी वाली मछलियों से बचना जरूरी है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को हमेशा सुरक्षित और कम मरकरी वाली मछलियों का ही चुनाव करना चाहिए.

बच्चों के शरीर और दिमाग के विकास के लिए भी मछली फायदेमंद मानी जाती है. हालांकि, उनकी उम्र के अनुसार इसकी मात्रा तय होनी चाहिए. छोटे बच्चों को कम और बड़े बच्चों को थोड़ी अधिक मात्रा में मछली दी जा सकती है. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के अनुसार, बच्चों को भी सप्ताह में करीब दो बार कम मरकरी (पारा) वाली मछली खिलाना लाभदायक माना जाता है.

अगर आप मछली खाना चाहते हैं, तो हमेशा ताजी और साफ मछली ही खरीदें. कोशिश करें कि कम मरकरी (पारा) वाली प्रजातियों का चुनाव करें और एक ही तरह की मछली बार-बार खाने के बजाय अलग-अलग विकल्प अपनाएं. संतुलित मात्रा में मछली खाने से शरीर को प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. सही मछली का चुनाव करने से इसके स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं और किसी तरह के जोखिम की आशंका भी कम रहती है.

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