Indian businessman Fake CIA agent: वो व्यापारी, जो फर्जी CIA एजेंट बनकर अरबों के घातक फाइटर जेट बेच आया

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वो व्यापारी, जो फर्जी CIA एजेंट बनकर अरबों के फाइटर जेट बेच आया
Last Updated:July 06, 2026, 16:09 IST
नटवरलाल के कारनामे आपने सुने होंगे. लेकिन यह उससे भी कई गुना आगे है. OCCRP की रिपोर्ट के मुताबिक- भारतीय मूल के व्यापारी गौरव श्रीवास्तव ने खुद को CIA एजेंट बताकर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो को अरबों डॉलर के फाइटर जेट बेच आया. उसके दोस्त ने जब राज खोला तो पूरी दुनिया दंग रह गई. भारतीय मूल के बिजनेसमैन पर गंभीर आरोप.
एक आम सा दिखने वाला शख्स खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का सीक्रेट एजेंट बताता है और देखते ही देखते एक देश के साथ अरबों डॉलर की डील फाइनल करने पहुंच जाता है! यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि भारतीय मूल के बिजनेसमैन गौरव श्रीवास्तव का कहानी है. ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की रिपोर्ट से ऐसा खुलासा हुआ है, जो चौंका देगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स ने अपने फर्जी रुतबे के दम पर इंडोनेशिया के मौजूदा राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो को ऐसा झांसा दिया कि हर कोई दंग है.
इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ गौरव के ही पुराने बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट ने किया है. अमेरिका की कोर्ट में दर्ज मुकदमों के अनुसार, गौरव का काम करने का तरीका बिल्कुल जेम्स बॉन्ड वाला था. वह बड़े-बड़े अधिकारियों से फोन पर बात करते हुए बड़े शान से खुद को CIA का आदमी बताता था. उसका यह सीक्रेट एजेंट वाला कार्ड इतना सटीक बैठा कि साल 2020 में उसे वाशिंगटन और जकार्ता में इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय की सबसे गुप्त और हाई-लेवल बैठकों में सीधे वीआईपी एंट्री मिल गई.
डिफेंस एग्रीमेंट तक साइन किए
गौरव की हिम्मत देखिए, उसने सिर्फ बैठकें नहीं कीं, बल्कि 2020 से 2022 के बीच इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय से पांच शुरुआती डिफेंस एग्रीमेंट तक साइन करवा लिए. उसने इस झूठ को सच साबित करने के लिए बाकायदा प्रबावो सुबियांतो के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन डील्स का ढिंढोरा भी पीटा. हालांकि, हकीकत यह थी कि इन कागजी समझौतों के आधार पर इंडोनेशियाई सरकार ने असल में एक भी गोली नहीं खरीदी.
क्या क्या डील कर आया
वह कोई बंदूक-राइफल नहीं, बल्कि 36 घातक F-15 फाइटर जेट्स, ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर और C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बेचने की महा-डील कर रहा था! सबसे मजे की बात यह है कि जिन 4 कंपनियों के जरिए वह ये अरबों डॉलर के सपने दिखा रहा था, उनका हथियारों की दुनिया से कोई लेना-देना ही नहीं था. वे सिर्फ कागजी कंपनियां थीं, जिन्हें बाद में टैक्स ना चुकाने पर बंद कर दिया गया. जब अमेरिका ने असली डील को मंजूरी दी, तो उसमें गौरव का कहीं नाम तक नहीं था.
गौरव ने अपने फर्जी CIA कनेक्शन का खौफ दिखाकर अपने ही पार्टनर नील्स ट्रोस्ट की कंपनी में 50% हिस्सेदारी मुफ्त में झटक ली. बात यहीं खत्म नहीं हुई; उसने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के भाई और अरसारी ग्रुप के चेयरमैन हाशिम से भी गहरी दोस्ती गांठ ली. फिर उसने बड़ी चालाकी से अपनी नई कंपनी के खजाने से हाशिम की कंपनी को करीब 425 करोड़ रुपये का भारी-भरकम लोन भी ट्रांसफर करवा दिया.
गौरव बोला- मनगढ़ंत है पूरी कहानी
जब यह पूरा रायता फैला, तो गौरव श्रीवास्तव ने सामने आकर खुद को पाक-साफ बता दिया. उनका कहना है कि यह CIA एजेंट वाली बात बिल्कुल मनगढ़ंत है और इसके पीछे उनके पुराने पार्टनर नील्स का ही शातिर दिमाग है. गौरव ने उलटा नील्स पर ही बम फोड़ते हुए याद दिलाया कि नील्स खुद कोई संत नहीं है, बल्कि रूसी तेल की हेराफेरी के चक्कर में ब्रिटेन और यूरोप से बैन हो चुका है! अब इस कहानी में असली विलेन कौन है, यह तो वक्त ही बताएगा.
About the Authorज्ञानेंद्र मिश्रDeputy News Editor
<strong>Gyanendra Kumar Mishra</strong> is a senior journalist with nearly <strong>20 years of experience</strong> in the media industry. He is currently associated with <strong> Hindi </strong>(hindi.new…और पढ़ें
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