Rajasthan

Agriculture News: खेती की लागत घटानी है तो अपनाएं प्राकृतिक खेती, जोबनेर में किसानों को बताए कमाई बढ़ाने के गुर

Last Updated:August 10, 2026, 10:23 IST

Jaipur Agriculture News: जोबनेर में आयोजित राज्य स्तरीय कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी. रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है और उत्पादन लागत बढ़ रही है. विशेषज्ञों ने जीवामृत, बीजामृत, पलवार, वर्मी कम्पोस्ट और हरित खाद के प्रयोग पर जोर दिया. खेती के साथ पशुपालन को जोड़ने से किसानों की लागत नियंत्रित होगी और उनकी आय में भारी बढ़ोतरी होगी.

ख़बरें फटाफट

Amazon Prime DayTop Deals Inside

Jaipur: खेती-किसानी में लगातार बढ़ती उत्पादन लागत आज देश भर के किसानों के लिए एक गंभीर और सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है. महंगे रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से जहां एक तरफ किसानों का बजट बिगड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय में मिट्टी की प्राकृतिक सेहत पर भी बेहद बुरा असर पड़ रहा है. ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक कम लागत, टिकाऊ और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आ रही है.

हाल ही में जोबनेर में किसानों के लिए एक विशेष राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में पहुंचे वरिष्ठ कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय संसाधनों का बेहतर प्रयोग करके किसान बाहरी इनपुट पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकते हैं.

प्राकृतिक खेती के मुख्य घटक: जीवामृत, बीजामृत और पलवारकार्यक्रम के दौरान डॉ. रोशन चौधरी ने प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों पर विशेष जोर दिया. उन्होंने किसानों को बीजामृत, जीवामृत और पलवार (मल्चिंग) के वैज्ञानिक महत्व को समझाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती का उद्देश्य केवल रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों को हटाना मात्र नहीं है, बल्कि खेत में मौजूद स्थानीय जैविक संसाधनों का सही इस्तेमाल करके मिट्टी की प्राकृतिक उत्पादन क्षमता को फिर से जीवित करना है. राजस्थान के कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे. उन्होंने किसानों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि किसानों को केवल फसल उत्पादन पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए, बल्कि प्राकृतिक रूप से उगाए गए उत्पादों के बेहतर विपणन और ब्रांडिंग पर भी विशेष रूप से ध्यान देना आवश्यक है.

मिट्टी की बिगड़ती सेहत और बढ़ती लागत का चक्रप्रशिक्षण में शामिल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि रासायनिक इनपुट का अत्यधिक उपयोग मिट्टी में मौजूद मित्र सूक्ष्मजीवों और जरूरी पोषक तत्वों के संतुलन को पूरी तरह नष्ट कर देता है. जब रासायनिक उर्वरकों के ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता घटने लगती है, तो किसानों को हर साल अधिक फसल लेने के लिए और ज्यादा खाद डालनी पड़ती है. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ती चली जाती है और कुछ वर्षों बाद जमीन अनुपजाऊ हो जाती है. प्राकृतिक खेती अपनाकर इस नुकसान से बचा जा सकता है.

वर्मी कम्पोस्ट और हरित खाद से लौटेंगे पोषक तत्वडॉ. कमलेश कुमार शर्मा ने वर्मी कम्पोस्ट और हरित खाद के उपयोग के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इनके प्रयोग से मिट्टी में आवश्यक सूक्ष्म और स्थूल पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति हो जाती है. इससे भूमि की उत्पादकता को लंबे समय तक बिना किसी दुष्प्रभाव के बनाए रखा जा सकता है. किसानों को खेत के कचरे को फेंकने के बजाय उससे कम्पोस्ट बनाकर उपयोग करना चाहिए.

खेती और पशुपालन के संगम से बढ़ेगी किसानों की आयविशेषज्ञों ने बताया कि खेती और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं. प्राकृतिक खेती में पशुधन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योंकि गोबर और गोमूत्र से ही जीवामृत और बीजामृत तैयार किए जाते हैं. जब किसान फसल उत्पादन के साथ पशुपालन को जोड़ते हैं, तो उनका इनपुट खर्च शून्य के करीब पहुंच जाता है और कुल मुनाफा दोगुना हो जाता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

और पढ़ेंLocation :

Jaipur,Jaipur,Rajasthan

First Published :

August 10, 2026, 10:23 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj