वैभव सूर्यवंशी से लेकर अभिषेक शर्मा तक… 7 लेफ्ट हैंड क्रिकेटर्स, जो बन चुके हैं भारतीय क्रिकेट का फ्यूचर

Last Updated:August 13, 2026, 21:39 IST
7 left hand cricketers Indian cricket future: आज के दौर में टीम इंडिया में लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों का दबदबा और क्रेज पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है. जब मैदान पर कोई वामहस्त बल्लेबाज क्रीज पर उतरता है, तो गेंदबाजों की रणनीति से लेकर कप्तान की फील्डिंग तक सब कुछ बदल जाता है. वैभव सूर्यवंशी जैसे ‘जेन-अल्फा’ के सबसे युवा सितारे से लेकर ऋषभ पंत और यशस्वी जायसवाल जैसे इंटरनेशनल क्रिकेट में गदर मचा रहे स्थापित दिग्गजों तक.आज भारतीय क्रिकेट के पास ऐसे लेफ्ट-हैंडर खिलाड़ियों की एक बेहद आक्रामक फौज मौजूद है, जो विरोधी टीमों के पसीने छुड़ा देती है.
वर्ष 2011 में जन्मे बिहार के ओपनर वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) इस लिस्ट के सबसे युवा और उभरते हुए नाम हैं. ‘जेन-अल्फा’ पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले वैभव ने इतनी कम उम्र में क्रिकेट के मैदान पर जो आक्रामकता दिखाई है, उसने सभी खेल विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है. अपनी निडर और विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर उन्होंने घरेलू स्तर और आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करके अपनी एक अलग पहचान बनाई है. इतनी कम उम्र में बाएं हाथ से सहजता के साथ लंबे शॉट्स खेलने का उनका हुनर यह साबित करता है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बहुत ही सुरक्षित और चमकदार हाथों में है.
वर्ष 2000 में जन्मे पंजाब के डायनेमिक खिलाड़ी अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) आज की टी20 और सफेद गेंद की क्रिकेट के सबसे खतरनाक बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाजों में से एक माने जाते हैं. मैदान में आते ही विपक्षी गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना उनकी सबसे बड़ी ताकत है. वे केवल बल्ले से ही गदर नहीं मचाते, बल्कि अपनी बाएं हाथ की ऑर्थोडॉक्स स्पिन गेंदबाजी से भी टीम को अहम मौकों पर सफलता दिलाते हैं. उनका यह ऑलराउंड प्रदर्शन उन्हें भारतीय टीम के लिए एक बेहद मूल्यवान और संतुलित विकल्प बनाता है.
वर्ष 2001 में जन्मे यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) की कहानी भारतीय क्रिकेट की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक है. मुंबई के तंबू में रहने से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने का उनका सफर उनकी लगन और प्रतिभा का प्रमाण है. वर्ष 2023 में अपने डेब्यू टेस्ट मैच में ही वेस्टइंडीज के खिलाफ 171 रनों की मैराथन पारी खेलकर उन्होंने दुनिया को बता दिया था कि वे लंबे समय तक राज करने आए हैं. बाएं हाथ से गेंद को टाइम करने की उनकी काबिलियत और क्रीज पर धैर्य बनाए रखने की क्षमता उन्हें अपनी पीढ़ी का सबसे खास सलामी बल्लेबाज बनाती है.
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वर्ष 2002 में हैदराबाद की सरजमीं से उभरे तिलक वर्मा (Tilak Varma) अपनी शैली और खूबसूरत स्ट्रोकप्ले के लिए जाने जाते हैं. मध्यक्रम में बाएं हाथ से बल्लेबाजी करते हुए मैदान के हर कोने में खाली जगह (गैप्स) तलाशना और शांति से पारी को संभालना उनकी सबसे बड़ी खासियत है. घरेलू क्रिकेट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्होंने बहुत कम समय में खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक परिपक्व और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है. मुश्किल परिस्थितियों में भी उनका शांत स्वभाव उन्हें टीम के लिए संकटमोचक बनाता है.
