लोहागढ़ किले में छिपा है सदियों पुराना शिव मंदिर, जहां पहले भगवान को भोग लगाकर राजपरिवार करता था भोजन

Last Updated:August 05, 2026, 09:42 IST
भरतपुर के ऐतिहासिक लोहागढ़ किले में स्थित प्राचीन शिव मंदिर आज भी अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए है. मान्यता है कि कभी राजपरिवार के लिए बनने वाला भोजन सबसे पहले भगवान महादेव को अर्पित किया जाता था, इसके बाद ही उसे ग्रहण किया जाता था. सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी मंदिर की खास पहचान बनी हुई है.
भरतपुर. ऐतिहासिक लोहागढ़ किला अपनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और गौरवशाली इतिहास के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. लेकिन इसी किले के भीतर एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है, जिसके बारे में आज की नई पीढ़ी बहुत कम जानती है. किले के पूर्वी छोर पर स्थित यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने साथ एक अनोखी और गौरवशाली परंपरा को भी संजोए हुए है. यह प्राचीन शिव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं के विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. किले के बीच स्थित यह मंदिर इतिहास के कई अहम पलों का साक्षी रहा है. यह मंदिर काफी बरसों पुराना है, मंदिर की बनावट और इसकी प्राचीनता यह दर्शाती है कि उस समय धार्मिक आस्था को जीवन में विशेष स्थान दिया जाता था.
मंदिर के पुजारी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पहले राजपरिवार के लिए तैयार होने वाला भोजन सीधे महल में नहीं ले जाया जाता था. शाही रसोई में बनने वाला भोजन सबसे पहले इसी शिव मंदिर में भगवान महादेव को अर्पित किया जाता था. पूजा-अर्चना के बाद ही उस भोजन को प्रसाद के रूप में स्वीकार किया जाता था और फिर उसे राजपरिवार द्वारा ग्रहण किया जाता था. इस परंपरा से यह स्पष्ट होता है कि उस समय राजघराने में धार्मिक आस्था और परंपराओं का कितना महत्व था भगवान को अर्पित किए बिना भोजन ग्रहण न करना उस दौर की संस्कृति और विश्वास को दर्शाता है. यह परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थी बल्कि यह शाही जीवनशैली का भी एक अहम हिस्सा थी.
आज के समय में भले ही यह परंपरा उसी रूप में नहीं निभाई जाती हो, लेकिन यह मंदिर अब भी अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह हर सोमवार और सावन के महीने में स्थानीय लोग और पर्यटक यहां आकर न केवल भगवान शिव के दर्शन करते हैं. बल्कि इस अनोखी परंपरा के बारे में जानकर अतीत से भी जुड़ते हैं. भरतपुर का लोहागढ़ किला अपने भीतर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर रखे हुए हैं.और आज भी इतिहास आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण है. जो भरतपुर की सांस्कृतिक विरासत को और भी समृद्ध बनाता है. यह लोग दर्शन करने और घूमने आते है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
August 05, 2026, 09:42 IST



