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‘भविष्य में कुछ भी हो सकता है…’ क्‍या फिर एक होंगे उद्धव और एकनाथ शिंदे, फडणवीस के मंत्री ने दिया बड़ा संकेत

Last Updated:July 09, 2026, 23:31 IST

महाराष्‍ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री ओर शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने अपने एक बयान से राजनीतिक भूचाल ला दिया है. प्रताप सरनाईक ने एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के एक होने के सवाल का ऐसा जवाब दिया है, जिसने सूबे की राजनीतिक में नई बहस शुरू कर दी है. क्‍या है प्रताप सरनाईक का जवाब और महाराष्‍ट्र की राजनीति में मायने जानने के लिए पढ़ें आगे…क्‍या फिर एक होंगे उद्धव और एकनाथ शिंदे, फडणवीस के मंत्री ने दिया बड़ा संकेतZoomमहाराष्‍ट्र सरकार के एक मंत्री के बयान ने सूबे में सियासी भूचाल ला दिया है.

Maharashtra Politics: महाराष्‍ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के एक बयान ने सूबे की राजनीति में भूचाल ला दिया है. इस बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्‍या उपमुख्‍यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे फिर एक हो सकते हैं. दरअसल, कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक से बीते दिनों एक सवाल पूछा गया था कि क्या भविष्य में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना के दोनों गुट फिर से एक हो सकते हैं.

इस सवाल के जवाब में उन्‍होंने सीधा जवाब देने के बजाय कहा कि भविष्य में कुछ भी हो सकता है. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर भी खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विधान भवन स्थित कार्यालय में हुई मुलाकात ने राजनीतिक माहौल को बेहद गर्म कर दिया है.

राजनीति में कोई हमेशा दोस्त या दुश्मन नहीं होता: प्रताप सरनाईक ने बातचीत में कहा कि राजनीति में रिश्ते हमेशा एक जैसे नहीं रहते हैं. नेताओं के बीच के व्यक्तिगत संबंध कई बार राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होते हैं. उन्‍होंने कहा कि राजनीति में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है. महाराष्ट्र की राजनीति की अपनी एक परंपरा रही है, जहां अलग-अलग दलों के नेता निजी कार्यक्रमों और पारिवारिक आयोजनों में एक-दूसरे से मिलते-जुलते रहे हैं. इसलिए किसी नेता का दूसरे नेता से मिलना असामान्य नहीं माना जाना चाहिए.
संजय राउत पर प्रताप सरनाईक ने साधा निशाना: सरनाईक ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की आलोचना पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि शरद पवार का मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में जाना कोई गलत बात नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर शरद पवार शिंदे के ऑफिस में बैठे तो इसमें क्या गलत है? संजय राउत को इससे क्या परेशानी है? सरनाईक ने यहां तक कहा कि भविष्य में अगर उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और एकनाथ शिंदे एक ही गाड़ी में दिखाई दें तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक राजनीति में ऐसे बदलाव होते रहते हैं और रिश्तों में हमेशा कटुता नहीं रहती है.
पवार-शिंदे की मुलाकात के बाद बढ़ा विवाद: पूरा विवाद बुधवार को शुरू हुआ, जब शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर आयोजित एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक में शामिल होने विधान भवन पहुंचे थे. बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में जाकर अपनी पार्टी के विधायकों से भी मुलाकात की. इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आते ही विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी के भीतर विवाद शुरू हो गया. खासकर शिवसेना (यूटीबी) ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई थी.
पूरे विवाद पर संजय राउत ने क्या कहा: शिवसेना (यूटीबी) सांसद संजय राउत ने इस मुलाकात को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने एकनाथ शिंदे के लिए फिर से आपत्तिजनक शब्‍दों का इस्‍तेमाल किया. उन्‍होंने कहा कि ऐसे नेता के कार्यालय में जाकर बैठक करना विपक्ष की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है. संजय राउत का कहना था कि जिस नेता के खिलाफ पहले से राजनीतिक लड़ाई चल रही हो, उस नेता से सार्वजनिक तौर पर मिलना जनता के बीच गलत संदेश देता है. उन्होंने कहा कि उनका दल ऐसे कदमों का समर्थन नहीं करता है.
एनसीपी (एसपी) ने किया पलटवार: संजय राउत के बयान के बाद शरद पवार की पार्टी ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई. एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने संजय राउत पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है. पार्टी का कहना था कि जब शरद पवार पहले उद्धव ठाकरे या अन्य नेताओं से बंद कमरे में मुलाकात करते थे, तब उसे राजनीतिक समझदारी बताया जाता था. लेकिन अब वही काम उपमुख्यमंत्री शिंदे के साथ होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं. पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि अखबारों में तीखे लेख लिखना और जमीन पर राजनीति करना दोनों अलग बातें हैं. लोकतंत्र में नेताओं को कई बार अपने विरोधियों से भी बातचीत करनी पड़ती है.

2022 में क्‍यों टूटी थी शिवसेनामहाराष्ट्र की राजनीति में जून 2022 में उस समय बड़ा भूचाल आया था, जब एकनाथ शिंदे बड़ी संख्या में शिवसेना विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे. इसके बाद एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने. बाद में चुनाव आयोग ने भी शिंदे गुट को असली शिवसेना और पार्टी का ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न दे दिया. उधर, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) अलग राजनीतिक पार्टी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरी. हालांकि हाल के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने नौ सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में उन नौ सांसदों में से छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए.

क्या बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण?फिलहाल शिवसेना के दोनों गुटों के एक होने को लेकर कोई आधिकारिक बातचीत सामने नहीं आई है. लेकिन प्रताप सरनाईक का ‘भविष्य में कुछ भी हो सकता है’ वाला बयान ऐसे समय आया है, जब महा विकास अघाड़ी के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरण बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है. अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति भी तैयार हो रही है.

About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

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