झारखंड से ताल्लुक रखने वाले ईशान किशन (Ishan Kishan) एक ऐसे वामहस्त विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जिनके क्रीज पर आते ही विपक्षी कप्तान की रणनीति बदल जाती है. वे किसी भी गेंदबाज को जमने का मौका नहीं देते और पहली ही गेंद से कड़ा प्रहार करने का हौसला रखते हैं. सफेद गेंद के क्रिकेट में दोहरा शतक जड़ने का कारनामा कर चुके ईशान की पावर-हिटिंग और चीते जैसी विकेटकीपिंग उन्हें इस समय देश के सबसे पहचाने जाने वाले और पसंदीदा साउथपॉ खिलाड़ियों की कतार में खड़ा करती है.
वर्ष 1997 में जन्मे ऋषभ पंत (Rishabh Pant) आज विश्व क्रिकेट के सबसे चर्चित और सम्मानित बाएं हाथ के विकेटकीपर-बल्लेबाजों में से एक हैं. टेस्ट क्रिकेट हो, वनडे हो या टी20—ऋषभ ने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी, रिवर्स स्वीप्स और अनूठे शॉट्स से मैच का पासा पलटने की कला में महारत हासिल की है. ऑस्ट्रेलिया की गाबा फतेह से लेकर अनगिनत यादगार पारियों तक, उन्होंने हर प्रारूप में यह साबित किया है कि जब बात दबाव में मैच जिताने की आती है, तो बाएं हाथ की यह ताकत दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त कर सकती है.
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से आने वाले और 1997 में जन्मे रिंकू सिंह (Rinku Singh) आज के समय में ‘बेस्ट फिनिशर’ का दूसरा नाम बन चुके हैं. आईपीएल के एक ही ओवर में पांच लगातार छक्के जड़कर इतिहास रचने वाले रिंकू ने अपने मजबूत इरादों से खुद को एक इंटरनेशनल स्टार के रूप में ढाला है. मैच के अंतिम ओवरों में बाएं हाथ से बड़े-बड़े छक्के लगाने की उनकी अद्वितीय क्षमता और दबाव के क्षणों में भी चेहरे पर मुस्कान बनाए रखना, उन्हें करोड़ों फैंस का चहेता बनाता है.
मॉडर्न क्रिकेट के रणनीतिक ढांचे में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भूमिका केवल व्यक्तिगत रन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी टीम के संतुलन को बदल देती है. जब मैदान पर दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाजों (Right-Left Combination) की जोड़ी क्रीज पर मौजूद होती है, तो विपक्षी गेंदबाजों को अपनी लाइन और लेंथ में बार-बार बदलाव करना पड़ता है. इससे कप्तान को फील्डिंग सेट करने में कठिनाई होती है और गेंदबाजों के नो-बॉल व वाइड फेंकने की संभावना बढ़ जाती है. भारतीय टीम प्रबंधन आज इसी रणनीति के तहत अपनी टीम में बाएं हाथ के खिलाड़ियों को तरजीह दे रहा है.
क्रिकेट के मैदान पर बाएं हाथ के बल्लेबाजों का एक सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि वे लेग-स्पिनरों और ऑफ-स्पिनरों के खिलाफ आसानी से बड़े शॉट्स खेल पाते हैं. गेंद की घूमती हुई दिशा अक्सर उनके बल्ले की रेंज में आ जाती है, जिससे वे आसानी से बाउंड्री के पार पहुंचा देते हैं. वैभव सूर्यवंशी से लेकर रिंकू सिंह और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ी मिड-विकेट और काउ-कॉर्नर के ऊपर से जिस सहजता के साथ स्पिनरों पर प्रहार करते हैं, वह इस स्वाभाविक बढ़त का बेहतरीन उदाहरण है.
भारतीय क्रिकेट आज एक ऐसी क्रांति के दौर से गुजर रहा है जहां हर प्रारूप और हर स्थान के लिए एक से बढ़कर एक प्रतिभाशाली बाएं हाथ का खिलाड़ी तैयार खड़ा है. ओपनिंग के लिए यशस्वी जायसवाल और अभिषेक शर्मा जैसे तूफानी खिलाड़ी हैं, मध्यक्रम को संभालने के लिए तिलक वर्मा हैं, तो वहीं पारी को अंतिम ओवरों में अंजाम तक पहुंचाने के लिए रिंकू सिंह, ईशान किशन और ऋषभ पंत जैसा मजबूत ढांचा है. युवा वैभव सूर्यवंशी की एंट्री इस बात का सबूत है कि आने वाले दशकों में भी भारतीय क्रिकेट में बाएं हाथ के खिलाड़ियों का यह जलवा इसी तरह बरकरार रहेगा.
First Published :
August 13, 2026, 21:37 IST



