Health: रातभर पढ़ाई पड़ सकती है भारी! डॉक्टर ने बताया फेलियर का कारण, छात्रों को दिया DOSE फॉर्मूला

Last Updated:July 08, 2026, 08:02 IST
Dr. Suresh Pandey Student Health Awareness Tips: कोटा के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पांडे ने कोचिंग छात्रों में बढ़ती आंखों की समस्याओं और मानसिक तनाव को लेकर चिंता जताई है. उनके अनुसार, देर रात तक मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप पर पढ़ाई करने से डिजिटल आई स्ट्रेन और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. कम नींद के कारण याददाश्त प्रभावित होती है और परीक्षा में प्रदर्शन भी कमजोर पड़ सकता है. उन्होंने छात्रों को रात में जल्दी सोने, नियमित व्यायाम करने, धूप में समय बिताने और पढ़ाई के बीच ब्रेक लेने की सलाह दी. साथ ही तनाव कम करने के लिए DOSE फॉर्मूला अपनाने पर जोर दिया.
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कोटा. शिक्षा की नगरी कोटा में देशभर से लाखों छात्र-छात्राएं इंजीनियर और डॉक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं. लेकिन सफलता की इस दौड़ और बदलती जीवनशैली का सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ रहा है. कोटा के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. सुरेश पांडे ने कोचिंग छात्रों में तेजी से बढ़ रही आंखों की समस्याओं और मानसिक तनाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उनके अनुसार, देर रात तक जागकर पढ़ाई करने की आदत छात्रों को कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों की ओर धकेल रही है, जिसका असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा परिणाम पर भी पड़ रहा है.
पिछले दो दशकों से कोचिंग छात्रों का इलाज कर रहे डॉ. सुरेश पांडे ने बताया कि देर रात तक स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल स्क्रीन पर पढ़ाई करने से छात्रों में डिजिटल आई स्ट्रेन तेजी से बढ़ रहा है. इसे चिकित्सा भाषा में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहा जाता है. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन (ड्राई आई), जलन, भारीपन, सिरदर्द और आंखों में दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. उन्होंने कहा कि कई छात्र रात के शांत माहौल का फायदा उठाने के लिए सुबह 4 बजे तक जागते हैं, जबकि यह शरीर की प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया के विपरीत है.
कम नींद बन रही असफलता की वजह
डॉ. पांडे के अनुसार, देर रात तक जागने से मस्तिष्क में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव कम हो जाता है. इससे शरीर की स्लीप साइकिल पूरी तरह प्रभावित होती है. उन्होंने बताया कि लगातार नींद की कमी (क्रॉनिक स्लीप डेप्रिवेशन) के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र भी परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते. पर्याप्त नींद नहीं मिलने से शॉर्ट-टर्म मेमोरी, लॉन्ग-टर्म मेमोरी में प्रभावी रूप से परिवर्तित नहीं हो पाती. इसका परिणाम यह होता है कि छात्र पढ़ा हुआ याद नहीं रख पाते और परीक्षा के समय उसे सही ढंग से याद (रिकॉल) नहीं कर पाते.
कोटा में 40 प्रतिशत छात्र मायोपिया से प्रभावित
डॉ. पांडे ने बताया कि बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और धूप में पर्याप्त समय न बिताने के कारण कोटा में लगभग 40 प्रतिशत छात्र मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) से प्रभावित हैं. यह समस्या लगातार बढ़ रही है और भविष्य में गंभीर रूप ले सकती है.
तनाव दूर रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
डॉ. सुरेश पांडे ने छात्रों को स्वस्थ रहने और बेहतर प्रदर्शन के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. रात 10 या 11 बजे तक सोने की कोशिश करें और सुबह 3 या 4 बजे उठकर पढ़ाई करें. इससे शरीर की जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) संतुलित रहती है. लगातार कई घंटे पढ़ने के बजाय 2-2 घंटे के सत्र में पढ़ाई करें और बीच-बीच में छोटा ब्रेक लें. रोजाना 10 से 15 मिनट धूप में रहें और समय मिलने पर प्रकृति के बीच टहलें. इससे आंखों में डोपामाइन का स्तर बढ़ता है, जो मायोपिया का खतरा कम करने में मदद करता है.रोज व्यायाम करें: कम से कम 30 मिनट योग, व्यायाम या प्राणायाम करें, ताकि शरीर और मस्तिष्क दोनों स्वस्थ रहें.
तनाव कम करने के लिए अपनाएं ‘DOSE’ फॉर्मूला
डॉ. पांडे ने बताया कि मानसिक तनाव कम करने के लिए शरीर में चार महत्वपूर्ण “हैप्पी हार्मोन” का संतुलित स्राव होना जरूरी है. उन्होंने इसे DOSE फॉर्मूला नाम दिया है.
D- Dopamine (डोपामाइन)O- Oxytocin (ऑक्सीटोसिन)S- Serotonin (सेरोटोनिन)E- Endorphin (एंडोर्फिन)
उन्होंने कहा कि “मूवमेंट ही मेडिसिन है.” यदि छात्र रोजाना कम से कम आधा घंटा योग, व्यायाम या प्राणायाम करते हैं तो ये चारों हार्मोन संतुलित मात्रा में निकलते हैं. इससे मानसिक तनाव कम होता है, अच्छी नींद आती है और पढ़ाई में एकाग्रता के साथ याददाश्त भी बेहतर होती है.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



