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उदयपुर में बनेगा राजस्थान का पहला चंदन वन I udaipur news I rajasthan news

Last Updated:July 07, 2026, 12:32 IST

Chandan Van In Udaipur: उदयपुर में चंदन संरक्षण और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. कर्नाटक के चिक्कमगलुरू से पहुंचे 6 हजार चंदन पौधों से कालका माता क्षेत्र में 20 से 22 हेक्टेयर में चंदन वन विकसित किया जाएगा. इस परियोजना के तहत पर्यावरण संरक्षण के साथ क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित करने की योजना है.

उदयपुर का नया ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन, कालका माता में विकसित होगा चंदन वनZoom

उदयपुर. दक्षिण राजस्थान में चंदन की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना अब धरातल पर उतरने लगी है. कर्नाटक के चिक्कमगलुरू से 6 हजार चंदन के पौधे उदयपुर पहुंच चुके हैं. करीब तीन दिन की यात्रा के बाद पहुंचे इन पौधों को फिलहाल कालका माता नर्सरी में रखा गया है, ताकि वे यहां के मौसम और वातावरण के अनुकूल हो सकें, इसके बाद सप्ताह के अंत तक इनका पौधारोपण शुरू किया जाएगा. उप वन संरक्षक (डीएफओ) मुकेश सैनी ने बताया कि पौधों को तीन-चार दिन तक नर्सरी में सुरक्षित रखा जाएगा. कालका माता क्षेत्र में पहले से प्राकृतिक रूप से चंदन के पेड़ मौजूद हैं. इसी वजह से यहां 20 से 22 हेक्टेयर क्षेत्र में चंदन वन विकसित किया जाएगा. इस परियोजना के लिए करीब 50 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित है.

परियोजना के तहत केवल चंदन के पौधे ही नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र को ईको-टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए ट्रैक, आकर्षक प्रवेश द्वार और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी तैयार की जाएंगी. पौधों की अच्छी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लैंटाना जैसी हानिकारक झाड़ियों को भी हटाया जा रहा है. इस योजना की शुरुआत दक्षिण भारत दौरे के बाद हुई. वहां चंदन संरक्षण और उत्पादन के मॉडल का अध्ययन करने के बाद राजस्थान में भी इसी तरह के चंदन वन विकसित करने की योजना बनाई गई. इसके तहत मेवाड़-वागड़ क्षेत्र के उदयपुर, सिरोही और बांसवाड़ा में चंदन वन तैयार किए जा रहे हैं. उदयपुर में इसकी शुरुआत कालका माता नर्सरी से हो रही है.

वन विभाग का मानना है कि चंदन वन विकसित होने के बाद उदयपुर को एक नया और अनूठा ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन मिलेगा. शहर में पहले से बोटेनिकल गार्डन, मेवाड़ जैव विविधता पार्क, बटरफ्लाई पार्क, लव-कुश वाटिका और नगर वन जैसे प्रकृति आधारित पर्यटन स्थल मौजूद हैं. अब चंदन वन इनके बीच एक नई पहचान बनाएगा, जहां पर्यटक चंदन की जैव विविधता, उसके संरक्षण और महत्व को करीब से जान सकेंगे. यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम होगी, बल्कि भविष्य में पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी. साथ ही दक्षिण राजस्थान में चंदन की खेती और संरक्षण को नई पहचान मिलने की उम्मीद है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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