सहारनपुर के हैंडमेड फर्नीचर पर टूट पड़े खरीदार, 500 से 50 हजार तक बिक रहे प्रोडक्ट्स

Last Updated:August 05, 2026, 10:14 IST
Saharanpur Wooden Furniture Demand: जयपुर के जवाहर कला केंद्र में चल रहे उमंग सिल्क एक्सपो में सहारनपुर के नक्काशीदार वुडन फर्नीचर की भारी मांग है. शीशम और सागौन की लकड़ी पर की गई हाथ की नक्काशी के कारण यह फर्नीचर काफी टिकाऊ और आकर्षक होता है. जयपुर के ग्राहक और स्थानीय व्यापारी 500 से 50,000 रुपये तक के झूले, सोफा सेट और डेकोर आइटम्स बड़े पैमाने पर खरीद रहे हैं. इससे उत्तर प्रदेश के कारीगर जयपुर के ट्रेड फेयर्स से हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं और सहारनपुर का हस्तशिल्प उद्योग नई ऊंचाइयों को छू रहा है.
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Jaipur: जयपुर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सांगानेरी प्रिंटिंग, ज्वैलरी और ब्लू पॉटरी जैसे हस्तशिल्प के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. गुलाबी नगरी के लोग कला और हस्तशिल्प की परख अच्छी तरह समझते हैं. यही वजह है कि यहां केवल स्थानीय उत्पाद ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों के हैंडमेड प्रोडक्ट्स की भी जबरदस्त मांग रहती है. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का विश्व प्रसिद्ध लकड़ी का फर्नीचर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. जयपुर के जवाहर कला केंद्र (JKK) में आयोजित उमंग सिल्क एक्सपो फेयर में सहारनपुर के कारीगर अपने बेहतरीन और नक्काशीदार वुडन क्राफ्ट्स लेकर पहुंचे हैं, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है.
स्थानीय मीडिया (लोकल-18) से बातचीत में सहारनपुर के कारीगर गुड्डू कुमार ने बताया कि सहारनपुर फर्नीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह हाथों से तैयार किया जाता है. इसमें मशीनों का न्यूनतम इस्तेमाल होता है और बारीक नक्काशी की जाती है. घर की सजावट, किचन वेयर, गार्डन फर्नीचर, इनडोर और आउटडोर के लिए सहारनपुर में हर प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इस फर्नीचर में शीशम, सागौन (टीक) और नीम जैसी बेहद मजबूत लकड़ियों का इस्तेमाल होता है, जिससे ये सालों-साल खराब नहीं होते हैं.
2 से 3 साल की मेहनत और ज़ीरो वेस्टेज तकनीकइस उद्योग के पीछे की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लकड़ी को इस्तेमाल के लायक बनाने में ही 2 से 3 साल का समय लग जाता है. गीली लकड़ी को प्राकृतिक रूप से सुखाया जाता है ताकि उसमें दरारें न पड़ें. इसके बाद कटिंग, हाथ से तराशने और पॉलिशिंग का काम बेहद बारीकी से किया जाता है. सहारनपुर में लकड़ी का कोई भी टुकड़ा बर्बाद नहीं किया जाता, छोटे से छोटे टुकड़े से भी किचन के सामान या सजावटी वस्तुएं बना ली जाती हैं.
जयपुर में झूलों और सोफा सेट की जबरदस्त मांगजयपुर के लोग कला प्रेमी हैं और वे गुणवत्ता के लिए सही कीमत देने से नहीं हिचकिचाते. जवाहर कला केंद्र में 500 रुपये के छोटे गिफ्ट आइटम्स से लेकर 50,000 रुपये तक के बड़े नक्काशीदार झूले, ड्रेसिंग टेबल, सोफा सेट, डाइनिंग टेबल और फ्लावर पॉट्स बिक्री के लिए उपलब्ध हैं. जयपुर के आम ग्राहकों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारी भी इस फर्नीचर को थोक में खरीदते हैं और अपने शोरूम्स के जरिए अच्छा मुनाफा कमाते हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस हस्तकला से सहारनपुर के हजारों परिवारों को स्थायी रोजगार मिला हुआ है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 05, 2026, 10:14 IST



