‘वो मेरे गीत नहीं गाएंगी’, साहिर लुधियानवी को चुभ गई लता मंगेशकर की बात, संगीतकार को भुगतना पड़ा खामियाजा

Last Updated:August 14, 2026, 18:36 IST
लता मंगेशकर ने लीजेंड गीतकार साहिर लुधियानवी के लिखे कई कालजयी गाने गाए थे, मगर उनकी जिंदगी में भी एक ऐसा दौर आया, जब उनके बीच मनमुटाव था. साहिर लुधियानवी ने लता मंगेशकर से अपने गाने गवाना बंद कर दिया था. दरअसल, एक गाने की रिकॉर्डिंग के बीच संगीतकार सरदार मलिक ने कुछ ऐसा कह दिया कि गीतकार ने ऐलान कर दिया कि आज से लता मंगेशकर उनके गीत नहीं गाएंगी. कहते हैं कि घटना के साल भर बाद उनके बीच समझौता हुआ और चीजें पहले की तरह सामान्य हो गईं.
नई दिल्ली: साहिर लुधियानवी अपने दौर के बड़े शायर थे. उन्होंने साल 1949 से फिल्मी दुनिया में काम करना शुरू किया था. उन्हें फिल्म ‘नौजवान’ से पहचान मिली थी, जिसके गाने एसडी बर्मन ने कंपोज किए थे. लता मंगेशकर ने इस फिल्म का एक गाना ‘ठंडी हवाएं लहरा के आएं’ गाया था, जिसे पॉपुलर बनाने में दिग्गज गायिका का बड़ा रोल समझा गया.
साहिर लुधियानवी अपने गीतों से मशहूर हो चुके थे, मगर लता मंगेशकर का नाम उनसे थोड़ा ज्यादा था. एक बार की बात है. लता मंगेशकर को सरदार मलिक का एक कंपोज किया गीत रिकॉर्ड करना था, जिसे साहिर लुधियानवी ने लिखा था. लता मंगेशकर जब साहिर के लिखे गीत का अभ्यास कर रही थीं, तो वे बार-बार कुछ शब्दों में अटक रही थीं. लता जी को गाने में दिक्कत हो रही थी, तो उन्होंने साहिर साहब से उन शब्दों को बदलने के लिए कहा. साहिर लुधियानवी ने अपने लिखे को बदलने से साफ इनकार कर दिया. दोनों दिग्गजों के बीच मतभेद बढ़ने लगा, तो सरदार मलिक बीच-बचाव में आए.
सरदार मलिक ने साहिर लुधियानवी से कहा कि लता जी आपका जो भी गीत गाती हैं, वह सुपरहिट हो जाता है, तो वह जो भी कह रही हैं, उसे मान लीजिए. साहिर ने ऐसी किसी संभावना से इनकार कर दिया. संगीतकार की बातों से आहत साहिर लुधियानवी ने कहा कि मेरे गीत उस उरूज तक न पहुंच जाएं जब लोग उन्हें प्यार न करने लगें, तब तक लता जी मेरे कोई गीत नहीं गाएंगी. अगर आपको लगता है कि लता जी की वजह से मेरे गीत हिट हो रहे हैं, तो लता जी मेरे गीत आज से नहीं गाएंगी. मेरे गीत किसी आवाज के मोहताज नहीं हैं.
Add as Preferred Source on Google
साहिर लुधियानवी की बातों से लता मंगेशकर नाराज हो गईं. वे वहां से चली गईं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद का खामियाजा सरदार मलिक को भुगतना पड़ा था. कहते हैं कि लता-साहिर ने करीब एक-डेढ़ साल तक साथ में काम नहीं किया.
साहिर-लता के बीच हुआ यह वाकया 1957 से 58 के बीच का हो सकता है, क्योंकि 57 में ‘प्यासा’, ‘नया दौर’ जैसी फिल्में आई थीं, जिनके गाने साहिर ने लिखे थे और इन्हें लता मंगेशकर ने नहीं गाया था. साल 1958 की फिल्म ‘फिर सुबह होगी’ के गाने भी लता मंगेशकर ने नहीं गाए थे. इसके गाने भी साहिर साहब ने लिखे थे. लता ने भले इन फिल्मों के गाने न गाए हों, मगर वे खूब हिट हुए थे.
साहिर लुधियानवी लिखते जा रहे थे और उनके गीत खूब हिट हो रहे थे. तब शायद संगीतकारों-फिल्म मेकर्स को लगा होगा कि उनके गानों को अगर लता मंगेशकर की आवाज मिल जाए, तो बात कुछ और होगी. फिर दोनों के बीच समझौता हुआ, जिसमें उनकी दोस्ती हो गई.
साहिर लुधियानवी ने उस मुलाकात में कहा था कि आज से लता जी और मैं गहरे दोस्त बन गए हैं. हम दोनों बराबर हैं. उनका जो कद है, वही मेरा है. साहिर से मतभेद खत्म होने के बाद लता मंगेशकर ने उनकी एक अमर रचना गाई जो 1958 में आई फिल्म ‘साधना’ में इस्तेमाल हुआ था. वह अमर गाना है- ‘औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया.’
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
August 14, 2026, 18:36 IST



